ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी कब घोषित की जाती है? क्वारंटीन और आइसोलेशन में अंतर क्या होता है? या फिर पेशेंट 31 टर्म का इस्तेमाल क्यों किया जाता है। इन सभी सवालों के जवाब आपके लिए जानना बहुत जरूरी है, अमर उजाला के इस लेख का मकसद यही है कि आप भी समझें इस महामारी से जुड़ी आवश्यक शब्दावली। कोरोना महामारी के चलते हर कोई सतर्क है और इससे बचने के तमाम उपाय भी कर रहा है। सुबह से शाम तक बहुत सारे शब्द ( टर्मिनोलॉजी ) आपसे और हमसे टकराते हैं। कोरोना वायरस यानी COVID-19 से जुड़े इन शब्दों का अर्थ जानना जरूरी है, जिनका इस्तेमाल आजकल रोजाना हो रहा है,आइए विस्तार से जानते हैं इनका मतलब...
कोरोना वायरस: क्वारंटीन से लेकर इन्क्यूबेशन पीरियड तक, जानें कोविड 19 से जुड़े सारे शब्दों के मायने
जानें कोविड-19 से जुड़े सारे शब्दों का मतलब
क्या होता है इन्क्यूबेशन पीरियड
क्वारंटीन और आइसोलेशन में अंतर
ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी कब की जाती है घोषित
जानिए पेशेंट 31 का अर्थ
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एक निश्चित दूरी बनाकर रहना सोशल डिस्टेंसिंग है
सोशल डिस्टेंसिंग
एक दूसरे के संपर्क में आने से बचना और एक निश्चित दूरी बनाकर रहना सोशल डिस्टेंसिंग है। वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए एक दूसरे से निश्चित दूरी बनाकर रखना और अपने-अपने स्थानों पर सुरक्षित रहना है। दूरी बनाकर रहने से वायरस का संक्रमण भी कम होगा और यह फैलेगा भी नहीं। कोरोना वायरस की गति को कम करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बहुत जरूरी कदम है। यह इसलिए आवश्यक है ताकि स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली, वायरस की स्थिति को संभाल सके। इसके तहत सामूहिक समारोहों से दूर रहना है। कार्यालयों, स्कूलों, सम्मेलनों, खेल आयोजनों, शादियों आदि से दूरी और इसके आयोजनों का कुछ समय तक ना होना, जिससे संक्रमण की श्रृंखला को तोड़ा जा सके।
महामारी अधिनियम 1897 के तहत लॉकडाउन को लागू किया जाता है
लॉकडाउन एक प्रशासनिक आदेश होता है। इसको सरकार आपदा के दौरान सरकारी तौर पर लागू कर सकती है। इसमें लोगों से घर में रहने का अनुरोध किया जाता है और जरूरी सेवाओं के अलावा सारी सेवाएं बंद कर दी जाती हैं। इसका मकसद होता है, सब अपने-अपने घरों में सुरक्षित रहें।
महामारी अधिनियम 1897 के तहत लॉकडाउन को लागू किया जाता है। इस अधिनियम का इस्तेमाल किसी विकराल और विकट समस्या के दौरान किया जाता है। जब केंद्र और राज्य सरकार को ये विश्वास हो जाए कि कोई बड़ा संकट या महामारी देश या राज्य में आ चुकी है और सभी नागरिकों की जान को इससे खतरा हो सकता है तब इसको लागू किया जाता है। महामारी अधिनियम 1897 की धारा 2 राज्य सरकार को कुछ महत्वपूर्ण शक्तियां प्रदान करती है, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें बीमारी की रोकथाम के लिए अस्थायी रूप से कोई नियम बना सकती हैं।
वर्तमान समय में भारत में लॉकडाउन में आवश्यक सेवाओं जैसे पुलिस, अग्निशमन, मेडिकल, पैरामेडिकल, बस टर्मिनल, बस स्टैंड, सुरक्षा सेवाएं, पोस्टल सेवाएं, पेट्रोल पंप, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, टेलीकॉम एवं इंटरनेट सेवाएं, बैंक, एटीएम, पानी, बिजली, नगर निगम, मीडिया, डिलीवरी, ग्रॉसरी और दूध आदि सेवाओं को लॉकडाउन से छूट दी गई है ताकि अव्यवस्था ना फैले।
इस कानून के अंतर्गत निम्नलिखित प्रावधान हैं:
- सार्वजनिक सूचना (टीवी, अखबार, फोन, पर्चे आदि) के जरिए महामारी के प्रसार की रोकथाम के उपाय करना।
- सरकार किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के समूह जो महामारी से ग्रस्त है उसे किसी अस्पताल या अस्थाई आवास में रख सकती है।
- सरकारी आदेश नहीं मानना अपराध होगा और आईपीसी की धारा 188 के तहत सजा भी मिल सकती है। इसके अलावा जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
- महामारी एक्ट में सरकारी अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। अगर कोई अनहोनी होती है तो सरकारी अधिकारी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी।
साल 2009 में स्वाइन फ्लू को महामारी घोषित किया गया था
महामारी शब्द उन संक्रमणकारी बीमारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो एक ही समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के लोगों में फैल रही हो। कोरोना वायरस से पहले साल 2009 में स्वाइन फ्लू को महामारी घोषित किया गया था।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, जब वायरस बिलकुल नया हो, वह संपर्क के द्वारा आसपास के लोगों को संक्रमित कर रहा हो और उसका कोई इलाज न हो या उससे हो रही मौतों की संख्या तेजी से आगे बढ़ रही हो तो उसे महामारी घोषित किया जा सकता है।
एपिडेमिक
अंग्रेजी के शब्द एपिडेमिक से पैनडेमिक दोनों का अर्थ महामारी ही होता है। लेकिन दोनों में एक बड़ा अंतर भी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने शुरुआत में कोरोना वायरस को एपिडेमिक घोषित किया था। एपिडेमिक का हिंदी में अर्थ एक क्षेत्र विशेष तक ही सीमित रहने वाली बीमारी होता है।
पैनडेमिक
पैनडेमिक में बीमारी का विस्तार तेजी से एक देश से दूसरे देश तक होता है, इसका मतलब एक ही बीमारी से दुनिया के कई देश संक्रमित हो जाएं। इसलिए कोरोना वायरस को डब्लूएचओ ने बाद में पैनडेमिक घोषित कर दिया।
क्वारंटीन और आइसोलेशन में अंतर
- इसमें घर के एक कमरे में अलग रहना होता है।
- परिवार के सदस्य या किसी बाहरी से सीधा संपर्क नहीं रखा जाता है।
- संदिग्ध के कमरे में कोई दूसरा व्यक्ति नहीं जाए।
- बाथरूम नियमित तौर पर साफ हो। दूसरा व्यक्ति इसे इस्तेमाल न करे।
- संदिग्ध से छह फीट दूर रहना चाहिए। बाहर निकलें तो मास्क पहन लें।
- घर में अकेले हैं तो अपना जरूरी सामान किसी से मंगवाए।
- एक ही किचन है तो एक ही व्यक्ति वहां जाए। खुद किचन में जाने से बचें।
- बार-बार साबुन से हाथ धोते रहें।
- अपना कचरा इधर-उधर न फेंके।