केंद्र शासित प्रदेश बनते ही लद्दाख प्रशासन और दोनों स्वायत्त परिषदों ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर पूर्ववर्ती राज्य प्रतीक (स्टेट एंबलम) को बदलकर अशोक स्तंभ अपडेट कर दिया है। लेह और कारगिल की लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल ने अपनी स्टेशनरी भी बदल दी है।
जम्मू-कश्मीर ने अभी तक नहीं बदला ''झील और खिलता कमल'', लद्दाख ने अपनाया अशोक स्तंभ
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जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम- 2019 को 31 अक्तूबर से लागू होने पर दोनों केंद्र शासित प्रदेशों के उप राज्यपालों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। शपथ ग्रहण समारोह में इस बार केवल अशोक स्तंभ को ही जगह दी गई। ऐसे में पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर के सभी आधिकारिक प्रतीक भी अप्रासंगिक हो गए हैं। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के गृह, सामान्य प्रशासन, राजस्व, उच्च शिक्षा जैसे विभागों की वेबसाइट पर अभी भी अशोक स्तंभ नजर नहीं आ रहा है। वहीं, राजभवन की वेबसाइट अपडेशन के चलते खुल नहीं पा रही है।
केंद्र शासित प्रदेश बनने के साथ ही स्टेट एंबलम हटाने की अधिसूचना जारी होते ही त्वरित रूप से अमल किया गया है। लद्दाख में वेबसाइट अपडेट करने के अलावा सरकारी स्टेशनरी पर भी अब सिर्फ अशोक स्तंभ ही दर्शाया गया है।- फिरोज खान, चेयरमैन, लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (कारगिल)
जम्मू-कश्मीर राज्य के लिए आधिकारिक प्रतीक का निर्धारण 17 नवंबर 1952 में किया गया था। इसमें प्रतीक के निचले हिस्से पर एक त्रिकोण दर्शाया गया, जिसके ऊपर झील और उसमें से खिलता कमल दर्शाया गया। इसके दोनों तरफ खाद्यान की बालियां दर्शाई गईं। प्रतीक में जम्मू, कश्मीर और लद्दाख क्षेत्र को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाते हुए ऐतिहासिक विरासत को इंगित किया गया। इस प्रतीक को सरकारी स्टेशनरी पर भी दर्शाया जाता है। इससे पूर्व डोगरा शासकों की रियासत का अलग प्रतीक था।