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क्या इस बार अमेठी में होगा उलटफेर, 2014 के आंकड़ों ने राहुल को डराया?

Mon, 06 May 2019 08:47 PM IST
Amit Mandal अमित मंडल
Updated Mon, 06 May 2019 08:47 PM IST
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Lok sabha chunav 2019: Ground reality of Amethi and battle of Rahul Gandhi Smriti Irani
अमेठी की जंग - फोटो : Amar Ujala

लोकसभा चुनाव 2019 के संग्राम में उत्तर प्रदेश के अमेठी सीट के मुकाबले पर इस बार सभी की नजरें हैं। सबको इंतजार है कि दो दिग्गजों की जंग में बाजी किसके हाथ लगेगी। क्या इस बार कोई उलटफेर होगा? कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तीसरी बार फिर मैदान में हैं। उनके मुकाबले भाजपा ने दोबारा केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों की तरफ से प्रचार चरम पर है, लेकिन भाजपा और स्मृति आक्रामक अंदाज में प्रचार करते दिख रहे हैं। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि यहां किस तरह का मुकाबला है और कौन किस पर भारी पड़ सकता है।

Lok sabha chunav 2019: Ground reality of Amethi and battle of Rahul Gandhi Smriti Irani
अमेठी में राहुल गांधी-स्मृति ईरानी की जंग - फोटो : Amar Ujala
सबसे पहले समझने की कोशिश करते हैं कि 1999 से 2014 के बीच यहां किस कदर कांग्रेस की हवा बह रही थी। इस दौरान कांग्रेस का वोट प्रतिशत कितना रहा था। 1999 में यहां से सोनिया गांधी ने चुनाव लड़ा। उनकी जीत का मार्जिन 48 फीसदी रहा। 2004 में राहुल गांधी लड़े और बड़ी जीत हासिल की। जीत का मार्जिन रहा 49.33 फीसदी। 2009 में राहुल फिर यहां से खड़े हुए और 57.24 फीसदी के मार्जिन से जीत हासिल की। यानी जीत का मार्जिन जबरदस्त रहा। लेकिन 2014 में ये अंतर महज 12 फीसदी रह गया। 

अमेठी में जीत का अंतर 

1999 में 48%
2004 में 49.33%
2009 में 57.24%
2014 में 12% 

Lok sabha chunav 2019: Ground reality of Amethi and battle of Rahul Gandhi Smriti Irani
स्मृति ईरानी-राहुल गांधी - फोटो : Amar Ujala
2014 चुनाव में यहां उलटफेर होते होते बचा। मोदी लहर के बीच भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दी। राहुल जीत तो गए लेकिन उनकी जीत का मार्जिन रहा महज 12.33 फीसदी। इस चुनाव में आम आदमी पार्टी की ओर से कुमार विश्वास भी चुनाव मैदान में थे, लेकिन असर नहीं छोड़ पाए। इसके बाद से भाजपा को यहां जीत की संभावना दिखने लगी और स्मृति ईरानी ने चुनाव तैयारियां शुरू कर दी। 
 
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Lok sabha chunav 2019: Ground reality of Amethi and battle of Rahul Gandhi Smriti Irani
Political status of Amethi - फोटो : ANI
अमेठी सीट 1967 से ही कांग्रेस का गढ़ रही है। हालांकि, दो बार उसे हार का भी सामना करना पड़ा है। एक 1977 में और दूसरी बार 1998 में। 1980 में संजय गांधी ने यहां से जीत हासिल की थी। हालांकि बाद में उनके परिवार की राहें जुदा हो गईं। यहां गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे मतदाता अब भी कांग्रेस को ही वोट देने की बात कहते हैं। यहां हुए काम गिनाते हैं। वहीं, कई लोग भाजपा के उठाए सवालों को भी सुन रहे हैं। अमेठी में कितना काम हुआ है, हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट होने के बावजूद उस तरह का विकास क्यों नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था? ऐसे सवाल उठते रहे हैं, लेकिन आखिर में गांधी परिवार के प्रति वफादारी चुनाव नतीजों में झलकती है।
 
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Lok sabha chunav 2019: Ground reality of Amethi and battle of Rahul Gandhi Smriti Irani
राहुल गांधी - फोटो : twitter
गौरीगंज में जहां कांग्रेस का दफ्तर है वहां जगह जगह दीवारों पर लिखे नारे बताते हैं कि कांग्रेस के लिए अमेठी की क्या अहमियत है। लेकिन इस बार हालात कुछ अलग हैं। प्रचार युद्ध में भाजपा पूरी ताकत से उतर पड़ी है। स्मृति लगातार यहां जमी हुई हैं और मतदाताओं से उनका संपर्क अभियान जोरों से चल रहा है। हालांकि, राहुल गांधी देशभर में रैलियां कर रहे हैं इसलिए यहां ज्यादा नहीं दिख रहे हैं। कांग्रेस को भरोसा है कि न्याय योजना के दम पर वह अमेठी की जंग आसानी से जीत जाएगी। हालांकि ये कैसे लागू होगा इस पर सवाल भी उठ रहे हैं। 
 
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