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Tamil Nadu Controversy: डीएमके सांसद का विवादास्पद बयान, अलग तमिल राष्ट्र से लेकर पाकिस्तान और जिन्ना तक का जिक्र
Mon, 04 Jul 2022 06:44 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 04 Jul 2022 06:44 PM IST
सार
नमक्कल में हुई पार्टी के स्थानीय नेताओं की बैठक में जब राजा ये बोल रहे थे उस वक्त तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन भी मौजूद थे।
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द्रमुक सांसद ए. राजा।
- फोटो : Amar Ujala
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तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) ने हाल ही में अपने निकाय प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में केंद्र और राज्य के अधिकारों पर चर्चा हुई। बैठक में केंद्र सरकार के शासन को लेकर द्रमुक नेता जमकर बरसे। मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर आप लोग भी सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले काम करते हैं तो आपको इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
ए राजा
- फोटो : PTI
1. तमिलनाडु के अलग राज्य पर
ए. राजा ने कहा, "हमें अलग देश की मांग के लिए मजबूर न करें। पार्टी के संस्थापक पेरियार अपने निधन तक अलग देश की मांग करते रहे। लेकिन डीएमके ने लोकतंत्र और देश की एकता की खातिर इन मांगों के किनारे कर दिया। इसलिए मैं निवेदन करता हूं कि हमारे सीएम, जो कि फिलहाल अन्नादुरई के पथ पर हैं, उन्हें पेरियार का मार्ग लेने पर मजबूर न करें। राज्य को स्वायत्ता दें।"
गौरतलब है कि द्रमुक की स्थापना के शुरुआती वर्षों में उसकी मुख्य मांगों में से एक भारत से अलग द्रविड़ नाडु की मांग थी। पेरियार और अन्नादुरई ने लंबे समय तक यह मांग उठाई। हालांकि, 1962 में जब जवाहर लाल नेहरु के नेतृत्व वाली सरकार ने अलगाववाद को अवैध करार दे दिया, तो धीरे-धीरे तमिलनाडु को अलग देश बनाने की की मांग भी खत्म हो गई। हालांकि, द्रमुक में कई बार दबे-छिपे द्रविड़ नाडु के प्रति समर्थन जताया जा चुका है। लंबे समय बाद एक बार फिर ए. राजा ने अलग देश की मांग के बारे में बात कर इस मांग को बढ़ाने का काम किया है।
ए. राजा ने कहा, "हमें अलग देश की मांग के लिए मजबूर न करें। पार्टी के संस्थापक पेरियार अपने निधन तक अलग देश की मांग करते रहे। लेकिन डीएमके ने लोकतंत्र और देश की एकता की खातिर इन मांगों के किनारे कर दिया। इसलिए मैं निवेदन करता हूं कि हमारे सीएम, जो कि फिलहाल अन्नादुरई के पथ पर हैं, उन्हें पेरियार का मार्ग लेने पर मजबूर न करें। राज्य को स्वायत्ता दें।"
गौरतलब है कि द्रमुक की स्थापना के शुरुआती वर्षों में उसकी मुख्य मांगों में से एक भारत से अलग द्रविड़ नाडु की मांग थी। पेरियार और अन्नादुरई ने लंबे समय तक यह मांग उठाई। हालांकि, 1962 में जब जवाहर लाल नेहरु के नेतृत्व वाली सरकार ने अलगाववाद को अवैध करार दे दिया, तो धीरे-धीरे तमिलनाडु को अलग देश बनाने की की मांग भी खत्म हो गई। हालांकि, द्रमुक में कई बार दबे-छिपे द्रविड़ नाडु के प्रति समर्थन जताया जा चुका है। लंबे समय बाद एक बार फिर ए. राजा ने अलग देश की मांग के बारे में बात कर इस मांग को बढ़ाने का काम किया है।
अमित शाह
- फोटो : ANI
2. तमिल-हिंदी विवाद पर?
ए. राजा ने भाषा विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि हिंदी को भारत की एक भाषा होना चाहिए और देश को एक रखने के लिए हिंदी का इस्तेमाल जरूरी है। क्या एक भाषा देश को जोड़े रखेगी?"
ए. राजा ने भाषा विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "गृह मंत्री अमित शाह कहते हैं कि हिंदी को भारत की एक भाषा होना चाहिए और देश को एक रखने के लिए हिंदी का इस्तेमाल जरूरी है। क्या एक भाषा देश को जोड़े रखेगी?"
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मोहम्मद अली जिन्ना
- फोटो : BBC
3. पाकिस्तान और जिन्ना पर?
राजा ने पाकिस्तान के बंटवारे और जिन्ना के साथ हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, "पाकिस्तान जब अलग हुआ था, तब उस देश के संस्थापक उत्तरी पाकिस्तान के ढाका गए थे। जब वे वहां उर्दू में भाषण दे रहे थे तब एक युवा लड़के ने खड़े होकर कहा कि वह उर्दू नहीं, बल्कि सिर्फ बांग्ला जानता है। इसके बावजूद जिन्ना ने उर्दू में बोलना जारी रखा। बाद में यही पाकिस्तान के बंटवारे की वजह बना।"
राजा ने पाकिस्तान के बंटवारे और जिन्ना के साथ हुई एक घटना का जिक्र करते हुए कहा, "पाकिस्तान जब अलग हुआ था, तब उस देश के संस्थापक उत्तरी पाकिस्तान के ढाका गए थे। जब वे वहां उर्दू में भाषण दे रहे थे तब एक युवा लड़के ने खड़े होकर कहा कि वह उर्दू नहीं, बल्कि सिर्फ बांग्ला जानता है। इसके बावजूद जिन्ना ने उर्दू में बोलना जारी रखा। बाद में यही पाकिस्तान के बंटवारे की वजह बना।"
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संविधान निर्माण में अंबेडकर की भूमिका
- फोटो : facebook
4. भारत की अवधारणा और संविधान पर?
द्रमुक सांसद ने कहा कि भारत को राज्यों के संघ के तौर पर स्थापित करना खुद बीआर अंबेडकर के लिए मुश्किल काम था, क्योंकि तब सत्ता में बैठी कांग्रेस इसे मानने के लिए तैयार नहीं थी। राजा ने अंबेडकर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान में भारतम् शब्द जबरदस्ती जुड़वाया गया था, न कि उनकी मर्जी से। उन्होंने संविधान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें शक्तियों के तीन तरह से बंटवारे का जिक्र है- केंद्र की ताकतें, राज्य की ताकतें और समवर्ती शक्तियां। राजा ने कहा कि इसमें केंद्र सरकार के पास सबसे ज्यादा ताकते हैं।
द्रमुक सांसद ने कहा कि भारत को राज्यों के संघ के तौर पर स्थापित करना खुद बीआर अंबेडकर के लिए मुश्किल काम था, क्योंकि तब सत्ता में बैठी कांग्रेस इसे मानने के लिए तैयार नहीं थी। राजा ने अंबेडकर के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान में भारतम् शब्द जबरदस्ती जुड़वाया गया था, न कि उनकी मर्जी से। उन्होंने संविधान पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें शक्तियों के तीन तरह से बंटवारे का जिक्र है- केंद्र की ताकतें, राज्य की ताकतें और समवर्ती शक्तियां। राजा ने कहा कि इसमें केंद्र सरकार के पास सबसे ज्यादा ताकते हैं।