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सियासत पर 'अटल शब्द' जब वाजपेयी ने कहा- अपनों से है सत्ता का संघर्ष, पद-प्रतिष्ठा पर यह तंज भी पढ़ें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 16 Aug 2019 12:10 PM IST
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Atal Bihari Vajpayee death anniversary, know about  his words on politics
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

अपने मर्मस्पर्शी शब्दों से अटल जी ने राजनीति ही नहीं बल्कि आम लोगों के बीच भी अमिट छाप छोड़ी। सत्ता के गलियारों से लेकर गांव, गली, मुहल्ले तक हर शख्स अटल जी की वाकपटुता का कायल रहा है। पिछले साल 16 अगस्त को दिल्ली के एम्स में अटल बिहारी वाजपेयी ने 93 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। पक्ष हो या विपक्ष सभी उनके स्वभाव के मुरीद रहे हैं। राजनीति पर उन्होंने कुछ ऐसे शब्द कहे हैं जोकि वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए आइना साबित होंगे...

आगे की स्लाइड में जानिए अटल जी द्वारा राजनीति पर कहे गए शब्द... 
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Atal Bihari Vajpayee death anniversary, know about  his words on politics
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : amar ujala

अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि आज की राजनीति विवेक नहीं, वाक्- चातुर्य चाहती है, संयम नहीं, श्रेय नहीं, प्रेय के पीछे पागल है। मतभेद का समादर करना तो अलग रहा, उसको सहन करने की वृत्ति भी विलुप्त हो रही है।

आगे की स्लाइड में- आदर्शवाद का स्थान अवसरवाद ले रहा है

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

 उन्होंने कहा कि आदर्शवाद का स्थान अवसरवाद ले रहा है। बायें (लेफ्ट) और दायें (राइट) का भेद भी व्यक्तिगत अधिक है, विचारगत कम।

आगे की स्लाइड में- सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं, उत्तराधिकारी की शतरंज पर मोहरे बैठाने की चिंता में लीन हैं।

आगे की स्लाइड में-  निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं है..

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी

उनका कहना था कि सत्ता का संघर्ष प्रतिपक्षियों से ही नहीं, स्वयं अपने ही दल वालों से हो रहा है। पद और प्रतिष्ठा को कायम करने के लिए जोड़-तोड़, सांठ-गांठ और ठकुरसुहाती आवश्यक है। निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं है। आत्मा को कुचलकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।

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