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Myths & Facts: क्या जामुन के पेड़ से ज्यादा फल गिरने का मतलब सूखा पड़ने वाला है? जानिए वायरल दावे की सच्चाई

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Thu, 18 Jun 2026 05:26 PM IST
सार

क्या सचमुच जामुन का पेड़ आने वाले मौसम की भविष्यवाणी कर सकता है? क्या किसी साल पेड़ पर ज्यादा फल लगना या जमीन पर बड़ी मात्रा में जामुन गिरना इस बात का वैज्ञानिक प्रमाण है कि बारिश कम होगी या सूखा पड़ेगा?

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Does a heavy Jamun Black Plum Harvest indicates Drought year myths and facts
जामुन के फल और सूखा - फोटो : Amarujala.com/AI

गर्मियां अपने साथ मौसमी फलों के सौगात लेकर आती है। इस मौसम में बाजार में आम, लीची जैसे फल बहुतायत में मिलते हैं। गर्मियों में जामुन भी खूब खाया जाता है। गांवों में पेड़ के नीचे की जगह जामुन गिरने से बैंगनी रंग से रंग जाती है। ये फल हमारे लिए प्रकृति का उपहार है। जामनु में कई ऐसे पौष्टिक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में मददगार हो सकते हैं।



पर क्या ये फल असल में हमारे लिए उपहार है या फिर अभिशाप? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल है जिसमें कहा जा रहा है कि जिस साल जामुन की पैदावार ज्यादा होती है, पेड़ से ज्यादा जामुन गिर रहे होते हैं उस साल सूखा पड़ने का खतरा ज्यादा होता है। 

दावा किया जा रहा है कि कई इलाकों में ये चर्चा भी रहती है कि “इस बार जामुन बहुत गिर रहे हैं, लगता है सूखा पड़ेगा!”। क्या वास्तव में इस दावे में कोई सच्चाई है?

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जामुन से लदे पेड़ - फोटो : Freepik.com

क्या है दावा?

सोशल मीडिया पोस्ट में कहा जा रहा है, इस साल बाजार में जितने जामुन दिखाई दे रहे हैं, उतने पिछले तीन दशकों में कभी नहीं देखे गए। पेड़ों के नीच जामुन के ढेर लग रहे हैं। जिन पेड़ों पर पिछले साल इक्का-दुक्का फल आए थे, वे पेड़ भी इस बार जामुन से लदे पड़े हैं। 
 

  • हमारी दादी/नानी हमेशा कहती थीं कि, जिस गर्मियों में जामुन के ऐसे ढेर लगते हैं, उस साल भयानक सूखा पड़ता है।
  • पोस्ट में इस दावे को पुष्ट करते हुए ये भी कहा जा रहा है कि यह पारंपरिक ज्ञान, वनस्पति विज्ञान के दृष्टिकोण से सटीक है। विज्ञान में इस दिलचस्प और उतनी ही चौंकाने वाली प्रक्रिया को मास्टिंग या स्ट्रेस फ्रूटिंग कहा जाता है।
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सूखा पड़ने की समस्या - फोटो : freepik

क्या लॉजिक दिया जा रहा है?

सोशल मीडिया पोस्ट में कहा जा रहा है,  यह प्रकृति का जींस को आगे बढ़ाने का नियम है। जब पेड़ को जमीन के नीचे पानी की भारी कमी महसूस होने लगती हैं या मौसम में बड़े बदलाव के संकेत मिलते हैं, तब पेड़ डिफेंस मोड  में चला जाता है। पेड़ को यह आभास हो जाता हैं, कि शायद आने वाले समय में वह जीवित नहीं रह पाएगा। ऐसे में खुद को बचाने के बजाय, अपनी प्रजाति को पृथ्वी पर बनाए रखने के लिए पेड़ अपनी पूरी ऊर्जा फल तैयार करने में लगा देता हैं।
 

  • फलों के भंडार लगने के अलावा ऐसे साल में पेड़ नई पत्तियां निकालना या टहनियों को बढ़ाना पूरी तरह से बंद कर देता है। क्योंकि नई पत्तियों को जीवित रखने के लिए अधिक पानी और पोषण की आवश्यकता होती हैं।
  • पेड़ उस ऊर्जा को बचाकर अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ जामुन का उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित करता है।
  • कहा जा रहा है कि जामुन का पेड़ आत्महत्या नहीं करता, बल्कि खुद का बलिदान देकर अपनी अगली पीढ़ी (बीजों) को जन्म देने का प्रयास करता है।
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जामुन के फल ज्यादा होने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com

क्या वास्तव में इस दावे में कोई सच्चाई है?

इस वायरल पोस्ट की हकीकत जानने के लिए हमने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी में पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ कृपा राम से संपर्क किया। वह इन दावों को सिरे से खारिज करते हैं। प्रोफेसर डॉ कृपा कहते हैं, ये संयोग हो सकता है। हो सकता है कि कभी जिस साल पैदावार अच्छी रही हो उस समय सूखा पड़ा हो लेकिन इसे वैज्ञानिक दृष्टि से सही नहीं माना जा सकता है।

फलों की पैदावार को बढ़ाने के लिए पेड़-पौधे ज्यादा पानी खींचते हैं, ये स्वाभाविक है पर इसका उस साल होने वाली कम बारिश या सूखे से इसका कोई संबंध नहीं है।

ऐसे में हमारी पड़ताल में जामुन की पैदावार अधिक होने से सूखा पड़ने का दावा, गलत साबित होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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