Hindi News
›
Photo Gallery
›
India News
›
Shiv Sena: Why did Bal Thackeray call BJP Kamalabai? Know the full story of BJP-Shiv Sena relationship
{"_id":"645c630cde75aa58ba00ddd5","slug":"shiv-sena-why-did-bal-thackeray-call-bjp-kamalabai-know-the-full-story-of-bjp-shiv-sena-relationship-2023-05-11","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Shiv Sena: भाजपा को कमलाबाई क्यों कहते थे बाल ठाकरे? जानिए भाजपा-शिवसेना के रिश्तों की पूरी कहानी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Shiv Sena: भाजपा को कमलाबाई क्यों कहते थे बाल ठाकरे? जानिए भाजपा-शिवसेना के रिश्तों की पूरी कहानी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Thu, 11 May 2023 01:39 PM IST
सार
आइए जानते हैं भाजपा और शिवसेना के रिश्तों की पूरी कहानी। ये भी की आखिर बाला साहेब ठाकरे भाजपा को कमलाबाई क्यों कहते थे? दोनों के बीच गठबंधन कब और किन परिस्थितियों में हुआ? अब तक कैसे रिश्ते रहे?
महाराष्ट्र में शिवसेना पर हक को लेकर सियासी लड़ाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने शिंदे सरकार के गठन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष पर भी टिप्पणी की। हालांकि, कोर्ट ने उद्धव ठाकरे को राहत नहीं दी। मतलब महाराष्ट्र में अभी एकनाथ शिंदे की मुख्यमंत्री रहेंगे।
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन या रजिस्टर करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
फ्री ई-पेपर
सभी विशेष आलेख
सीमित विज्ञापन
सब्सक्राइब करें
बता दें कि पिछले साल ही उद्धव ठाकरे के खिलाफ जाकर 48 विधायकों के साथ एकनाथ शिंदे अलग हो गए थे। इसके बाद उन्होंने शिवसेना पर अपना दावा ठोक दिया। चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे के पक्ष में फैसला सुनाया और शिवसेना का चुनाव चिन्ह और नाम उनके खेमे को दे दिया। इसी के खिलाफ उद्धव ठाकरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। शिंदे गुट ने भी इसको लेकर कोर्ट का रूख किया था।
उद्धव ठाकरे ने इस पूरे विवाद के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया था। हालांकि, एक जमाना था जब महाराष्ट्र में भाजपा को शिवसेना का छोटा भाई कहा जाता था। यहां तक बाला साहेब ठाकरे भाजपा को कमलाबाई तक कह देते थे। अब महाराष्ट्र में शिवसेना के मुकाबले भाजपा ज्यादा मजबूत हो गई है। अब महाराष्ट्र में शिवसेना से ज्यादा भाजपा के विधायक और सांसद हैं।
आइए जानते हैं भाजपा और शिवसेना के रिश्तों की पूरी कहानी। ये भी की आखिर बाला साहेब ठाकरे भाजपा को कमलाबाई क्यों कहते थे? दोनों के बीच गठबंधन कब और किन परिस्थितियों में हुआ? अब तक कैसे रिश्ते रहे?
Trending Videos
2 of 10
अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी के साथ बाल ठाकरे।
- फोटो : अमर उजाला
जब पहली बार हुआ भाजपा-शिवसेना का गठबंधन
भाजपा-शिवसेना का पहली बार गठबंधन 1989 में हुआ था। भाजपा नेता प्रमोद महाजन खुद गठबंधन का प्रस्ताव लेकर बाल ठाकरे के पास गए थे। कहा जाता है कि उस दौरान महाजन के प्रस्ताव पर बाल ठाकरे ने मुंह से कुछ बोलने की बजाय एक कागज पर लिखा- 'शिवसेना 200 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और जो सीटें बचती हैं, उन पर भाजपा लड़ ले।' महाराष्ट्र में 288 विधानसभा सीटें हैं। ठाकरे के इस प्रस्ताव पर प्रमोद महाजन ने मोलभाव किया। आधे घंटे से भी कम समय में गठबंधन को इस बात पर फाइनल किया गया कि 1990 के विधानसभा चुनाव में शिवसेना 183 और भाजपा 104 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
3 of 10
बाल ठाकरे के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विचारधारा एक लेकिन दोनों में पति-पत्नी वाले रिश्ते रहे
वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप रायमुलकर कहते हैं, हिंदुत्व के नाम पर दोनों पार्टियां तेजी से आगे बढ़ीं। दोनों के विचारधारा एक सी थीं। मुद्दों और नीतियों में काफी समानता थी। दोनों के रिश्ते हमेशा पति-पत्नी जैसे थे। 1989 का लोकसभा चुनाव भी दोनों ने साथ लड़ा। तब भाजपा ने 33 और शिवसेना ने तीन सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। हालांकि, उस समय शिवसेना का अपना चुनाव चिह्न नहीं था, इसलिए उसके कई उम्मीदवार भाजपा के टिकट पर ही चुनाव लड़े थे। उस चुनाव में भाजपा 10 और शिवसेना एक सीट जीती थी।
फिर आया 1990 का विधानसभा चुनाव। तब 183 सीटों पर लड़ने वाली शिवसेना 52 सीटें जीत पाई जबकि 64 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई। वहीं, 104 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा के 42 उम्मीदवार जीते और 23 पर उसकी जमानत जब्त हुई। चुनाव में भाजपा स्ट्राइक रेट शिवसेना से बेहतर रहा। तब से लेकर अब इस गठबंधन ने जितने चुनाव लड़े सभी में भाजपा का स्ट्राइक रेट शिवसेना के मुकाबले बेहतर रहा।
4 of 10
बाल ठाकरे
- फोटो : अमर उजाला
खींचतान बढ़ी तो नगर निगम अलग तो विधानसभा साथ लड़े
1990 विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान का नतीजा था कि 1991 का बृहन्मुंबई नगर निगम का चुनाव भाजपा-शिवसेना ने अलग-अलग लड़ा था, क्योंकि सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन पा रही थी।
1995 का विधानसभा चुनाव आते-आते दोनों में खींचतान बढ़ने लगी थी कि अगर सरकार बनाने लायक सीटें आईं, तो मुख्यमंत्री किसका होगा। हालांकि, तब भाजपा महाराष्ट्र में जूनियर पार्टी ही थी। इसलिए बाल ठाकरे का तय किया हुआ फॉर्म्यूला लागू किया गया। इसके मुताबिक, जिस पार्टी की ज्यादा सीटें होंगी, उसका मुख्यमंत्री होगा।
तब शिवसेना 169 और बीजेपी 116 सीटों पर चुनाव लड़ी। नतीजा रहा कि शिवसेना 73 सीटें जीती, 60 पर जमानत जब्त हुई जबकि भाजपा 65 सीटें जीती और 25 पर जमानत जब्त हुई। गठबंधन की कुल सीटें 138 थीं, निर्दलीय विधायकों के समर्थन से शिवसेना-भाजपा सरकार बनाने में कामयाब हुई। शिवसेना के मनोहर जोशी मुख्यमंत्री बने और भाजपा के गोपीनाथ मुंडे उप-मुख्यमंत्री। हालांकि, जोशी के करीब 4 साल के कार्यकाल के बाद शिवसेना के नारायण राणे ने नौ महीने के लिए कुर्सी संभाली।
विज्ञापन
5 of 10
बाल ठाकरे
- फोटो : सोशल मीडिया
जब पहली बार बाल ठाकरे ने भाजपा को कमलाबाई कहा
अटल बिहारी वाजपेयी जब प्रधानमंत्री बने तब शिवसेना कोटे से दो कैबिनेट और एक राज्यमंत्री बनाया गया। लेबर रिफॉर्म, आर्टिकल 370 और राम मंदिर जैसे मुद्दों पर शिवसेना भाजपा की आलोचना करती रही। यही वह समय था, जब बाल ठाकरे भाजपा को कमलाबाई कहकर पुकारने लगे थे। 1999 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों को नुकसान उठाना पड़ा।
1999 में शिवसेना 161 और बीजेपी 117 सीटों पर एकसाथ चुनाव लड़ी। शिवसेना को 69 और भाजपा को 56 सीटें मिलीं। कहा जाता है कि 1999 के चुनाव में भाजपा-शिवसेना की आपसी मतभेद ने काफी नुकसान पहुंचाया। तब सरकार बनाने का मौका गंवाकर भाजपा-शिवसेना अगले 15 साल तक महाराष्ट्र की सत्ता से बाहर रहे। कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन जारी रहा। 1999 से 2014 तक मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कांग्रेस के विलासराव देशमुख, सुशील कुमार शिंदे, अशोक चव्हाण और पृथ्वीराज चव्हाण बैठे।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे| Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।