दुनिया की बड़ी आबादी विटामिन-डी की कमी और इसके कारण होने वाली समस्याओं का शिकार है। अनुमान है कि दुनियाभर में करीब 1 अरब लोगों में इसकी कमी है, जिससे उनमें हड्डी की बीमारियों, ऑटोइम्यून बीमारी और संक्रामक रोगों का खतरा बना हुआ है। सूर्य की रोशनी से आसानी से इसकी पूर्ति हो सकती है, फिर भी लोगों में इस जरूरी पोषक तत्व की कमी देखी जा रही है।
Sunlight: विटामिन-डी ही नहीं, डिमेंशिया से बचे रहने के लिए भी जरूरी है धूप; रिसर्च में खुलासा
जो लोग कम रोशनी वाली जगहों में या अक्सर घर के अंदर रहते हैं, उनमें डिमेंशिया होने का खतरा ज्यादा देखा गया है। सूरज की रोशनी वाली जगहों पर जाने से यह खतरा 15 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
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विटामिन-डी की कमी से डिमेंशिया का जोखिम
हम सभी जानते हैं कि विटामिन-डी की कमी दूर करने के लिए धूप में समय बिताना जरूरी होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यही धूप आपके दिमाग को भी लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है?
नई रिसर्च कुछ ऐसा ही संकेत दे रही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग धूप में समय बिताते हैं, उनमें आगे चलकर डिमेंशिया की बीमारी होने का खतरा कम हो सकता है।
- अध्ययन में सामने आया है कि दिनभर अंधेरे या कम रोशनी वाले कमरों में रहने वाले लोगों में डिमेंशिया का खतरा ज्यादा हो सकता है। वहीं, जिन्होंने अपनी दिनचर्या का कुछ हिस्सा धूप में बिताया उनमें यह खतरा 15 से 25 प्रतिशत तक कम देखा गया।
चीन के विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ये अध्ययन किया। इसके लिए करीब 87,600 लोगों पर आठ साल तक नजर रखी गई। सभी प्रतिभागियों की औसत उम्र 62 साल थी।
अध्ययन में क्या पता चला?
शोध के दौरान प्रतिभागियों ने कलाई में एक खास इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (एक्टिग्राफी डिवाइस) पहनाई गई। इसमें दो सेंसर लगे थे
- लाइट सेंसर, जो यह रिकॉर्ड करता था कि व्यक्ति दिनभर कितनी और कैसी रोशनी में रहा।
- एक्सेलेरोमीटर, जो शरीर की गतिविधियों और मूवमेंट को मापता है। यानी व्यक्ति कितना चला-फिरा, उसकी गति कितनी बदली और शरीर कितना सक्रिय रहा।
आठ साल के इस अध्यन के दौरान 741 लोगों को डिमेंशिया हो गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग ज्यादातर समय घर या दफ्तर जैसी कम रोशनी वाली जगहों पर रहते थे, उनमें शुरुआत से ही डिमेंशिया का खतरा ज्यादा था। लेकिन जब ऐसे लोग ज्यादा उजाले वाले माहौल में रहने लगे, तो उनका जोखिम 15 से 25 प्रतिशत तक घट गया।
डिमेंशिया का खतरा बढ़ाने वाली स्थितियां
जिन लोगों को दिन में औसतन 1,000 लक्स या उससे ज्यादा रोशनी मिली, उनमें डिमेंशिया का खतरा कम रोशनी पाने वालों की तुलना में 16 प्रतिशत कम था।
- लक्स रोशनी की तीव्रता मापने की इकाई है। लगभग 1,000 लक्स का मतलब है अच्छी इनडोर लाइट या बादलों वाले दिन की बाहरी रोशनी।
शोध में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। अगर किसी व्यक्ति को दिन में 0.7 घंटे (करीब 42 मिनट) से भी कम तेज रोशनी मिली, तो यह डिमेंशिया का कारण बनने वाली स्थितियों जैसे मोटापा, शराब का सेवन और सिर में गंभीर चोट की तरह खतरनाक हो सकता है।
क्या कहते हैं शोधकर्ता?
शोधकर्ताओं के अनुसार, रोशनी हमारे शरीर की सर्केडियन रिद्म को नियंत्रित करती है।
इसे आसान भाषा में समझें तो यह हमारे शरीर की 24 घंटे चलने वाली प्राकृतिक जैविक घड़ी है, जो यह तय करती है कि हमें कब जागना है, कब नींद आएगी, शरीर कब सबसे ज्यादा सक्रिय रहेगा और दिमाग कब बेहतर तरीके से काम करेगा। यही व्यवस्था हमारी याददाश्त, सीखने की क्षमता और सोचने-समझने की प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि पहले किए गए कई ब्रेन स्कैन अध्ययनों में देखा गया है कि डिमेंशिया होने पर दिमाग के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से धीरे-धीरे सिकुड़ने लगते हैं। इस अध्ययन से संकेत मिलता हैं कि अगर दिन के समय पर्याप्त रोशनी मिले, तो दिमाग के इन हिस्सों के सिकुड़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।
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स्रोत:
Associations between wearable-device-measured daytime and nighttime light exposures and dementia risk: A prospective cohort study
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