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Jammu Kashmir: अनुच्छेद 370 के बाद जम्मू कश्मीर में मतदान को लेकर बड़ा बदलाव, जानें किसे हो सकता है फायदा?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Fri, 19 Aug 2022 05:40 PM IST
सार
विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच केंद्र शासित राज्य जम्मू कश्मीर में दो बड़े बदलाव हो रहे हैं। इसी को लेकर तमाम तरह के कयास लगने लगे हैं। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाना भी शुरू कर दिया है।
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जम्मू कश्मीर में बदलाव
- फोटो : अमर उजाला
अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर में इस साल पहली बार विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। चुनाव आयोग इसके लिए तैयारी कर रहा है। कहा जा रहा है कि गुजरात और हिमाचल प्रदेश के साथ ही यहां भी विधानसभा चुनाव हो सकते हैं।
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मतदान
- फोटो : अमर उजाला
पहले वोटर लिस्ट के नियम को जान लीजिए?
बुधवार 17 अगस्त को जम्मू कश्मीर चुनाव आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार का एक बयान सामने आया। इसमें उन्होंने बताया कि अब जम्मू कश्मीर में वोटर रहने वाले बाहरी लोग भी वोट दे सकेंगे। अनुच्छेद 370 हटने की वजह से जम्मू कश्मीर में वोटर बनने के लिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। यानी, अन्य राज्यों की तरह ही अब अगर आप जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं तो वहां का वोटर बन सकते हैं।
मतलब जम्मू कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों के जवान, उनके परिवार के सदस्य जो साथ रहते हैं, दूसरे राज्यों से आकर केंद्रीय और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों, सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोग और उनके परिजन, दूसरे राज्यों से आकर काम करने वाले मजदूर, प्राइवेट संस्थानों में नौकरी करने वाले लोग, कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले छात्र भी जम्मू कश्मीर के वोटर बन सकते हैं। बस उम्र 18 साल से अधिक हो।
अनुमान लगाया जा रहा है कि वोटर्स बनने के नए नियम से करीब 25 लाख नए वोटर्स बढ़ सकते हैं। आयोग की तरफ से इसके लिए अध्यादेश भी जारी किया जा चुका है। वोटर बनने के फार्म में भी बदलाव हो चुका है।
बुधवार 17 अगस्त को जम्मू कश्मीर चुनाव आयोग मुख्य निर्वाचन अधिकारी हृदेश कुमार का एक बयान सामने आया। इसमें उन्होंने बताया कि अब जम्मू कश्मीर में वोटर रहने वाले बाहरी लोग भी वोट दे सकेंगे। अनुच्छेद 370 हटने की वजह से जम्मू कश्मीर में वोटर बनने के लिए स्थायी निवास प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। यानी, अन्य राज्यों की तरह ही अब अगर आप जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं तो वहां का वोटर बन सकते हैं।
मतलब जम्मू कश्मीर में तैनात सुरक्षाबलों के जवान, उनके परिवार के सदस्य जो साथ रहते हैं, दूसरे राज्यों से आकर केंद्रीय और राज्य सरकार के अलग-अलग विभागों, सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले लोग और उनके परिजन, दूसरे राज्यों से आकर काम करने वाले मजदूर, प्राइवेट संस्थानों में नौकरी करने वाले लोग, कॉलेजों-विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करने वाले छात्र भी जम्मू कश्मीर के वोटर बन सकते हैं। बस उम्र 18 साल से अधिक हो।
अनुमान लगाया जा रहा है कि वोटर्स बनने के नए नियम से करीब 25 लाख नए वोटर्स बढ़ सकते हैं। आयोग की तरफ से इसके लिए अध्यादेश भी जारी किया जा चुका है। वोटर बनने के फार्म में भी बदलाव हो चुका है।
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मतदान
- फोटो : अमर उजाला
अभी कितने वोटर्स हैं?
जम्मू कश्मीर में अभी 18 साल से अधिक उम्र के करीब 98 लाख लोग रहते हैं। हालांकि, वोटर्स लिस्ट की अंतिम सूची में इनकी संख्या 76 लाख है। ऐसे में अगर 25 लाख नए वोटर्स बनते हैं तो राज्य में वोट देने वालों की संख्या एक करोड़ से ऊपर हो जाएगी।
जम्मू कश्मीर में अभी 18 साल से अधिक उम्र के करीब 98 लाख लोग रहते हैं। हालांकि, वोटर्स लिस्ट की अंतिम सूची में इनकी संख्या 76 लाख है। ऐसे में अगर 25 लाख नए वोटर्स बनते हैं तो राज्य में वोट देने वालों की संख्या एक करोड़ से ऊपर हो जाएगी।
नए परिसीमन के तहत होंगे चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
नए परिसीमन के तहत होगा चुनाव
केंद्र शासित राज्य बनने के बाद जम्मू कश्मीर में नए सिरे से हुए परिसीमन के तहत ही चुनाव होगा। इसमें जम्मू में छह और कश्मीर में एक विधानसभा सीट समेत कुल सात विधानसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएंगी। नए परिसीमन में जम्मू की विधानसभा सीटें 37 से बढ़कर 43 और कश्मीर की 46 से 47 हो जाएंगी।
2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया था। तब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 विधानसभा सीटें थीं, लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग केंद्र शासित राज्य बना दिया गया। इस बदलाव से जम्मू कश्मीर की चार सीटें लद्दाख में चली गई हैं। यानी अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 83 सीटें रह गईं। जिसे अब बढ़ाकर 90 किया जाना है।
केंद्र शासित राज्य बनने के बाद जम्मू कश्मीर में नए सिरे से हुए परिसीमन के तहत ही चुनाव होगा। इसमें जम्मू में छह और कश्मीर में एक विधानसभा सीट समेत कुल सात विधानसभा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसके बाद जम्मू-कश्मीर में विधानसभा सीटों की संख्या 83 से बढ़कर 90 हो जाएंगी। नए परिसीमन में जम्मू की विधानसभा सीटें 37 से बढ़कर 43 और कश्मीर की 46 से 47 हो जाएंगी।
2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया गया था। तब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 87 विधानसभा सीटें थीं, लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग केंद्र शासित राज्य बना दिया गया। इस बदलाव से जम्मू कश्मीर की चार सीटें लद्दाख में चली गई हैं। यानी अब जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 83 सीटें रह गईं। जिसे अब बढ़ाकर 90 किया जाना है।
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पीओके को भी शामिल किया गया है।
- फोटो : अमर उजाला
पीओके को भी शामिल किया गया
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों की कुल संख्या 107 से बढ़ाकर 114 किए जाने का प्रस्ताव है। इन 114 में से 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके के लिए आरक्षित हैं, जो खाली रहेंगी। पहली बार अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं, इनमें से छह सीटें जम्मू और तीन सीटें कश्मीर के लिए निर्धारित हैं। पहली बार कश्मीरी पंडितों के लिए दो सीटें रिजर्व करने की सिफारिश की गई है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के अनुसार जम्मू-कश्मीर की विधानसभा सीटों की कुल संख्या 107 से बढ़ाकर 114 किए जाने का प्रस्ताव है। इन 114 में से 24 सीटें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके के लिए आरक्षित हैं, जो खाली रहेंगी। पहली बार अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए नौ सीटें आरक्षित की गई हैं, इनमें से छह सीटें जम्मू और तीन सीटें कश्मीर के लिए निर्धारित हैं। पहली बार कश्मीरी पंडितों के लिए दो सीटें रिजर्व करने की सिफारिश की गई है।
