गलवां घाटी में चीनी सेना के पीछे हटने पर बनी सहमति के बीच पूर्वी लद्दाख में संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में स्पेशल फोर्स के जवानों को तैनात किया गया है। माउंटेन वार फेयर में एक्सपर्ट जवानों की खासकर तैनाती की गई है। इसके साथ ही नौसेना को भी अपनी वॉरशिप्स तैनात करने के आदेश दिए गए हैं। गलवां घाटी में सैनिकों की झड़प के बाद भले चीन के तेवर ठंडे पड़ गए हैं लेकिन भारत की ओर से एलएसी पर सुरक्षा व्यवस्था और चौकस कर दी गई है।
लद्दाखः भारत ने तैनात किए स्पेशल फोर्स के जवान, दर्जनों टैंक और बुलेटप्रूफ वाहन पहुंचे लेह
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पूर्वी लद्दाख में वायुसेना ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। सुबह से ही लड़ाकू विमान श्रीनगर और लेह में स्थित एयरबेस से उड़ान भरते दिखे। सूत्रों के मुताबिक रोज की तुलना में मंगलवार को लड़ाकू विमानों ने ज्यादा उड़ानें भरीं। एलएसी के करीब हवाई चौकसी बढ़ाई गई है।
वायुसेना ने दर्जनों टैंक और बुलेटप्रूफ वाहन एयरलिफ्ट कर लेह पहुंचाए हैं जो अब आने वाले दिनों में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के करीब भारत की निगहबानी करेंगे। इसके अलावा वायुसेना ने भी कई फारवर्ड एयरबेस पर अपने फाइटर जेट तैयार रखे हैं।
नौसेना को भी चीनी कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए मलक्का स्ट्रेट में अपनी वॉरशिप्स तैनात करने के आदेश दे दिए गए हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें इंडो पैसिफिक-रीजन में कहीं पर भी तैनात किया जा सकता है। इसके अलावा सैनिकों के साथ ऑर्टिलरी में बढ़ोतरी की गई है। एलएसी पर चीन की हर हरकत पर नजर रखने के लिए इस्राइली हेरॉन ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
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जानकारों के अनुसार इस्राइली ड्रोन की लगातार 30 घंटे तक उड़ने की क्षमता है। इसमें लगे कैमरे खुफिया जानकारी जुटानेे में माहिर हैं। यह ड्रोन करीब 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। करीब 1 टन का वजन भी उठा सकता है। यह ड्रोन दुश्मन के ठिकाने पहचानने के साथ उन पर निशाना लगाकर उन्हें नष्ट भी कर सकता है।
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