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IndiGo Crisis: समय-सस्ते विमानों से मिली लोकप्रियता, भारत में 65% का बाजार; एक चूक से खड़ा हुआ इतना बड़ा संकट

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: निर्मल कांत Updated Sun, 07 Dec 2025 04:34 PM IST
सार

देश की सबसे बड़ी घरेलू विमानन सेवा इंडिगो अपने इतिहास के सबसे बड़े परिचालन संकट का सामना कर रही। पिछले छह दिनों में सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं, हवाई अड्डों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। एयरलाइन ने रिफंड, शुल्क माफी और हवाई परिवहन की सुविधाएं दीं। यह एयरलाइन संकट क्यों खड़ा हुआ और अब तक क्या-क्या हुआ, पढ़िए-

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IndiGo Crisis: Gained popularity due to low-cost flights, 65 per cent market share;  mistake led major crisis
इंडिगो संचालन संकट - फोटो : Amar Ujala Graphics
इंडिगो कभी समय पालन और बड़े पैमाने पर उड़ानों के लिए प्रसिद्ध थी। लेकिन छह दिन में वह देशभर सैकड़ों उड़ानें रद्द कर चुकी है। इसे एयरलाइन के इतिहास का सबसे बड़ा परिचालन संकट माना जा रहा है। इसकी वजह है- नए नियमों के तहत पायलटों की जरूरत का गलत अनुमान लगाना और कर्मचारियों की कमी व कम कर्मचारियों पर निर्भर रहने की रणनीति अपनाना। 

 
नए पायलट ड्यूटी-टाइम नियम, कर्मचारियों की कमी और कड़ा की सर्दी में ज्यादा उड़ानों के कारण इंडिगो की चालक दल (क्रू) की प्रणाली में कमी उजागर हुई। एयरलाइन की रणनीति में हर विमान का अधिकतम उपयोग और रात की उड़ानों को बढ़ाना शामिल था। यह रणनीति काम नहीं कर पाई क्योंकि कई पायलटों को अनिवार्य रूप से विश्राम पर भेजा गया। 

पिछले छह दिनों से भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन सैकड़ों उड़ानें रद्द कर चुकी है। रविवार को उसने करीब 650 उड़ानें रद्द कीं, जिससे हजारों यात्री परेशान हुए। कई लोग महत्वपूर्ण बैठकों, नौकरी के लिए इंटरव्यू और शादी में शामिल नहीं हो सके, जबकि कुछ यात्रियों ने आपात चिकित्सा स्थिति का सामना किया। इंडिगो भारत के घरेलू बाजार का 65 फीसदी नियंत्रित करती है, जिससे इस व्यवधान का देश में असर पड़ा और हवाई अड्डों पर भीड़ जमा हो गई। टर्मिनल में निराश और गुस्साए यात्री थे। साथ ही हजारों बैग हवाई अड्डे पर बिखरे पड़े थे। 

ये भी पढ़ें: इंडिगो संकट पर संसदीय समिति सख्त, सभी निजी एयरलाइंस और DGCA के अधिकारियों को कर सकती है तलब

नियामक एजेंसियों ने दखल दिया। किराए पर नियंत्रण और एडवाइजरी जारी की। जबकि एयरलाइन ने शुल्क माफ करने, रिफंड देने और चरणबद्ध तरीके से सेवाएं बहाल करने की घोषणा। इंडिगो और टाटा समूह की एअर इंडिया का 91 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है, इसलिए सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा। 
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इंडिगो के उड़ान रद्द - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
संकट के क्या कारण है?
विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) नियम लागू किए, ताकि पायलट अधिक विश्राम कर सकें और ये नियम वैश्विक सुरक्षा मानकों के साथ मेल खाएं। नए नियमों में पायलटों के साप्ताहिक विश्राम समय, रात की उड़ानों की सीमा और लगातार रात की ड्यूटी पर कड़े प्रतिबंध थे, जिससे पायलट प्रति सप्ताह कम उड़ानें संचालित कर सकते हैं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में पायलटों के लिए विश्राम के नियमों पर दस साल पुराने मामले को खत्म कर दिया था और इसे अंतिम फैसला माना। कोर्ट ने गौर किया कि भारत के व्यापक थकान-प्रबंधन ढांचे, विमानन जरूरतों (सीएआर-2024) की अधिसूचना प्रक्रिया 'शुरू हो चुकी' थी और पायलट संघों द्वारा विमानन नियामक के खिलाफ दायर याचिकाओं में अब कोई मामला शेष नहीं था। सात अप्रैल, 2025 को जज तारा वितस्ता गंजू ने सरकार से यह सुनिश्चित किया कि सीएआर- 2024 के 15 प्रावधान एक जुलाई, 2025 तक लागू किए जाएंगे और बाकी सात प्रावधान एक नवंबर, 2025 तक लागू होंगे। एयरलाइनों को निर्देश दिया गया कि वे तीन हफ्तों के भीतर अपनी फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (एफडीटीएल) योजना डीजीसीए को सौंपें, जिसे न्यायालय ने कानून और व्यवहार के बीच का पुल माना। याचिकाएं इस समझ के साथ बंद कर दी गईं कि नियम लागू किए जा रहे हैं और उनका पालन होगा।

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इंडिगो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
योजना में कमी
योजना में कमी का कारण यह है कि इंडिगो ने नए नियमों के अनुसार कितने पायलट चाहिए, इसका सही अनुमान नहीं लगाया। एयरबस ए320 के लिए उन्हें 2,422 कैप्टन की जरूरत थी, लेकिन केवल 2,357 थे। फर्स्ट ऑफिसर्स में भी कमी थी। उनकी केवल जरूरी कर्मचारियों को ही रखने की रणनीति रात की उड़ानों और अधिक विमान उपयोग पर निर्भर थी और पुराने नियमों में काम करती थी। लेकिन नए नियमों के लागू होने के साथ उनके पास कोई अतिरिक्त आरक्षित पायलट नहीं बचा। 
IndiGo Crisis: Gained popularity due to low-cost flights, 65 per cent market share;  mistake led major crisis
इंडिगो की उड़ानें रद्द होने से हवाई अड्डों पर अफरा-तफरी। - फोटो : पीटीआई/अमर उजाला (फाइल)
बड़े पैमाने पर रद्द की गईं उड़ानें
दो दिसंबर को पहली बार बड़े पैमाने पर उड़ान रद्द करने की सूचना मिली। दिल्ली, बंगलूरू, हैदराबाद और मुंबई में 150 से अधिक उड़ानें रद्द हुईं और स्थिति और बिगड़ गई। प्रमुख हवाई अड्डे लंबी कतारों और खोए हुए बैग के कारण अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। 

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इंडिगो - फोटो : एएनआई (फाइल)
एयरलाइन की प्रारंभिक प्रतिक्रिया
इंडिगो ने तीन दिसंबर को समस्याओं को स्वीकार किया और तकनीकी गड़बड़ियों, मौसम, सर्दियों के शेड्यूल और चालक दल के लिए नियमों को जिम्मेदार बताया। एयरलाइन ने रिफंड और वैकल्पिक यात्रा की सुविधा देने की बात कही।
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