कश्मीर को जन्नत कहा जाता है। इसी कश्मीर के नाम पर राजनीति करने वाले हुर्रियत और अलगाववादी नेताओं को भले ही आम कश्मीरी के भविष्य से कुछ लेना देना न हो, लेकिन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर वह काफी सजग हैं। कश्मीरी युवाओं के हाथों में किताबों की जगह बंदूक और पत्थरबाजी को बढ़ावा और स्कूल-कॉलेजों में आग लगाने के लिए उकसाकर वहां के भविष्य को स्कूलों और कॉलेजों से दूर करने वाले 112 अलगाववादी नेताओें के 210 बच्चे विदेशों में अपना भविष्य संवार रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, 14 हुर्रियत नेताओं के 21 पुत्र, पुत्रियां, बहनें और बहुएं अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, इरान, तुर्की, मलेशिया और पाकिस्तान में पढ़ रहे हैं या वहां बसकर ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं।
कहानी कश्मीर कीः जानिए, आखिर क्यों अलगाववादियों को अपनी संतानों के लिए नहीं सुहाती जन्नत की हवा?
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दुख्तरान ए मिल्लत की आसिया अंद्राबी के दो बेटों में से एक मलेशिया में तो दूसरा ऑस्ट्रेलिया में है। आसिया की तरह ही गिलानी का दामाद व तहरीक ए हुर्रियत अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश की एक बेटी तुर्की में पत्रकार है तो दूसरी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।
इसी तरह से बिलाल लोन की बेटी और दामाद लंदन में रहते हैं जबकि छोटी बेटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही है। मुस्लिम लीग के मोहम्मद यूसुफ मीर और फारूक गतपुरी की बेटियां पाकिस्तान से मेडिकल की पढ़ाई कर रही है। वहीं डीपीएम नेता ख्वाजा फिरदौस वानी का बेटा भी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।
वाहिदत ए इस्लानी के निसार हुसैन राथर की एक बेटी और बेटा ईरान मेें रहते हैं। इसी तरह तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन अशरफ सेहराई के दो बेटे सउदी अरब में रहकर अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं।