सोपोर में बुधवार को हुए आतंकी हमले में जवानों ने जान पर खेलकर एक बच्चे की जान बचाई। ये कोई पहला मौका नहीं है जब जवान लोगों की जान बचाने के लिए ढाल बने हों। इससे पहले भी भारतीय सेना ने ऐसी कई मिसालें पेश की हैं। इस बात की गवाह पूरी घाटी गवाह है।
कश्मीर: ऐसा पहली बार नहीं जब लोगों की जान बचाने के लिए जवानों ने लगाई जान की बाजी, गवाह हैं तस्वीरें
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5 जून 2019 दिन बुधवार, उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के सोपोर में हिंसक झड़पों के बीच एक बुजुर्ग महिला फंस गई। महिला को बचाने के लिए पुलिसकर्मी ढाल बना। इस घटना के बाद लोगों ने जवान को कश्मीर का असली हीरो बताया था।
उस दिन सोपोर में ईद की नमाज के बाद हिंसा भड़क उठी। उपद्रवियों ने सुरक्षाबलों पर पथराव करना शुरू कर दिया। इलाके में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। सुरक्षाबलों को स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े। इस हिंसक झड़प के दौरान जामिया मस्जिद से ईद की नमाज अता करने के बाद लौट रही बुजुर्ग बीच में फंस गई।
लगातार हो रही पत्थरबाजी के बीच बुजुर्ग महिला को बचाना आसान काम नहीं था। लेकिन सोपोर में तैनात एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान पर खेलकर बुजुर्ग को बचाने के लिए ढाल बन गया। पुलिसकर्मी ने बुजुर्ग को पत्थरबाजी से बचाते हुए सड़क के किनारे सुरक्षित जगह पर पहुंचाया।
लोगों ने पुलिसकर्मी की बहादुरी और काम की सराहना करते हुए उसे असली हीरो बताया था। कल सोपोर में हुए आतंकी हमले में भी जवानों ने ऐसी ही मिसाल पेश की। जान पर खेलकर जवानों ने बच्चे की जान बचाई।
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