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Wrestlers Protest: कैसे BJP का सिरदर्द बढ़ा सकती है कुश्ती संघ की लड़ाई? समझें आंदोलन के बदले समीकरणों का असर
Sat, 21 Jan 2023 10:42 AM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Sat, 21 Jan 2023 10:42 AM IST
सार
इस मामले में अब तक क्या-क्या हुआ? कितने खिलाड़ी बृजभूषण के खिलाफ हैं और कितने उनके पक्ष में? भाजपा के लिए क्यों सिरदर्द बढ़ा सकती है ये लड़ाई? आइये जानते हैं...
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कुश्ती संघ की लड़ाई
- फोटो : अमर उजाला
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भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन शोषण के आरोपों के मामले ने सियासी गलियारे में भी खलबली मचा रखी है। भले ही केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद पहलवानों ने फिलहाल प्रदर्शन स्थगित कर दिया है, लेकिन आने वाले दिनों में ये विवाद और तूल पकड़ सकता है। इस पूरे विवाद में भारतीय जनता पार्टी का सिरदर्द बढ़ सकता है।
पहले जानिए अब तक क्या-क्या हुआ?
- बुधवार (18 जनवरी) को बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट और साक्षी मलिक सहित करीब 30 पहलवान धरने पर बैठ गए। उन्होंने भारतीय कुश्ती संघ को भंग करने की मांग की। पहलवानों ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह और कई कोच ने महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण किया है।
- खिलाड़ियों द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद बृजभूषण शरण सिंह मीडिया के सामने आए। उन्होंने सभी आरोपों को खारिज किया। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अगर आरोप सही साबित हुए तो मैं फांसी पर लटक जाऊंगा। साथ ही उन्होंने खिलाड़ियों पर ट्रायल में भाग नहीं लेने के आरोप लगाए। बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि हाल ही में बजरंग और साक्षी मुझसे मिलकर गए, तब कोई समस्या नहीं थी।
- प्रदर्शनकारी खिलाड़ियों को कांग्रेस के साथ-साथ वाम दलों, आम आदमी पार्टी, समाजवादी पार्टी का भी समर्थन मिला है। दिल्ली की पालम 360 खाप पंचायत के प्रधान सुरेंद्र सिंह सोलंकी ने भी पहलवानों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा, इस मामले में कुश्ती फेडरेशन के अध्यक्ष को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे देना चाहिए। सरकार को उन्हें बर्खास्त कर देना चाहिए। ऐसा निष्पक्ष जांच के लिए जरुरी है। जंतर-मंतर पर जो खिलाड़ी बैठे हैं। वे यूं ही किसी पर आरोप नहीं लगा सकते। उनकी भी अपनी साख है।
- 20 जनवरी को खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने प्रदर्शनकारी पहलवानों के साथ लंबी बातचीत की। इसके बाद उन्होंने एलान किया कि इस मामले की जांच होगी और तब तक कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह अपने पद से हट जाएंगे। इसके बाद प्रदर्शनकारी पहलवानों ने भी अपने प्रदर्शन को रोकने का एलान कर दिया। बैठक के बाद पहलवान बजरंग पुनिया ने कहा, केंद्रीय खेल मंत्री ने हमारी मांगों को सुना और उचित जांच का आश्वासन दिया है। मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं और हमें उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच होगी, इसलिए हम विरोध वापस ले रहे हैं।
क्यों भाजपा का सिरदर्द बढ़ा सकती है ये लड़ाई?
अगले साल देशभर में लोकसभा चुनाव होना है। इसके ठीक बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी है। बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ज्यादातर खिलाड़ी हरियाणा से ही हैं। अब हरियाणा की खाप पंचायतों ने भी इन पहलवानों का समर्थन कर दिया है। किसान संगठन भी इनके समर्थन में उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी ज्यादातर खिलाड़ी जाट समुदाय से आते हैं। यही कारण है कि अब भाजपा के खिलाफ ये राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
अगले साल देशभर में लोकसभा चुनाव होना है। इसके ठीक बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव भी है। बृजभूषण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले ज्यादातर खिलाड़ी हरियाणा से ही हैं। अब हरियाणा की खाप पंचायतों ने भी इन पहलवानों का समर्थन कर दिया है। किसान संगठन भी इनके समर्थन में उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी ज्यादातर खिलाड़ी जाट समुदाय से आते हैं। यही कारण है कि अब भाजपा के खिलाफ ये राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है।
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राजनीतिक विश्लेषक प्रो. अजय कुमार सिंह कहते हैं, 'किसान आंदोलन के समय भी बड़ी संख्या में जाट समुदाय के लोगों ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया था। अब एक बार फिर से यही माहौल बनता दिख रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खाप पंचायतें भी पहलवानों के समर्थन में उतर आईं हैं। ऐसे में अगर समय रहते इसे निस्तारित नहीं किया गया तो आने वाले चुनावों में भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। अगर हरियाणा की खाप पंचायतों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया तो सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही उठाना पड़ेगा। तब ये जातिगत विवाद भी हो जाएगा।'
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वहीं, बृजभूषण सिंह भी पूर्वांचल के बाहुबली नेता हैं। बृजभूषण ठाकुर बिरादरी से आते हैं और इस वर्ग के वोटर्स के बीच इनकी अच्छी पैठ मानी जाती है। बृजभूषण खुद छह बार के सांसद रह चुके हैं। उनकी पत्नी भी सांसद रह चुकी हैं। उनके बेटे प्रतीक भी दो बार से विधायक हैं। ऐसे में अगर बृजभूषण पर कार्रवाई होती है तो यूपी में ठाकुर वोटर्स नाराज हो सकते हैं। पूर्वांचल में समीकरण भी बिगड़ सकता है। वहीं, अगर कार्रवाई नहीं होती है तो हरियाणा और पश्चिमी यूपी के जाट नाराज हो सकते हैं।