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Arya Samaj Marriage: आर्य समाज का सर्टिफिकेट विवाह के लिए क्यों मान्य नहीं, कैसे होती है यह शादी, अब आगे क्या?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 06 Sep 2022 04:49 PM IST
सार

आज हम आपको आर्य समाज से होने वाली शादियों के बारे में बताएंगे। कैसे आर्य समाज में शादियां होती हैं और इसके सर्टिफिकेट का क्या मतलब है? अगर आपने आर्य समाज से शादी की है तो कोर्ट के इस आदेश के बाद आपको क्या करना चाहिए? 

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Why Arya Samaj's certificate is not valid for marriage, how is this marriage, now what next?
आर्य समाज - फोटो : अमर उजाला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आर्य समाज मंदिर से मिलने वाले विवाह प्रमाण पत्र को अवैध बताया है। कोर्ट ने कहा कि केवल आर्य समाज के सर्टिफिकेट से विवाह साबित नहीं होता है। इसके पहले सुप्रीम कोर्ट भी इसको लेकर टिप्पणी कर चुका है। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद अब आर्य समाज से होने वाली शादियों और उनके वैधता पर सवाल उठने लगे हैं।


ऐसे में आज हम आपको आर्य समाज से होने वाली शादियों के बारे में बताएंगे। कैसे आर्य समाज में शादियां होती हैं और इसके सर्टिफिकेट का क्या मतलब है? अगर आपने आर्य समाज से शादी की है तो कोर्ट के इस आदेश के बाद आपको क्या करना चाहिए? 
 
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इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी क्यों की?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि सिर्फ आर्य समाज मंदिर की ओर से विवाह प्रमाण पत्र जारी होने से विवाह साबित नहीं होता है। याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनकी पत्नी को उसके मायके वालों ने अवैध रूप से बंदी बनाकर रखा है। अपनी बात साबित करने के लिए याचिकाकर्ता की ओर से गाजियाबाद के आर्य समाज मंदिर की ओर से जारी प्रमाण पत्र और कुछ तस्वीरें भी प्रस्तुत की गईं। 

इस पर कोर्ट ने कहा कि कोर्ट में विभिन्न आर्य समाज समितियों की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्रों की बाढ़ आ गई है, जिन पर इस अदालत के साथ-साथ उच्च न्यायालयों के सामने विभिन्न कार्रवाई के दौरान गंभीरता से पूछताछ की गई है। उक्त संस्था ने दस्तावेजों की वास्तविकता पर विचार किए बिना विवाह आयोजित करने में अपने विश्वास का दुरुपयोग किया है। चूंकि, विवाह पंजीकृत नहीं किया गया है, इसलिए केवल आर्य समाज की ओर से जारी प्रमाण पत्र के आधार पर यह नहीं माना जा सकता है कि पार्टियों ने शादी कर ली है। इसके साथ ही कोर्ट ने इस याचिका को खारिज भी कर दिया। 
 
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आर्य समाज - फोटो : अमर उजाला
आर्य समाज क्या है? 
वर्ष 1857 में स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना की थी। यह संस्था हिंदू धर्म की कुरीतियों का विरोध करती है। जिसमें जातिगत भेदभाव व अन्य कुरीतियां शामिल हैं। इस समाज में सभी को बराबरी का अधिकार देने की बात कही गई है।
 
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आर्य समाज में होने वाली शादियां - फोटो : अमर उजाला
आर्य समाज में कैसे होती हैं शादियां?
आर्य समाज में हिंदू रीति-रिवाज से ही शादियां होती हैं। यहां भी अग्नि के सात फेरे दिलवाए जाते हैं। इसके बाद एक मैरिज सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। आर्य समाज से होने वाली शादियों को आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन 1937 और हिंदू मैरिज एक्ट 1955 के तहत मान्यता देने की बात होती है। इसमें दूल्हे की उम्र 21 साल से अधिक और दुल्हन की उम्र 18 साल से अधिक होनी चाहिए। इसमें दो अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी शादी कर सकते हैं। 

यहां भी शादी के लिए कुछ प्रक्रिया तय की गई है। इसके अनुसार, शादी करने वाले जोड़े को पहले रजिस्ट्रेशन कराना होगा। दोनों पक्षों को हलफनामा देना होता है। इसके बाद दोनों के दस्तावेजों को देखने के बाद उनकी शादी आर्य समाज मंदिर में कराई जाती है। अगर एक ही धर्म का जोड़ा है तो उसकी शादी हिंदू एक्ट के तहत मानी जाती है, जबकि जोड़ा अलग-अलग धर्म का होता है तो आर्य समाज मैरिज वैलिडेशन एक्ट के तहत उसे मान्यता देने की बात होती है। हालांकि, इस सर्टिफिकेट का मतलब ये नहीं होता है कि शादी को कानूनी अधिकार और मान्यता मिल गई है। कानूनी तौर पर शादी को तभी माना जाता है जब शादी को एसडीएम कोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराया जाए।  
 
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आर्य समाज की शादियां - फोटो : अमर उजाला
आर्य समाज में शादी के बाद क्या करें? 
अगर आपने आर्य समाज में शादी की है और उसी के सर्टिफिकेट के आधार पर अपनी शादी की कानूनी मान्यता होने की बात करते हैं तो ये गलत है। आप आगे चलकर मुश्किलों में पड़ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय कहते हैं कि आर्य समाज में शादी होने के बाद आपको हिंदू मैरिज एक्ट के तहत इसे रजिस्टर करवाना चाहिए। एसडीएम के यहां शादी रजिस्टर होने के बाद कानूनी तौर पर आपकी शादी को अधिकार मिल जाएगा। 
 
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