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Ramnath Kovind : कार्यकाल खत्म होते ही कोविंद क्यों चर्चा में? पूर्व राष्ट्रपति के तीन फैसले जो याद रखे जाएंगे

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Wed, 27 Jul 2022 12:56 PM IST
सार

देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति रहे रामनाथ कोविंद को लेकर सियासी पारा हाई है। विपक्ष के वार पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया।

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Why Opposition target Ex- President Ramnath Kovind Know about three decisions of the former President
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति पद का कार्यकाल खत्म होते ही रामनाथ कोविंद चर्चा में आ गए हैं। एक के बाद एक उन पर सियासी निशाना साधा जा रहा है। विपक्षी दल के नेता लगातार हमलावर हो रहे हैं। पहले महबूबा मुफ्ती, फिर अखिलेश यादव ने उनके खिलाफ जमकर बयानबाजी की। 

 
देश के दूसरे दलित राष्ट्रपति रहे रामनाथ कोविंद को लेकर सियासी पारा हाई है। विपक्ष के वार पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार किया। कोविंद का बचाव करते हुए भाजपा नेताओं ने यहां तक कह दिया कि विपक्ष को एक दलित का राष्ट्रपति पद तक पहुंचना नागवार गुजरा। इसलिए उनके पद से हटते ही ये लोग उनपर निशाना साध रहे हैं। 


 
विपक्ष के निशाने पर क्यों हैं पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद?  अपने कार्यकाल के दौरान ऐसे कौन से फैसले लिए जिनसे विपक्ष के नेता भड़के हुए हैं? आइए जानते हैं...
 
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पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती। - फोटो : अमर उजाला
पहले जानिए विपक्ष के नेताओं ने पूर्व राष्ट्रपति के लिए क्या-क्या बोला? 

महबूबा मुफ्ती ने क्या कहा? 
पीडीपी की प्रमुख और जन्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पर सवाल उठाए। उन्होंने ट्वीट किया। लिखा, 'निवर्तमान राष्ट्रपति (कोविंद) ऐसी विरासत छोड़ गए हैं जहां संविधान को अनेक बार कुचला गया। चाहे वह अनुच्छेद 370, नागरिकता कानून, अल्पसंख्यकों या दलितों को निशाना बनाना हो। उन्होंने संविधान के नाम पर भाजपा के राजनीतिक एजेंडे को पूरा किया।'
 
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कहा, 'राष्ट्रपति जो अब रिटायर हो रहे हैं, वो बिल्कुल पड़ोस के हैं। उनके रहते-रहते उनके समाज और उनके तबके के लोगों में बहुत कुछ बदलाव नहीं दिखाई देता है। लोगों को इस बात का गर्व हो सकता है कि उनके समाज का उन्हें राष्ट्रपति मिला। ये गर्व है। ये खुशी है। लेकिन सवाल ये है क्या राष्ट्रपति बनने से उनके समाज का कुछ उत्थान हुआ है? राष्ट्रपति रिटायर हो रहे हैं। अच्छा है।'

आगे पढ़िए कोविंद के वो तीन फैसले जिनके चलते विपक्ष के निशाने पर आ गए
 
Why Opposition target Ex- President Ramnath Kovind Know about three decisions of the former President
अनुच्छेद 370 - फोटो : अमर उजाला
1. आर्टिकल 370 हटाना : रामनाथ कोविंद के कार्यकाल में केंद्र सरकार ने कई बड़े फैसले लिए। पांच अगस्त 2019 को केंद्र सरकार के प्रस्ताव पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35A समाप्त कर दिया। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर के दो हिस्से कर लद्दाख को अलग कर केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया। इससे जम्मू कश्मीर की क्षेत्रीय पार्टियां तो नाराज हुईं ही, कांग्रेस जैसे मुख्य विपक्षी दल ने भी मोर्चा खोल दिया। तब से लेकर अब तक जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है। अब परिसीमन के बाद विधानसभा चुनाव की संभावना भी तेज हो गई है। 

 
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सीएए के विरोध में पत्थरबाजी करते उपद्रवी। - फोटो : अमर उजाला
2. सीएए-एनआरसी : नौ दिसंबर 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने लोकसभा में पेश किया था और इसे लोकसभा में 311 बनाम 80 वोटों से पारित कर दिया गया। 11 दिसंबर को इसे राज्यसभा में पेश किया गया जहां नागरिकता विधेयक 2019(CAB) को 125 और खिलाफ में 99 वोट दिए गए हैं। इस प्रकार से नागरिकता विधेयक बिल (CAB Bill) पास हो गया। बिल पास होने के एक दिन बाद ही

12 दिसंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसे मंजूरी दे दी। तब जाकर नागरिकता विधेयक बिल (CAB Bill), नागरिकता विधेयक कानून (CAA) बन गया। नागरिकता संशोधन कानून 2019(CAA 2019) में अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आए हिंदू ,सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और क्रिश्चियन धर्मों के प्रवासियों के लिए नागरिकता के नियम को आसान बनाया गया।

पहले किसी भी व्यक्ति को भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए उसे कम से कम पिछले 11 वर्षों से भारत में रहना अनिवार्य था इस नियम को आसान बनाते हुए नागरिकता हासिल करने की अवधि को 1 साल से लेकर 6 साल कर दिया गया है। इसका विपक्षी दलों ने खूब विरोध किया। 

 
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