मंगलवार (23 जून 2026) को आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह में देश में अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए 5 पद्म विभूषण और 13 पद्म भूषण सम्मान प्रदान किए गए। कार्यक्रम का मंच सजा हुआ था। पद्म भूषण सम्मान के लिए जानी-मानी गायिका अलका याग्निक का नाम पुकारा गया। पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, लेकिन इस सम्मान समारोह में लोगों की नजर सिर्फ पुरस्कार पर नहीं, बल्कि उस व्हीलचेयर पर भी टिक गई जिस पर बैठकर अलका याग्निक कार्यक्रम के बाद बाहर जाती दिखीं। लाखों लोगों के मन में एक सवाल उठा क्या उनकी पुरानी सुनने की बीमारी अब उनके चलने-फिरने और शरीर के संतुलन को भी प्रभावित कर रही है?
Alka Yagnik: कानों की समस्या चलना-फिरना तक कर सकती है मुश्किल; अलका याग्निक की हालत देख उठे कई सवाल
क्या आप भी मानते आ रहे हैं कि कानों का काम सिर्फ सुनना है? तो जान लीजिए ये छोटा से अंग आपके पूरे शरीर का बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है। अगर कान में कोई दिक्कत आ जाए तो आपके लिए चलना-उठना तक मुश्किल हो सकता है।
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अवार्ड के दौरान अलका याग्निक की वायरल तस्वीरों ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए। क्या वह स्वस्थ नहीं हैं, क्या उनको भी चलने-फिरने में दिक्कत होने लगी है?
थकान की वजह से लिया व्हीलचेयर
आखिरकार मशहूर सिंगर ने अपने व्हीलचेयर वीडियो की सच्चाई बताई। गुरुवार को सोशल मीडिया उन्होंने एक बयान चाहने वालों का धन्यवाद किया और कहा कि वीडियो को लेकर जो चिंता जताई जा रही है, वह समझ में आती है लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, ‘आप सभी के प्यार, चिंता और दुआओं के लिए धन्यवाद। सभी को बताना चाहती हूं कि मैं ठीक हूं और धीरे-धीरे बेहतर हो रही हूं। पद्म सम्मान समारोह के लंबे और यादगार दिन के बाद मैं काफी थक गई थी, इसलिए बाहर निकलते समय मैंने व्हीलचेयर की मदद ली।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कान में होने वाली दिक्कतें आपके पूरे शरीर के कामकाज को प्रभावित कर सकती है। अलका याग्निक के वायरल वीडियो में तो इस समस्या की पुष्टि नहीं होती, क्योंकि उन्होंने खुद कारणों को स्पष्ट किया है। हालांकि ये उन लोगों के लिए जरूर चेतावनी है जो कानों की सेहत को हल्के में लेते हैं।
कान की समस्या के शिकार कई लोगों को चक्कर आने, चलते समय लड़खड़ाने, बार-बार गिरने, असंतुलन महसूस होने और यहां तक कि व्हीलचेयर या सहारे की जरूरत भी पड़ सकती है।
अलका याग्निक को कौन सी बीमारी है?
मशहूर गायिका सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस नाम की समस्या की शिकार हैं।
- सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस के कारण सुनने की क्षमता कम हो जाती है। जब भीतरी कान में मौजूद सूक्ष्म हेयर सेल्स या कान से मस्तिष्क तक ध्वनि पहुंचाने वाली तंत्रिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती है, तब ये समस्या होती है।
- सामान्य स्थिति में ध्वनि तरंगें कान के पर्दे और मध्य कान से गुजरकर कोक्लिया तक पहुंचती हैं। यहां हेयर सेल्स इन तरंगों को विद्युत संकेतों में बदलकर मस्तिष्क तक भेजती हैं, जहां हमें आवाज सुनाई देती है।
- यदि ये हेयर सेल्स नष्ट हो जाएं तो वे दोबारा नहीं बनते, इसलिए अधिकांश मामलों में सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस स्थायी माना जाता है।
कान की दिक्कत बिगाड़ सकती है शरीर का बैलेंस
हम सभी सोचते हैं कि कान केवल सुनने के लिए होते हैं, जबकि वास्तव में भीतरी कान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वेस्टिब्युलर सिस्टम शरीर का संतुलन बनाए रखने का काम करता है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑडियोलॉजी के अनुसार उम्र बढ़ने, अत्यधिक तेज आवाज के संपर्क में रहने, वायरल संक्रमण, सिर की चोट और आनुवंशिक कारण ये समस्या हो सकती है। वैसे तो हर सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस वाले व्यक्ति में संतुलन बिगड़ने की दिक्कत नहीं होती, लेकिन यदि भीतरी कान का संतुलन तंत्र भी प्रभावित हो जाए तो शरीर की सामान्य गतिविधियां कठिन हो सकती हैं।
- जब हम चलते-दौड़ते या सीढ़ियां चढ़ते हैं तो कान के भीतर मौजूद आंतरिक प्रणाली तुरंत मस्तिष्क को संकेत भेजती है।
- मस्तिष्क इन संकेतों को तुरंत आंखों और पैरों से मिलने वाली जानकारी से मैच करता है और शरीर को संतुलित रखता है।
- यदि भीतरी कान का यह हिस्सा बीमारी, संक्रमण, सूजन या नसों की क्षति के कारण प्रभावित हो जाए तो मस्तिष्क को गलत या अधूरी जानकारी मिलने लगती है।
- इसके कारण चक्कर आने, अस्थिरता, लड़खड़ाहट और गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
- कुछ मामलों में व्यक्ति को ऐसा महसूस होता है कि कमरा घूम रहा है या जमीन हिल रही है।
इन बातों को भी जानना जरूरी
- हमारी जगह और दिशा का अंदाजा लगाने में भी कानों के स्वस्थ रहने और सुनने की क्षमता अहम भूमिका निभाती है। दिमाग आवाज का इस्तेमाल करके हमारे आस-पास के माहौल का मानसिक नक्शा बनाता है और हमें हमारी जगह का एहसास कराता है। जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो आप उन आवाजों या संकेतों को नहीं सुन पाते जो जगह का अंदाजा लगाने के लिए जरूरी होते हैं। इससे दिमाग़ के लिए आपको पैरों पर स्थिर रखना मुश्किल हो जाता है और शरीर का संतुलन बनाए रखना भी काफी कठिन हो जाता है।
- जब सुनने की क्षमता कम हो जाती है, तो बातचीत समझने और आवाज को प्रोसेस करने के लिए हमारे दिमाग को काफी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके लिए बहुत ज्यादा मानसिक ऊर्जा की जरूरत होती है, जिसे अक्सर कॉग्निटिव लोड कहा जाता है। इस अतिरिक्त मेहनत के कारण शरीर का तालमेल और संतुलन बनाए रखने जैसी चीजों के लिए दिमाग के पास कम संसाधन बचते हैं, जिससे गिरने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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स्रोत:
Hearing and Balance Symptoms and Conditions
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