दुनिया में छाए कोरोना संकट के बीच चीन के खिलाफ जो माहौल बना है, उसके तीसरे विश्व युद्ध में तब्दील होने के आसार से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि युद्ध होता है तो इसमें सबसे अहम भूमिका होगी हवाई हमलों को अंजाम देने वाले फाइटर प्लेन की। ऐसे में आइए जानते हैं दुनिया के कुछ सबसे शक्तिशाली और खूंखार फाइटर प्लेन के बारे में रोचक बातें...
वो सबसे खतरनाक लड़ाकू विमान जो दूर से ही कर देते हैं दुश्मन का 'खात्मा'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारत-चीन के बीच भी सबकुछ सामान्य नहीं
बता दें कि बीती पांच-छह मई को उत्तरी सिक्किम में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी हेलीकॉप्टर उड़ते हुए दिखाई दिए थे। चीनी सैन्य हेलीकॉप्टर वास्तविक नियंत्रण रेखा के बहुत करीब से उड़ान भर रहे थे।
इसके बाद भारतीय वायुसेना ने अपने लड़ाकू विमानों को वहां पेट्रोलिंग के लिए भेजा था। खास बात यह है कि भारतीय वायुसेना अक्सर अपने सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों और अन्य विमानों के साथ लद्दाख के लेह हवाई अड्डे से उड़ान भरती है। आगे पढ़ें: शक्तिशाली मशीनें- दुनिया के कुछ बेहतरीन लड़ाकू विमान
शक्तिशाली मशीनें- दुनिया के कुछ बेहतरीन लड़ाकू विमान
दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फाइटर प्लेन (लड़ाकू विमान) उड़ने वाली ऐसी मशीन होती है जो युद्ध की दिशा और परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इनकी ताकत में गतिशीलता (मेन्यूएवरिबिलिटी), छिपने या नजर नहीं आने की क्षमता (स्टील्थ), वैमानिकी (उड़ने की कला/एविओनिक्स), एक साथ कई कार्य करने की क्षमता (मल्टीरोल) और नेटवर्क डाटा शामिल होते हैं।
एफ-22 रैप्टर
- अमेरिका की कंपनी लॉकहीड मार्टिन ने इसे बनाया है। इसमें उन्नत स्टील्थ तकनीक, सुपरक्रूज, एडवांस्ड मेन्यूएवरिबिलिटी और इंटीग्रेटेड एविओनिक्स का अनूठा संयोजन है। यह 24 घंटे सैन्य अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
- इसमें दो एफ119 इंजन हैं, जो दुनियाभर के लड़ाकू विमानों में लगे इंजनों में सबसे उन्नत तकनीक से बने हैं। यही एफ-22 को उसकी ताकत देते हैं।
- इन इंजनों में अपनी अद्वितीय थ्रस्ट-वेक्टरिंग नोजल है और एकीकृत स्टील्थ विशेषताएं विमान को सुपरक्रूज की क्षमता प्रदान करते हैं, इन्हीं की वजह से यह बिना आफ्टरबर्नर का इस्तेमाल किए 1.5+ मैक गति हासिल करने में सक्षम है। ये प्लेन 180 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य पर हमला कर सकता है। इसे दुनिया का सबसे महंगा लड़ाकू विमान कहा जाता है।
सुखोई सु-57
- रूसी मीडिया के अनुसार, सु-57 पांचवीं पीढ़ी का मल्टीरोल फाइटर प्लेन है। सु-57 ने 29 जनवरी, 2010 को पहली बार आसमान में उड़ान भरी थी। यह अपने सुखोई परिवार के पहले के विमानों की तुलना में हमला करने और अन्य फाइटर जेट की खूबियों से लैस है।
- इसमें नवाचार प्रौद्योगिकियों (इनोवेशन टेक्नोलॉजी) के उपयोग के साथ-साथ मिश्रित सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इसकी एयरोडायनेमिक (वायुगतिकीय) क्षमता इसे रडार और इंफ्रारेड की पकड़ में आने से बचाती है।
- इस विमान की आयुध क्षमता की बात करें तो इसमें विशेष रूप से हाइपरसोनिक मिसाइल को ले जाने की क्षमता है। पांचवीं पीढ़ी के इस फाइटर जेट का सीरिया में युद्ध की परिस्थितियों के दौरान सफलतापूर्वक परीक्षण किया जा चुका है।