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इंसानों से भी पहले इस जीव को लगाई गई थी कोरोना की वैक्सीन, वजह जानते हैं आप?
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Fri, 08 Jan 2021 08:45 AM IST
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फेरेट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
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आज भले ही दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसके तहत अब तक लाखों लोगों को वैक्सीन दी जा चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा कौन सा जीव है, जिसे इंसानों से भी पहले कोरोना की वैक्सीन लगाई गई थी? दरअसल, ये जीव आमतौर पर अमेरिका के कोलोराडो में पाए जाते हैं, जिनका नाम फेरेट्स है। ये मुस्टेला निगराइप्स प्रजाति के जीव हैं। पिछले साल गर्मियों में ही फोर्ट कोलिंस के पास स्थित 'नेशनल ब्लैक फुटेड कंजरवेशन सेंटर' में काले पैर वाले 120 फेरेट्स को प्रयोगात्मक तौर पर कोरोना वैक्सीन की खुराक दी गई थी।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
दरअसल, फेरेट्स को कोरोना की वैक्सीन इसलिए लगाई गई थी, क्योंकि उनकी प्रजाति खतरे में है। कंजरवेशन सेंटर के मुताबिक, अब तक उनमें कोरोना के संक्रमण का कोई मामला तो सामने नहीं आया है, लेकिन ये इस तरह के वायरस से आसानी से संक्रमित हो सकते हैं, इसलिए उन्हें पहले ही वैक्सीन लगा दी गई। जीव विज्ञानियों का कहना है कि इंसानों के साथ-साथ ऐसे जीवों को भी कोरोना का टीका लगाया जाना चाहिए, जो विलुप्तप्राय या खतरे में हैं।
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फेरेट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 1980 तक ऐसा माना जा रहा था कि फेरेट्स विलुप्त हो गए हैं, लेकिन 1981 में अमेरिकी राज्य व्योमिंग में कुछ फेरेट्स दिखाई दिए, जिसके बाद इन्हें बचाने की मुहिम शुरू हुई। फिलहाल अमेरिका में 350 से अधिक फेरेट्स मौजूद हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : iStock
कंजरवेशन सेंटर के मुताबिक, फेरेट्स को एमआरएनए आधारित कोरोना वैक्सीन दी गई थी। हालांकि कुछ फेरेट्स को वैक्सीन नहीं भी लगाई गई है। इसके पीछे सोच है कि अगर वैक्सीन के कुछ साइड-इफेक्ट होते हैं और कुछ अनहोनी होती है तो कम से कम कुछ फेरेट्स तो सुरक्षित रहें, ताकि उनकी प्रजाति को आगे बढ़ाया जा सके।
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फेरेट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिन फेरेट्स को वैक्सीन लगाई गई थी, वो फिलहाल सुरक्षित हैं और उनके शरीर में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडीज भी बनी हैं। हालांकि फेरेट्स में ये वैक्सीन कितनी प्रभावी है, इसको लेकर अभी ट्रायल नहीं किया गया है।
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