सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   home ministry ai social media data scraping intelligence security

सोशल मीडिया पर एआई का पहरा: साइबर ठगों की कुंडलियां खंगाल रहीं एजेंसियां, गृह मंत्रालय का बड़ा खुलासा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राकेश कुमार Updated Tue, 31 Mar 2026 08:04 PM IST
विज्ञापन
सार

गृह मंत्रालय ने बताया है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद और साइबर अपराध से निपटने के लिए सोशल मीडिया पर नजर रख रही हैं। इसके लिए एआई और डेटा स्क्रैपिंग का सहारा लिया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इसमें ओपन सोर्स डेटा का ही इस्तेमाल होता है, जिससे किसी भी नागरिक की निजता का हनन नहीं होता है।
 

home ministry ai social media data scraping intelligence security
सोशल मीडिया पर एआई की नजर - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार

डिजिटल दुनिया में पनप रहे खतरों से निपटने के लिए भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि देश की सुरक्षा एजेंसियां अब सोशल मीडिया और इंटरनेट पर मौजूद डेटा के विश्लेषण के लिए 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' एआई का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर रही हैं। गृह मंत्रालय के मुताबिक, एआई के उपयोग से भारी-भरकम डेटा का बहुत ही कम समय में विश्लेषण करना संभव हो पा रहा है।
Trending Videos


समिति ने सरकार से पूछे सवाल
दरअसल, लोकसभा सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली 'संचार और सूचना प्रौद्योगिकी (2024-25)' संबंधी स्थायी संसदीय समिति के सामने गृह मंत्रालय ने यह पूरा खाका पेश किया है। समिति ने सरकार से सवाल पूछा था कि इंटरनेट और सोशल मीडिया से लगातार डेटा इकट्ठा करने के दौरान आम जनता की निजता के मुद्दे से वह कैसे निपटती है?
विज्ञापन
विज्ञापन


गृह मंत्रालय ने पूरी तरह साफ कर दिया है कि इससे किसी भी नागरिक की निजता का किसी भी तरह से कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है। मंत्रालय ने संसदीय समिति को बताया कि सुरक्षा एजेंसियां जानकारी जुटाने के लिए केवल 'ओपन इंटेलिजेंस' का ही इस्तेमाल करती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी आम नागरिक के निजी डेटा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। 

एआई से कसी जा रही नकेल
समिति को सौंपी गई रिपोर्ट में बताया गया है कि खुफिया जानकारी जुटाने और काउंटर-इंटेलिजेंस के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है। इसमें संदिग्धों के चेहरों की पहचान करने वाली 'फेशियल रिकग्निशन' तकनीक, सोशल मीडिया और नेटवर्क एनालिसिस शामिल हैं। इसके अलावा, 'नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग' का उपयोग भी हो रहा है।

एजेंसियां 'एंटीटी रिजॉल्यूशन' नाम के एक विशेष एआई टूल का भी उपयोग कर रही हैं। इसकी मदद से अलग-अलग डेटा स्रोतों में मौजूद किसी एक ही व्यक्ति की सटीक पहचान करना और उसके विभिन्न संपर्कों या नेटवर्क का पता लगाना बेहद आसान हो गया है। सरकार का मानना है कि इससे आतंकवाद विरोधी अभियानों में एजेंसियों की क्षमता कई गुना बढ़ गई है। इतना ही नहीं, इससे सही समय पर सटीक निर्णय लिए जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें: 'ईरान में हो चुका सत्ता परिवर्तन': पीट हेगसेथ बोले- समझौता करो वरना बड़े हमले होंगे, नाटो पर फैसला जल्द

डेटा स्क्रैपिंग से पकड़े जा रहे हैं हनीट्रैप और स्कैम
संसदीय समिति को दी गई जानकारी में 'डेटा स्क्रैपिंग' तकनीक का भी जिक्र किया गया है। एजेंसियां कंप्यूटर प्रोग्राम के जरिए एक्स पोस्ट, फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियो की पड़ताल करती हैं। इसके निशाने पर मुख्य रूप से डीपफेक, मॉर्फ्ड मीडिया, सांप्रदायिक घृणा फैलाने वाली फर्जी खबरें और वायरल कंटेंट होते हैं।

इसके अलावा, टेलीग्राम ग्रुप्स और यूट्यूब चैनलों पर बम बनाने के ट्यूटोरियल साझा करने वाले या कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क पर भी इसके जरिए पैनी नजर रखी जा रही है। यही नहीं, मैट्रिमोनियल और डेटिंग साइट्स पर लोगों को झांसा देकर ब्लैकमेल करने वाले 'हनीट्रैप' रैकेट का भंडाफोड़ करने में भी यह तकनीक गेम चेंजर साबित हो रही है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed