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By Election: जिस सीट से सीएम मान दो बार बने सांसद, वहीं लोकसभा उपचुनाव हारी 'आप', पंजाब चुनाव के 100 दिन बाद ही ऐसा क्यों?
Sun, 26 Jun 2022 09:24 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 26 Jun 2022 09:24 PM IST
सार
अमर उजाला के इस एनालिसिस में हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों आम आदमी पार्टी को विधानसभा चुनाव के तीन महीने बाद ही उस सीट पर हार मिली है, जहां से पंजाब के मौजूदा सीएम भगवंत मान लगातार दो बार संसद पहुंचे?
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सिमरनजीत सिंह मान
- फोटो : self
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शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के प्रमुख सिमरनजीत सिंह मान ने पंजाब की संगरूर लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी (आप) को हरा दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि पंजाब पुलिस के पूर्व आईपीएस सिमरनजीत सिंह ने 1999 के बाद से ही संगरूर और इसके आसपास कई चुनाव लड़े, लेकिन कभी जीत दर्ज नहीं कर सके। यहां तक कि पंजाब में तीन महीने पहले ही हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्हें अलमगढ़ सीट से हार मिली थी। उनकी पार्टी ने राज्य में एक भी सीट नहीं जीती थी। हालांकि, संगरूर लोकसभा चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को 5800 वोटों से हरा दिया।
आप के गुरमेल सिंह और अकाली दल अमृतसर के सिमरनजीत सिंह मान।
- फोटो : फाइल
आम आदमी पार्टी की हार की इतनी चर्चा क्यों?
विधानसभा चुनाव के ठीक बाद यह पंजाब में पहला चुनाव था। पंजाब सरकार की अग्निपरीक्षा भी थी। आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश और गुजरात में पंजाब मॉडल का प्रचार करने में जुटी थी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को पंजाब में बड़ा झटका लगा है। संगरूर लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। 2014 और 2019 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद यहां की जनता ने जनाधार भगवंत मान के पक्ष में दिया था। यही इकलौती लोकसभा सीट थी, जहां आम आदमी पार्टी अपना करिश्मा दोहरा पाई थी। यहीं वजह है कि इस हार की चर्चा है।
विधानसभा चुनाव के ठीक बाद यह पंजाब में पहला चुनाव था। पंजाब सरकार की अग्निपरीक्षा भी थी। आम आदमी पार्टी हिमाचल प्रदेश और गुजरात में पंजाब मॉडल का प्रचार करने में जुटी थी। गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को पंजाब में बड़ा झटका लगा है। संगरूर लोकसभा सीट आम आदमी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। 2014 और 2019 में प्रचंड मोदी लहर के बावजूद यहां की जनता ने जनाधार भगवंत मान के पक्ष में दिया था। यही इकलौती लोकसभा सीट थी, जहां आम आदमी पार्टी अपना करिश्मा दोहरा पाई थी। यहीं वजह है कि इस हार की चर्चा है।
आम आदमी पार्टी
- फोटो : Social media
कैसा रहा पार्टियों का वोट शेयर?
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में दो फीसदी कम हुआ है। जबकि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा की जमानत जब्त हो गई। इस बार आम आदमी पार्टी को 34.65 प्रतिशत वोट मिले हैं, वहीं भाजपा को 9 फीसदी, कांग्रेस को 11 और अकाली को 6 प्रतिशत वोट मिले हैं। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2019 लोकसभा में 27 प्रतिशत था, जो इस चुनाव में घटकर सिर्फ 11 फीसदी रह गया है। अकाली दल को 2019 में 24 फीसदी वोट मिले थे, जो अब सिर्फ 6 प्रतिशत रह गया है।
इस चुनाव में आम आदमी पार्टी का वोट शेयर 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में दो फीसदी कम हुआ है। जबकि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा की जमानत जब्त हो गई। इस बार आम आदमी पार्टी को 34.65 प्रतिशत वोट मिले हैं, वहीं भाजपा को 9 फीसदी, कांग्रेस को 11 और अकाली को 6 प्रतिशत वोट मिले हैं। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 2019 लोकसभा में 27 प्रतिशत था, जो इस चुनाव में घटकर सिर्फ 11 फीसदी रह गया है। अकाली दल को 2019 में 24 फीसदी वोट मिले थे, जो अब सिर्फ 6 प्रतिशत रह गया है।
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आम आदमी पार्टी की इस हार की वजहें क्या?
पंजाब के सीएम भगवंत मान।
- फोटो : twitter
1. वोटरों को खुश करने में नाकाम हुई आम आदमी पार्टी
आप की इस हार की एक वजह वोटरों की स्थानीय नेताओं से नाराजगी रही। दरअसल, इस क्षेत्र में आप को चार महीने पहले ही सभी नौ सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, स्थानीय नेतृत्व की ओर से समन्वय न बिठा पाने की वजह से कार्यकर्ता लगातार उनसे नाराज चल रहे थे। जानकार मानते हैं कि आप को ओवर कान्फिडेंस भी ले डूबा है। संगरूर को आप अपनी जागीर मानने लगी थी। लेकिन संगरूर ने आप का खेल शुरू कर दिया है। संगरूर ने ही आप को आइना भी दिखा दिया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी पर इस बार गुरमेल सिंह के तौर पर कमजोर प्रत्याशी खड़ा करने का भी आरोप लगा। संगरूर के पूर्व सांसद भगवंत मान ने प्रचार के आखिरी दिनों में जरूर अपने संसदीय क्षेत्र में दस्तक दी, लेकिन उनका यह कदम घराचौन गांव के सरपंच गुरमेल सिंह को जिताने में नाकाफी साबित हुआ।
आप की इस हार की एक वजह वोटरों की स्थानीय नेताओं से नाराजगी रही। दरअसल, इस क्षेत्र में आप को चार महीने पहले ही सभी नौ सीटों पर जीत मिली थी। हालांकि, स्थानीय नेतृत्व की ओर से समन्वय न बिठा पाने की वजह से कार्यकर्ता लगातार उनसे नाराज चल रहे थे। जानकार मानते हैं कि आप को ओवर कान्फिडेंस भी ले डूबा है। संगरूर को आप अपनी जागीर मानने लगी थी। लेकिन संगरूर ने आप का खेल शुरू कर दिया है। संगरूर ने ही आप को आइना भी दिखा दिया है। इसके अलावा आम आदमी पार्टी पर इस बार गुरमेल सिंह के तौर पर कमजोर प्रत्याशी खड़ा करने का भी आरोप लगा। संगरूर के पूर्व सांसद भगवंत मान ने प्रचार के आखिरी दिनों में जरूर अपने संसदीय क्षेत्र में दस्तक दी, लेकिन उनका यह कदम घराचौन गांव के सरपंच गुरमेल सिंह को जिताने में नाकाफी साबित हुआ।
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सिद्धू मूसेवाला के परिजनों से मिले सीएम भगवंत मान।
- फोटो : ANI
2. मूसेवाला की मौत के बाद नाराजगी
आप के खिलाफ लोगों का गुस्सा सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद और भी भड़का। मूसेवाला की मौत से पहले आप इस सीट पर किसी नामी चेहरे को उपचुनाव के लिए उतारने पर विचार कर रही थी। लेकिन हत्याकांड के बाद आप ने पैंतरा बदल दिया। मूसेवाला के समर्थकों ने भी गायक की हत्या की वजह आप के सिक्योरिटी वापस लेने के फैसले को बता दिया। संगरूर के करीब मनसा से आने वाले मूसेवाला का इस पूरे क्षेत्र में जबरदस्त प्रभाव भी रहा।
आप के खिलाफ लोगों का गुस्सा सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड के बाद और भी भड़का। मूसेवाला की मौत से पहले आप इस सीट पर किसी नामी चेहरे को उपचुनाव के लिए उतारने पर विचार कर रही थी। लेकिन हत्याकांड के बाद आप ने पैंतरा बदल दिया। मूसेवाला के समर्थकों ने भी गायक की हत्या की वजह आप के सिक्योरिटी वापस लेने के फैसले को बता दिया। संगरूर के करीब मनसा से आने वाले मूसेवाला का इस पूरे क्षेत्र में जबरदस्त प्रभाव भी रहा।