यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या कम उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। क्या आपको भी बार-बार पेशाब जाने की इच्छा होती है, । हर बार ऐसा महसूस हो कि ब्लैडर पूरी तरह खाली नहीं हुआ,पेशाब में जलन और दर्द की दिक्कत भी महसूस होती है? अगर हां तो ये यूटीआई का संकेत हो सकता है।
Urinary Tract Infection: पुरुष या महिला, किसे यूरिन इंफेक्शन का खतरा सबसे ज्यादा? जान लीजिए इसका कारण
यूटीआई यानी यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन की समस्या कम उम्र के लोगों में भी देखी जा रही है। यूटीआई इंफेक्शन आखिर किसे ज्यादा होती है, पुरुष और महिला? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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यूटीआई में क्या दिक्कतें होती हैं?
पेशाब करते समय दर्द और जलन होने को सामान्यतौर पर यूटीआई के लक्षण के रूप में जाना जाता है। कई मामलों में इसके लक्षण स्पष्ट नजर भी नहीं आते हैं। अगर आपको इस तरह की दिक्कतें हो रही हों तो किसी विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें।
- पेशाब करने की तीव्र और बार-बार इच्छा होना।
- पेशाब करते समय जलन महसूस होना।
- पेशाब से अधिक झाग बनना।
- पेशाब के रंग में बदलाव, कई बार यह लाल,गुलाबी या कोला रंग का हो सकता है।
- पेशाब से तेज गंध आना।
यूटीआई का खतरा किसे ज्यादा होता है?
कुछ स्थितियां आपमें यूटीआई के खतरे को बढ़ा सकती हैं, इससे बचाव करते रहना बहुत आवश्यक है।
- पुरुषों की तुलना में महिलाओं का मूत्रमार्ग छोटा होता है। नतीजतन, बैक्टीरिया को मूत्राशय तक पहुंचने में आसानी होती है।
- यौन संबंधों के दौरान साफ-सफाई का ध्यान न रखने से भी संक्रमण का खतरा होता है।
- मेनोपॉज के बाद, एस्ट्रोजेन हार्मोन के स्तर में कमी के कारण भी मूत्र पथ संक्रमण का जोखिम बढ़ जाता है।
- कमजोर इम्युनिटी की समस्या, मधुमेह जैसे रोग की स्थिति भी यूटीआई का खतरा बढ़ा सकती है।
यूटीआई से बचाव कैसे करें?
पेशाब पथ के संक्रमण को जोखिम को कुछ सामान्य से उपायों को प्रयोग में लाकर दूर किया जा सकता है।
- खूब सारा पानी और तरल पदार्थ पिएं। इससे पेशाब अधिक निर्मित होता है जिसके माध्यम से बैक्टीरिया शरीर से बाहर आ जाता है।
- यौन अंगों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
- यौन संबंधों के बाद पेशाब करें, इससे बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद मिल सकती है।
- सार्वजनिक शौचालयों के प्रयोग से बचें। यहां से संक्रमण के प्रसार का जोखिम सबसे अधिक होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।