आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदन के कमांडर रियाज नायकू के मारे जाने के बाद कश्मीर की तस्वीर बदलेगी। खासकर आतंकियों का गढ़ माने जाने वाले पुलवामा जिले की। पुलवामा जिले में कई ऑपरेशन की कमान संभालने वाले एक सीनियर आईपीएस अफसर ने बताया कि रियाज के मारे जाने से स्थानीय युवाओं के आतंकी बनने का ग्राफ कम होगा।
Exclusive: नायकू के खात्मे से बदलेगी पुलवामा की तस्वीर, यहीं हुए बड़े हमले, यहीं से निकले देश के ये दुश्मन
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रियाज स्थानीय युवाओं को कट्टरता के नाम पर गुमराह करता था। मारे जाने से पहले वह 100 से अधिक युवाओं को आतंकी बना चुका था। पुलवामा जिले के दो हिस्से हैं। अवंतीपोरा और पुलवामा। दोनों इलाकों में अभी भी 45 आतंकी सक्रिय हैं। इनमें पुलवामा में 25 और अवंतीपोरा में 20 हैं। रियाज नायकू के मारे जाने के बाद इनका हौसला भी टूटेगा।
14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमला हो या फिर लेथपोरा सीआरपीएफ कैंप पर हमला, ऐसे कई बड़े हमले हैं जो पुलवामा जिले में ही हुए। इन हमलों की साजिश यहीं रची गई। संसद पर हुए हमले में शामिल तीन फुट का आतंकी नूर तांत्रे पुलवामा का ही था। 2016 में मारा गया आतंकी बुरहान वानी, आतंकी समीर टाइगर, पुलवामा हमले को अंजाम देने वाला आदिल डार पुलवामा का रहने वाला था।
अगला नंबर मीर सैफुल्लाह का
कश्मीर में अब रियाज के बाद आतंक का कोई अकेला बड़ा चेहरा बचा है तो वह है मीर सैफुल्लाह। पुलवामा के मलंगपोरा का मीर इस समय हिजबुल का ऑपरेशनल कमांडर और ए प्लस प्लस श्रेणी का आतंकी है। 2014 से कश्मीर में सक्रिय है।
सूत्रों के अनुसार हिजबुल मुजाहिदीन का अगला चीफ मीर सैफुल्लाह ही होगा। बहरहाल, मीर भी वर्ष 2018 से सुरक्षाबलों के रडार पर है। मीर के साथ 20 बड़े कमांडरों के नाम थे। इनमें से अब सिर्फ यहीं एक बचा हुआ है। जो मोस्ट वांटेड लिस्ट में अब सबसे ऊपर है। इसके मारे जाने के बाद हिबजुल को पूरे कश्मीर में कोई कमान देने वाला ही नहीं बचेगा।