फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Karnataka Election: कर्नाटक चुनाव का जातीय गणित, कैसे पासा पलट सकते हैं वोक्कालिगा और लिंगायत? समझें समीकरण

Tue, 11 Apr 2023 03:03 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 11 Apr 2023 03:03 PM IST
सार

आज हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर ऐसा क्या है कि सभी राजनीतिक दलों के बीच वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के वोटर्स को अपने पाले में करने के लिए रस्साकशी चल रही है? क्यों कहा जा रहा है कि ये दोनों समुदाय किसी भी राजनीतिक पार्टी का खेल पलट सकते हैं? आइए समझते हैं... 
 

विज्ञापन
Caste euations of Karnataka, how can Vokkaligas and Lingayats turn the karnataka election?
कर्नाटक चुनाव - फोटो : अमर उजाला
कर्नाटक विधानसभा के लिए 10 मई को वोट डाले जाएंगे। 13 मई को नतीजे आ जाएंगे। इसके पहले यहां की सियासत में जबरदस्त गहमा-गहमी देखने को मिल रही है। खासतौर पर दो समुदाय के वोटों को लेकर यहां के तीनों प्रमुख दलों के बीच घमासान मचा हुआ है। 
loader


हर राजनीतिक दल इन दोनों समुदाय के वोटर्स को अपनी ओर खींचना चाहता है। ये समुदाय है वोक्कालिगा और लिंगायत। ऐसे में आज हम ये जानने की कोशिश करेंगे कि आखिर ऐसा क्या है कि सभी राजनीतिक दलों के बीच वोक्कालिगा और लिंगायत समुदाय के वोटर्स को अपने पाले में करने के लिए रस्साकशी चल रही है? क्यों कहा जा रहा है कि ये दोनों समुदाय किसी भी राजनीतिक पार्टी का खेल पलट सकते हैं? आइए समझते हैं... 
 
Caste euations of Karnataka, how can Vokkaligas and Lingayats turn the karnataka election?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
पहले सूबे में जातिगत ताकत की बात कर लेते हैं 
कर्नाटक में 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 6.11 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा हिन्दू 5.13 करोड़ यानी 84 फीसदी हैं। इसके बाद मुस्लिम हैं जिनकी जनसंख्या 79 लाख यानी 12.91 फीसदी है। राज्य में ईसाई 11 लाख यानी लगभग 1.87 फीसदी हैं और जैन आबादी 4 लाख यानी 0.72 फीसदी है। 

कर्नाटक का लिंगायत सबसे बड़ा समुदाय है। इनकी आबादी करीब 17 फीसदी है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा समुदाय वोक्कालिगा है, जिसकी आबादी करीब 14 फीसदी हैं। राज्य में कुरुबा जाति की आबादी आठ फीसदी, एससी 17 फीसदी, एसटी सात फीसदी हैं। लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं। इन दोनों समुदायों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधार आंदोलन के चलते हुआ था। 
 
विज्ञापन
विज्ञापन
Caste euations of Karnataka, how can Vokkaligas and Lingayats turn the karnataka election?
लिंगायत - फोटो : सोशल मीडिया
अब लिंगायत समुदाय के बारे में जान लीजिए
 कर्नाटक में लिंगायत समुदाय का इतिहास 12वीं शताब्दी से शुरू होता है। 1956 में भाषा के आधार पर राज्यों का पुनर्गठन हुआ। इसके इसके साथ ही कन्नड़ भाषी राज्य मैसूर अस्तित्व में आया। जिसे बाद में कर्नाटक कहा गया। राज्य के गठन से ही यहां लिंगायत समुदाय का दबदबा रहा है।

इस दबदबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1956 से अब तक सूबे में आठ मुख्यमंत्री लिंगायत समुदाय से ही बने। माना जाता है कि कर्नाटक की 110 विधानसभा सीटों पर ये सीधा असर डालते हैं। कर्नाटक के अलावा पड़ोसी राज्यों महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में इस समुदाय की अच्छी आबादी है। अभी कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई भी लिंगायत समुदाय से आते हैं। 

लिंगायत समुदाय के लोग खुद के अलग धर्म की मांग कर रहे हैं। चुनाव में भी इसको लेकर खूब चर्चा है। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्वारमैया ने तो वादा भी कर दिया है कि अगर उनकी सरकार बनती है तो लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा दे दिया जाएगा। हालांकि, भाजपा की तरफ से अभी तक कोई ऐसा वादा नहीं किया गया है। वह भी तब जब भाजपा नेता और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज खुद लिंगायत समुदाय से जुड़े हैं। 
 
Caste euations of Karnataka, how can Vokkaligas and Lingayats turn the karnataka election?
कर्नाटक चुनाव - फोटो : सोशल मीडिया
वोक्कालिगा समुदाय की कितनी है ताकत? 
1973 में मैसूर को कर्नाटक नाम मिला। तब से अब तक 17 मुख्यमंत्रियों में से सात वोक्कालिगा समुदाय से थे। के चेंगलराय रेड्डी, केंगल हनुमंथैया और राज्य के पहले तीन मुख्यमंत्री कदीदल मंजप्पा वोक्कालिगा समुदाय से थे। वोक्कालिगा से ताल्लुक रखने वाले एचडी देवेगौड़ा कर्नाटक के पहले व्यक्ति बने जिन्होंने प्रधानमंत्री का पद संभाला। 
पुराने मैसूरु क्षेत्र में रामनगर, मांड्या, मैसूरु, चामराजनगर, कोडागु, कोलार, तुमकुरु और हासन जिले ऐसे हैं, जहां समुदाय के वोटर्स सबसे ज्यादा हैं। इस क्षेत्र में 58 विधानसभा क्षेत्र हैं, जो 224 सदस्यीय सदन में कुल सीटों की संख्या के एक-चौथाई से अधिक है। वर्तमान विधानसभा में इस क्षेत्र की 24 सीटों पर जनता दल (एस), 18 पर कांग्रेस और 15 पर भाजपा के विधायक हैं।

इसके अलावा, वोक्कालिगा का प्रभाव बेंगलुरु शहरी जिले में 28 निर्वाचन क्षेत्रों, बेंगलुरु ग्रामीण जिले (चार निर्वाचन क्षेत्रों), और चिक्काबल्लापुरा (आठ निर्वाचन क्षेत्रों) पर भी है। अनेकल को छोड़कर बेंगलुरु शहरी जिले के 28 विधानसभा क्षेत्रों में से सभी 27 में वोक्कालिगाओं का दबदबा है। 
 
वोक्कालिगा समुदाय में सबसे ज्यादा पकड़ जद (एस) की है। हालांकि, कांग्रेस भी कड़ी टक्कर देती है। लेकिन इस बार, भाजपा ने भी वोक्कालिगी वोट के लिए पूरी ताकत लगा दी है। हाल ही में वोक्कालिगाओं के लिए आरक्षण चार प्रतिशत से बढ़कर छह प्रतिशत हो गया है। इसकी वोक्कालिगा समुदाय के श्रद्धेय द्रष्टा, आदिचुंचनगिरी मठ के पुजारी स्वामी निर्मलानंदनाथ प्रशंसा की। यही नहीं, भाजपा ने बेंगलुरू के संस्थापक और विजयनगर राजवंश के 16 वीं शताब्दी के प्रमुख नाडा प्रभु केम्पे गौड़ा की 108 फुट ऊंची प्रतिमा का निर्माण भी कराया, जो बेंगलुरू अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास है।  
 
विज्ञापन
Caste euations of Karnataka, how can Vokkaligas and Lingayats turn the karnataka election?
कर्नाटक चुनाव - फोटो : AMAR UJALA
किस जाति के वोटर्स किसे देते हैं वोट? 
कर्नाटक के राजनीतिक विश्लेषक एस. वीरेंद्र कहते हैं, 'दलित वोटर्स आमतौर पर सभी दलों को यहां वोट करते हैं। हालांकि, सूबे के दलितों के बीच कांग्रेस की अच्छी पैठ है। चूंकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी कर्नाटक के दलित हैं, इसलिए इसका फायदा भी पार्टी को मिल सकता है। वहीं, दूसरी ओर मुसलमानों का वोट आमतौर पर कांग्रेस और जेडीएस के बीच बंट जाता है।' 

वीरेंद्र आगे कहते हैं, 'लिंगायत समुदाय कई साल से भाजपा को वोट देता रहा है। वोक्कालिगा वोट शेयर आमतौर पर कांग्रेस और जेडीएस को मिलता है। भाजपा इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा ने जिस तरह से आरक्षण का एलान किया है, उससे साफ है कि पार्टी का पूरा फोकस लिंगायत के साथ-साथ वोक्कालिगा वोटर्स पर भी है।'
 
विज्ञापन
अगली फोटो गैलरी देखें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Followed