राजस्थान के किले विश्व में प्रसिद्ध हैं। हर किले की कोई न कोई कहानी है। राजस्थान आने वाले सैलानी भी इन किलों की भव्यता को देख दांतों तले अंगुली दबा लेते हैं। जानते राजस्थान के प्रसिद्ध किलों के बारे में...
जैसलमेर का सोनार किला अपनी खूबसूरती के लिए अलग ही पहचान रखता है। इसकी शानदार बनावट के चलते यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर सूची में शामिल किया है। यह किला 460 मीटर लंबा और 230 मीटर चौड़ा है। पीले पत्थरों से निर्मित इस किले के चार प्रवेश द्वार हैं। रावल जैसल द्वारा सन् 1155 में निर्मित यह त्रिकुटाकृति का किला है। दुर्ग का दोहरा परकोटा है जिसे कमरकोट कहा जाता है। इस किले की खास बात यह है कि पीले पत्थरों को पत्थर पर पत्थर रखकर बिना चूने को काम में लिए किला बनाया गया है। यह किला चित्तौड़गढ़ किले के बाद राजस्थान में दूसरा लिविंग फोर्ट है। यहां दुर्ग के हस्तलिखित ग्रंथों का सबसे बड़ा संग्रह जिनभद्रसूरी ग्रंथ भंडार है।
मेवाड़ की शान के रूप में खड़ा चित्तौड़गढ़ का किला
मेवाड़ की शान के रूप में खड़ा चित्तौड़गढ़ का किला बापा रावल ने 734 ईस्वी में मौर्य शासक मानमोरी से जीता। था। भारत के सबसे बड़े किलों में से एक इस किले पर मुस्लिम शासकों की ओर से तीन बार आक्रमण किया गया, लेकिन हमेशा उनके हिस्से में हार ही आई। किले में कुल सात गेट हैं जिन्हें स्थानीय भाषा में पोल कहा जाता है। इनके नाम पादन पोल, भैरोन पोल, हनुमान पोल, गणेश पोल, जोडला पोल, लक्ष्मण पोल और मुख्य द्वार राम पोल के नाम से प्रसिद्ध है। किले को राजस्थान का गौरव और गढ़ों का सिरमोर भी कहा जाता है। गंभीरी और बेडच नदी के संगम स्थल के समीप मौर्य राजा चित्रांग द्वारा निर्मित इसका पूर्व नाम चित्रकोट था। रानी पदमिनी, राजमाता कर्मवती सहित अनेक वीरांगनाओं के जौहर और गोरा—बादल, जयमल—पत्ता के बलिदान इसी दुर्ग से जुड़े हैं।
भारत के सबसे बड़े किलों में से एक
जोधपुर में स्थित मेहरानगढ़ किला भी भारत के सबसे बड़े किलों में से एक है। किले में प्रवेश के लिए सात गेट हैं। किले के भीतर कई शानदार ढंग से तैयार किए गए महल हैं। संग्रहालय में पालकी, हददास, शाही क्रैडल, लघुचित्र, संगीत वाद्ययंत्र, वेशभूषा और फर्नीचर का संग्रह है। किले में पुरानी तोप को संरक्षित रखा गया है। चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर मयूराकृति का यह किला मोरध्वजगढ़ और मयूरध्वजगढ़ के नाम से भी विख्यात है। 1459 में निर्मित इस किले में शेरशाह की मस्जिद, राजा मानसिंह पुस्कालय, सिणगार चौकी, सोने के बारीक काम वाला मोतीमहल और भित्ती चित्रों से सजा फूलमहल आकर्षण का केन्द्र है।
प्रदेश की राजधानी का गौरव
जयपुर में अरावली पर्वत पर स्थित आमेर फोर्ट प्रदेश की राजधानी का गौरव है। संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर में निर्मित यह भव्य महलों, हॉल और मंदिरों की मेजबानी करता है और निर्बाध रूप से शांत पहाड़ी की हवा में सांस लेता है। किले में बना शिलामाता का मंदिर विश्वविख्यात है। यहां होने वाली हाथी की सवारी भी पर्यटकों का आकर्षण है। राजा मानसिंह प्रथम ने इसे सन् 1592 में निर्मित कराया था। यहां आपको हिंदु—मुस्लिम शैली का समन्वित रूप देखने को मिलेगा। शीश महल, सुख मंदिर, जगत शिरोमणि मंदिर, मावठा जलाशय, दिलाराम का बाग और केसर क्यारी यहां के दर्शनीय स्थल हैं। औरंगजेब ने आमेर का नाम मोमिनाबाद रखा था।
किले की दीवार दूसरी सबसे बड़ी दीवार
राजस्थान में किलों की सूची उदयपुर के पास राजसमंद जिले के कुम्भलगढ़ किले का उल्लेख किए बिना अधूरी है। किले की दीवार दूसरी सबसे बड़ी दीवार (चीन की महान दीवार के बाद) है। यह राजस्थान के पहाड़ी दुर्गों में शामिल एक विश्व धरोहर स्थल है। लखोला टैंक किले के अंदर सबसे उल्लेखनीय टैंक है, जिसे राणा लक्ष्मा ने बनवाया था। कुंभलगढ़ किला महाराणा प्रताप का जन्मस्थान है। सन् 1448 से 1458 तक शिल्पी मंडन की देखरेख में महाराणा कुंभा ने इसे बनवाया था। कुंभास्वामी विष्णु मंदिर, मामादेव का कुंड, कटारगढ़ और हाथियागुढ़ा की नाल यहां दर्शनीय स्थल हैं। अबुल फजल ने इस किले के लिए लिखा है कि यह इतनी बुलन्दी पर बना हुआ है कि नीचे से ऊपर की ओर देखने पर सिर से पगड़ी गिर जाती है।