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इस बीमारी से जिंदगी की जंग हारे जाकिर हुसैन: दो हफ्ते से अस्पताल में थे, बहन बोलीं- सुकून के साथ अंतिम सांस ली

Mon, 16 Dec 2024 11:36 AM IST
अभिषेक दीक्षित पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Mon, 16 Dec 2024 11:36 AM IST
सार

प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को हुआ था। उन्हें उनकी पीढ़ी के सबसे महान तबला वादकों में से एक माना जाता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और उनकी बेटियां अनीशा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी हैं।

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Zakir Hussain - फोटो : Amar Ujala
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प्रसिद्ध तबला वादक जाकिर हुसैन का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके परिवार ने सोमवार को यह जानकारी दी। जाकिर हुसैन फेफड़े संबंधी समस्या इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस से परेशान थे। वह 73 वर्ष के थे। वे पिछले दो सप्ताह से अस्पताल में भर्ती थे। उनकी हालत बिगड़ने के बाद उन्हें आईसीयू में रखा गया था। 

उनकी बहन खुर्शीद औलिया ने कहा कि उन्होंने सुकून के साथ अंतिम सांस ली। उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि वेंटिलेशन मशीन बंद किए जाने के बाद उन्होंने सुकून के साथ अंतिम सांस ली। सैन फ्रांसिस्को के समय के अनुसार, तब शाम के चार बजे थे।

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उस्ताद जाकिर हुसैन की फैमिली ट्री - फोटो : अमर उजाला

परिवार में कौन-कौन?
प्रसिद्ध तबला वादक उस्ताद अल्ला रक्खा के पुत्र जाकिर हुसैन का जन्म नौ मार्च 1951 को हुआ था। उन्हें उनकी पीढ़ी के सबसे महान तबला वादकों में से एक माना जाता है। उनके परिवार में उनकी पत्नी एंटोनिया मिनेकोला और उनकी बेटियां अनीशा कुरैशी और इजाबेला कुरैशी हैं। परिवार की ओर से जारी बयान में कहा गया है, 'वह दुनिया भर के अनगिनत संगीत प्रेमियों द्वारा संजोई गई एक असाधारण विरासत छोड़ गए हैं, जिसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक बना रहेगा।'

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उस्ताद जाकिस हुसैन - फोटो : Amar Ujala

कई अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया
छह दशकों के अपने करियर में जाकिर हुसैन ने कई प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय और भारतीय कलाकारों के साथ काम किया, लेकिन गिटारवादक जॉन मैकलॉघलिन, वायलिन वादक एल शंकर और तालवादक टीएच 'विक्कू' विनायक्रम के साथ 1973 में भारतीय शास्त्रीय संगीत और पश्चिमी जैज संगीत के तत्वों के उनके संलयन को काफी सराहा गया।

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उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला

सात वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू किया
जाकिर हुसैन ने महज सात वर्ष की आयु से ही तबले पर हाथ आजमाना शुरू कर दिया था और आगे चलकर उन्होंने पंडित रविशंकर, अली अकबर खान और शिवकुमार शर्मा जैसे दिग्गजों सहित भारत के लगभग सभी प्रतिष्ठित संगीत कलाकारों के साथ काम किया। यो-यो मा, चार्ल्स लॉयड, बेला फ्लेक, एडगर मेयर, मिकी हार्ट और जॉर्ज हैरिसन जैसे पश्चिमी संगीतकारों के साथ उनके अभूतपूर्व संगीत ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाया।

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उस्ताद जाकिर हुसैन - फोटो : अमर उजाला

पांच ग्रैमी पुरस्कार जीते
जाकिर हुसैन ने अपने करियर में पांच ग्रैमी पुरस्कार जीते, जिनमें से तीन इस साल की शुरुआत में 66वें ग्रैमी पुरस्कार में मिले थे। भारत के सबसे प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकारों में से एक हुसैन को 1988 में पद्म श्री, 2002 में पद्म भूषण और 2023 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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