बहन छोटी हो या बड़ी, पास हो या दूर, दिल से सिर्फ अपने भाई की खुशहाली की कामना करती रहती है। उनके इस प्यार और श्रद्धा को और गहरा करता है भाई दूज का पर्व। इस साल बहनें भैया दूज का त्योहार 29 अक्टूबर को मनाने वाली हैं। ऐसे में हर बहन चाहती है कि उसके भईया की उम्र सौ बरस हो और वो हर दुख से दूर रहे। अगर आप भी ऐसी ही किसी कामना को दिल में छिपाए हुए हैं तो जान लें भाई को तिलक करने का क्या है सही तरीका जो आपकी इस कामना को पूरा कर सकता है।
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भैया दूज 2019: इस तरह करेंगी भाई को तिलक, लंबी उम्र के साथ यश भी मिलेगा
Tue, 29 Oct 2019 07:21 AM IST
ललित फुलारा
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
Published by: ललित फुलारा
Updated Tue, 29 Oct 2019 07:21 AM IST
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- फोटो : file photo
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भैया दूज का पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें रोली और अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं। जिसेक बदले में भाई अपनी बहन को कुछ उपहार देता है।
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इस तरह करें भाई का पूजन
भैया दूज के दिन सबसे पहले नहाकर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें।
भैया दूज के दिन सबसे पहले नहाकर तैयार हो जाएं। उसके बाद आटे का चौक तैयार कर लें। अगर आपने व्रत रखा है तो सूर्य को जल देकर अपना व्रत शुरू करें। शुभ मुहूर्त आने पर भाई को चौक पर बिठाएं और उसके हाथों की पूजा करें। सबसे पहले भाई की हथेली में चावल का घोल लगाएं फिर उसमें सिंदूर, पान, सुपारी और फूल इत्यादि रखें।
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अंत में हाथों पर पानी अर्पण कर मंत्रजाप करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा कराएं और खुद भी मीठा खाएं। शाम के समय यमराज के नाम का चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर जरूर जलाएं। मान्यता है कि इस दिन अगर बड़े से बड़ा पशु काट भी ले तो यमराज के दूत भाई के प्राण नहीं ले जाएंगे।
भाई दूज पर तिलक करते समय ये मंत्र पढ़ें- गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज कोसुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।
भाई दूज पर तिलक करते समय ये मंत्र पढ़ें- गंगा पूजा यमुना को, यमी पूजे यमराज कोसुभद्रा पूजे कृष्ण को गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें फूले फलें।