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20 साल बाद एक मंच पर राज-उद्धव ठाकरे: मराठी अस्मिता से लेकर CM फडणवीस तक, ठाकरे बंधुओं ने जमकर चलाए सियासी तीर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: शुभम कुमार Updated Sat, 05 Jul 2025 03:43 PM IST
सार

महाराष्ट्र की राजनीति में सियासी गर्माहट अपने चरम पर है। कारण है कि शनिवार को 20 साल बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए। इस दौरान ठाकरे बंधुओं ने मराठी अस्मिता को लेकर बात की। साथ ही फडणवीस सरकार पर जमकर निशाना साधा। दोनों भाईयों ने इस बात पर जोर दिया कि अब हम साथ हैं और हमेशा रहेंगे। आइए ठाकरे बंधुओं के इस मेल-मिलाप को तस्वीरों के माध्यम से समझते हैं। 

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Raj-Uddhav Thackeray on one stage after 20 years: From Marathi identity to CM Fadnavis News In Hindi
एक मंच पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : PTI
महाराष्ट्र की राजनीति में बीते कई हफ्तों से ठाकरे बंधुओं के साथ आने की बातचीत तेज हो रही थी। ऐसे में आज शानिवार को मराठी विजय दिवस रैली में दोनों भाईयों ने करीब 20 साल बाद एक साथ मंच साझा कर सारे सवालों का जवाब दे दिया। दोनों नेताओं ने मुंबई के वर्ली में एक बड़ी विजय रैली को संबोधित किया। बता दें कि यह रैली महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार की तरफ से स्कूलों में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने वाले फैसले को वापस लेने की खुशी में रखी गई थी।


हम मिलकर जीतेंगे महाराष्ट्र की सत्ता- उद्धव
रैली को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि हम साथ आए हैं और अब साथ रहेंगे। हम मिलकर मुंबई की नगर निगम और महाराष्ट्र की सत्ता में वापसी करेंगे। इस बयान पर वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियां और नारेबाजी की। उन्होंने आगे कहा कि सरकार जब-जब महाराष्ट्र पर हमला करती है, मराठी लोग एकजुट होते हैं, लेकिन बाद में फिर आपस में लड़ते हैं। यह बंद होना चाहिए।
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Raj-Uddhav Thackeray on one stage after 20 years: From Marathi identity to CM Fadnavis News In Hindi
एक मंच पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : PTI

'तीन भाषा नीति का मकसद मुंबई को अलग करना'  
इस दौरान राज ठाकरे ने भी राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि तीन-भाषा नीति का असली मकसद मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की साजिश थी। सिर्फ हमारे विरोध मार्च की खबर से ही सरकार को आदेश वापस लेने पड़े। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि अगला कदम लोगों को जाति के नाम पर बांटने का होगा। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह बांटो और राज करो की नीति अपना रही है।

ये भी पढ़ें:- Raj Uddhav Thackeray: क्या राजनीतिक रूप से एक हो पाएंगे राज-उद्धव, कैसे हुई साथ आने की शुरुआत; अब आगे क्या?

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Raj-Uddhav Thackeray on one stage after 20 years: From Marathi identity to CM Fadnavis News In Hindi
एक मंच पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : PTI

अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई के तंज पर राज का जवाब
इसके साथ ही रैली में कई बार विपक्षी पार्टियां राज और उद्धव ठाकरे के बेटों अमित और आदित्य की अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाई को लेकर तंज कसती हैं। इस पर राज ठाकरे ने जवाब दिया बाला साहेब ठाकरे खुद अंग्रेजी स्कूल में पढ़े थे, लेकिन उन्होंने कभी मराठी की अहमियत नहीं कम होने दी। एल.के. अडवाणी भी कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े, क्या उनका हिंदुत्व गलत है?

Raj-Uddhav Thackeray on one stage after 20 years: From Marathi identity to CM Fadnavis News In Hindi
एक मंच पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : PTI

उद्धव ने भाजपा और शिंदे को लिया आड़े हाथ
इसके साथ ही संयुक्त रैली को संबोधित करते हुए शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर जमकर हमला किया। उन्होंने कहा कि बांटेंगे तो कांटेंगे का नारा असल में मराठियों को बांटने के लिए था, न कि हिंदू-मुस्लिम के लिए। इसके साथ ही महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे पर भी जमकर निशाना साथा। उन्होंने उनके गुजरात में जय गुजरात बोलने की बाच पर तंज कसते हुए कहा कि वह जय गुजरात बोलकर खुद को साबित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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Raj-Uddhav Thackeray on one stage after 20 years: From Marathi identity to CM Fadnavis News In Hindi
एक मंच पर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे - फोटो : PTI
दोनों भाईयों के साथ आने पर उमड़ा जनसैलाब
20 साल बाद राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के साथ आने से उनके समर्थकों में एक जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। संयुक्त रैली में बड़ा जनसैलाब देखने को मिला। रैली के मंच पर सिर्फ राज और उद्धव ठाकरे ही बैठे थे, और उन्होंने ही भाषण दिया। मंच के सामने हजारों शिवसेना (यूबीटी) और मनसे कार्यकर्ता जमा थे, जिन्होंने झंडे लहराए और नारे लगाए। उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे और राज के बेटे अमित ठाकरे ने भी पहली बार सार्वजनिक मंच पर साथ में हाथ मिलाया और एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखा। ऐसे में ठाकरे बंधुओं का साथ आना यह आने वाली पीढ़ी की एकजुटता का संदेश भी माना जा रहा है।

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