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UP Politics: अखिलेश ने केशव को दिया CM बनने का ऑफर, क्या BJP के 100 विधायकों के पाला बदलने पर बदलेगी सरकार?
सार
2017 विधानसभा चुनाव के दौरान केशव प्रसाद मौर्य ने भाजपा की जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। तब वह प्रदेश अध्यक्ष थे और उन्होंने भाजपा से ओबीसी और दलित वर्ग को जोड़ा था। तब माना जा रहा था कि वह यूपी के मुख्यमंत्री बनाए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद कई बार केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ के बीच अनबन की खबरें आती रहीं।
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अखिलेश यादव, केशव प्रसाद मौर्य और योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश में सियासी बयानों का भूचाल आया हुआ है। इसकी शुरुआत समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बयान से हुई। मंगलवार को उन्होंने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को 100 विधायकों के साथ पाला बदलने पर मुख्यमंत्री बनाने का ऑफर दे दिया। इसके बाद से सियासी गलियारे में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव
- फोटो : फाइल फोटो
पहले जानिए अखिलेश यादव ने क्या कहा?
अखिलेश यादव मंगलवार को एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'केशव प्रसाद मौर्य बहुत कमजोर आदमी हैं। उन्होंने सपना तो देखा था मुख्यमंत्री बनने का। आज भी ले आएं 100 विधायक। अरे बिहार से उदाहरण लें न वो। जो बिहार में हुआ वो यूपी में क्यों नहीं करते हैं? अगर उनमें हिम्मत हैं और उनके साथ अगर विधायक हैं। एक बार तो वो बता रहे थे कि उनके पास 100 से ज्यादा विधायक हैं। आज भी विधायक ले आएं समाजवादी पार्टी समर्थन कर देगी उनका।'
अखिलेश यादव मंगलवार को एक न्यूज चैनल को इंटरव्यू दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने डिप्टी सीएम केशव प्रसाद को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'केशव प्रसाद मौर्य बहुत कमजोर आदमी हैं। उन्होंने सपना तो देखा था मुख्यमंत्री बनने का। आज भी ले आएं 100 विधायक। अरे बिहार से उदाहरण लें न वो। जो बिहार में हुआ वो यूपी में क्यों नहीं करते हैं? अगर उनमें हिम्मत हैं और उनके साथ अगर विधायक हैं। एक बार तो वो बता रहे थे कि उनके पास 100 से ज्यादा विधायक हैं। आज भी विधायक ले आएं समाजवादी पार्टी समर्थन कर देगी उनका।'
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केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
केशव ने कैसे पलटवार किया?
अखिलेश यादव का बयान आते ही सियासी गलियारे में हंगामा मच गया। एक के बाद एक भाजपा नेताओं के बयान आने शुरू हो गए। खुद केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया। केशव मौर्य ने कहा, 'अखिलेश यादव मुझसे घृणा करते हैं। विधानसभा में अखिलेश का प्यार मेरे प्रति सबने देखा है। अखिलेश यादव खुद डूबने वाले हैं वो मुझे क्या मुख्यमंत्री बनाएंगे?'
केशव यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, 'अखिलेश सामंतवादी मानसिकता के बन चुके हैं। समाजवादी पार्टी नाम की कोई पार्टी नहीं है। एक परिवार की पार्टी है। उनके दावे में कोई दम नहीं है। भाजपा अपने आप में इतनी मजबूत पार्टी है, जिसको किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। हमारे गठबंधन के जो साथी हैं, वो हमारे साथ हैं। उनके साथ मिलकर हम सरकार चला रहे हैं। वे (अखिलेश यादव) अपने 100 विधायक बचाएं। वो सब भाजपा में आने को तैयार हैं।'
अखिलेश यादव का बयान आते ही सियासी गलियारे में हंगामा मच गया। एक के बाद एक भाजपा नेताओं के बयान आने शुरू हो गए। खुद केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार किया। केशव मौर्य ने कहा, 'अखिलेश यादव मुझसे घृणा करते हैं। विधानसभा में अखिलेश का प्यार मेरे प्रति सबने देखा है। अखिलेश यादव खुद डूबने वाले हैं वो मुझे क्या मुख्यमंत्री बनाएंगे?'
केशव यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, 'अखिलेश सामंतवादी मानसिकता के बन चुके हैं। समाजवादी पार्टी नाम की कोई पार्टी नहीं है। एक परिवार की पार्टी है। उनके दावे में कोई दम नहीं है। भाजपा अपने आप में इतनी मजबूत पार्टी है, जिसको किसी के सहारे की जरूरत नहीं है। हमारे गठबंधन के जो साथी हैं, वो हमारे साथ हैं। उनके साथ मिलकर हम सरकार चला रहे हैं। वे (अखिलेश यादव) अपने 100 विधायक बचाएं। वो सब भाजपा में आने को तैयार हैं।'
सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
अब समझिए भाजपा के 100 विधायक टूटने पर क्या सरकार बदल सकती है?
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव का बयान सियासी है। कई बार अंधेरे में तीर छोड़ने पर निशाना लग भी जाता है। अखिलेश ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की है। मतलब वह भाजपा के अंदर उथल-पुथल लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें यह भी मालूम है कि 100 विधायक फिलहाल टूटना बहुत मुश्किल है, लेकिन फिर भी उन्होंने यह बयान देकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया। ये एक तरह से मनोवैज्ञानिक खेल है। जिसे खेलने की कोशिश सपा प्रमुख कर रहे हैं।'
प्रमोद ने आगे आंकड़ों के जरिए यह भी बताने की कोशिश की है कि अगर 100 विधायक भाजपा से टूट भी जाते हैं तो क्या होगा? प्रमोद कहते हैं, '403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में अभी भाजपा की अगुआई वाली एनडीए के पास 272 विधायकों का समर्थन है। इसमें अकेले भाजपा के 254 सदस्य हैं। इसके अलावा अपना दल (एस) के 12 और निषाद पार्टी के छह सदस्यों का समर्थन मिला हुआ है। वहीं, समाजवादी पार्टी की अगुआई वाले विपक्ष के पास 119 विधायकों का समर्थन है। इसमें समाजवादी पार्टी के 111 और आरएलडी के आठ विधायक शामिल हैं। सपा गठबंधन से हाल ही में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अलग हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पास छह विधायकों का समर्थन है।'
इसे समझने के लिए हमने वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद कुमार सिंह से बात की। उन्होंने कहा, 'अखिलेश यादव का बयान सियासी है। कई बार अंधेरे में तीर छोड़ने पर निशाना लग भी जाता है। अखिलेश ने भी कुछ ऐसा ही करने की कोशिश की है। मतलब वह भाजपा के अंदर उथल-पुथल लाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्हें यह भी मालूम है कि 100 विधायक फिलहाल टूटना बहुत मुश्किल है, लेकिन फिर भी उन्होंने यह बयान देकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया। ये एक तरह से मनोवैज्ञानिक खेल है। जिसे खेलने की कोशिश सपा प्रमुख कर रहे हैं।'
प्रमोद ने आगे आंकड़ों के जरिए यह भी बताने की कोशिश की है कि अगर 100 विधायक भाजपा से टूट भी जाते हैं तो क्या होगा? प्रमोद कहते हैं, '403 विधानसभा सीटों वाले यूपी में अभी भाजपा की अगुआई वाली एनडीए के पास 272 विधायकों का समर्थन है। इसमें अकेले भाजपा के 254 सदस्य हैं। इसके अलावा अपना दल (एस) के 12 और निषाद पार्टी के छह सदस्यों का समर्थन मिला हुआ है। वहीं, समाजवादी पार्टी की अगुआई वाले विपक्ष के पास 119 विधायकों का समर्थन है। इसमें समाजवादी पार्टी के 111 और आरएलडी के आठ विधायक शामिल हैं। सपा गठबंधन से हाल ही में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अलग हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के पास छह विधायकों का समर्थन है।'
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केशव प्रसाद मौर्य
- फोटो : अमर उजाला
प्रमोद के अनुसार, अगर भाजपा से 100 विधायक अलग होते हैं तो सपा गठबंधन के सदस्यों को मिलकर कुल आंकड़ा 219 का होता है। बहुमत का आंकड़ा 202 है। वहीं, भाजपा की अगुआई वाली एनडीए के पास 172 विधायक बचेंगे। मतलब ऐसी स्थिति में अखिलेश यादव के बहुमत से अधिक विधायक होंगे और वह सरकार बनाने की स्थिति में आ जाएंगे।
हालांकि, फिर भी सरकार नहीं बना सकेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें एक बड़ा पेंच है। वह यह कि भाजपा से टूटने वाले 100 विधायकों पर दल बदल कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। मतलब इनकी सदस्यता जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी पार्टी के दो तिहाई विधायक से कम अगर टूटते हैं तो उनपर इस कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। भाजपा के पास अभी 254 विधायक हैं। ऐसे में दल बदल कानून से बचने के लिए भाजपा के 100 नहीं, बल्कि करीब 170 विधायकों को पाला बदलना होगा। मतलब साफ है कि 100 विधायक अगर भाजपा से टूटते हैं तो भी सरकार बदलना संभव नहीं है।
हालांकि, फिर भी सरकार नहीं बना सकेगी। ऐसा इसलिए क्योंकि इसमें एक बड़ा पेंच है। वह यह कि भाजपा से टूटने वाले 100 विधायकों पर दल बदल कानून के अनुसार कार्रवाई होगी। मतलब इनकी सदस्यता जा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी भी पार्टी के दो तिहाई विधायक से कम अगर टूटते हैं तो उनपर इस कानून के तहत कार्रवाई हो सकती है। भाजपा के पास अभी 254 विधायक हैं। ऐसे में दल बदल कानून से बचने के लिए भाजपा के 100 नहीं, बल्कि करीब 170 विधायकों को पाला बदलना होगा। मतलब साफ है कि 100 विधायक अगर भाजपा से टूटते हैं तो भी सरकार बदलना संभव नहीं है।
