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सावधान: युवावस्था में नहीं दिया ध्यान तो 50 की उम्र के बाद हो जाएंगे इस गंभीर बीमारी का शिकार, कैसे करें बचाव?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Tue, 28 Jan 2025 07:10 PM IST
सार

50 की उम्र के बाद वाले लोगों में डिमेंशिया के बढ़ते जोखिमों के डेटा ने विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है। अमेरिका स्थित वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया है कि 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 42% से अधिक लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।
 

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42% of people ages 55 and older face dementia know its causes and prevention tips
50 की आयु के बाद डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Freepik.com

उम्र बढ़ने के साथ आपमें कई प्रकार की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जाता है। 50 की उम्र के बाद आमतौर पर हड्डियों-मांसपेशियों में कमजोरी के साथ कई प्रकार की क्रोनिक बीमारियों का जोखिम भी अधिक हो जाता है। हालिया अध्ययन की रिपोर्ट ने 50 की आयु के बाद वाले लोगों में एक और तेजी से बढ़ती बीमारी को लेकर अलर्ट किया है।



अमेरिका स्थित वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर ने बताया है कि 55 वर्ष और उससे अधिक आयु के 42% से अधिक लोगों में डिमेंशिया होने का जोखिम हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

डिमेंशिया, मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों का एक समूह है जो समय के साथ मानसिक क्षमताओं में गिरावट को दर्शाती है। इसके कारण याददाश्त, सोच, व्यवहार और मानसिक स्थितियों पर नियंत्रण में कमी आने लगती है। कई अध्ययनों में डिमेंशिया को गंभीर रोगों का कारण भी बताया जाता रहा है। ये बीमारी दैनिक कार्यों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करने वाली हो सकती है।

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अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया - फोटो : Freepik.com

50 की उम्र के बाद डिमेंशिया का खतरा

50 की उम्र के बाद वाले लोगों में डिमेंशिया के बढ़ते जोखिमों के डेटा ने विशेषज्ञों को अलर्ट कर दिया है। 

अध्ययनकर्ताओं की टीम ने शोध के दौरान पाया कि जिन लोगों में रक्त वाहिकाओं से संबंधित बीमारियां (वैस्कुलर डिजीज) होती हैं, ऐसे लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा भी अधिक हो सकता है। वेक फॉरेस्ट यूनिवर्सिटी में  डिमेंशिया और जेरोन्टोलॉजी विशेषज्ञ मिया यांग कहती हैं कि जिस तरह से इस रोग के बढ़ते आंकड़े देखे जा रहे हैं उसे ध्यान में रखते हुए कम उम्र से ही हृदय रोगों और डिमेंशिया दोनों से बचाव को लेकर सावधान रहने की आवश्यकता है। ये दोनों बीमारियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। 

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हार्ट और ब्रेन का संबंध - फोटो : Adobe Stock

हृदय रोग और डिमेंशिया का संबंध

शोधकर्ताओं ने कहा, ये कोई नई बात नहीं है, हम पहले से ही जानते हैं कि जिन लोगों में रक्त वाहिका से संबंधित बीमारियों का जोखिम होता है उनमें डिमेंशिया होने की आशंका भी अधिक होती है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हाइपरलिपिडिमिया जैसी बीमारियां हैं, ऐसे लोगों में डिमेंशिया होने का खतरा उन लोगों की तुलना में अधिक होता है जिनमें ये समस्या नहीं हैं। 

हालांकि ये कोई पुख्ता पैरामीटर भी नहीं है। रक्त वाहिका से संबंधित बीमारियों के बिना भी बहुत से रोगियों में अल्जाइमर-डिमेंशिया का निदान किया जाता रहा है।

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डिमेंशिया के जोखिमों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित इस नवीनतम अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कई स्थानों पर किए गए अध्ययन के डेटा मूल्यांकन से ये भी पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इस रोग का खतरा अधिक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिमेंशिया का कोई इलाज नहीं है, लेकिन अगर कम उम्र से ही कुछ उपाय किए जाएं तो जोखिमों को कम करने में मदद जरूर मिल सकती है। इसके लिए अध्ययनकर्ता  मिया यांग ने कुछ उपाय बताए हैं जिसे युवावस्था से ही अगर ध्यान में रखा जाए तो भविष्य में अल्जाइमर-डिमेंशिया से बचाव किया जा सकता है।

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याददाश्त की समस्या को कैसे ठीक रखें? - फोटो : Freepik.com

कैसे रह सकते हैं सुरक्षित?

मिया यांग कहती हैं, सभी लोगों को युवावस्था से ही अपने ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और फास्टिंग शुगर लेवल की निरंतर जांच करते रहना चाहिए और इसे कंट्रोल में रखने के लिए भी उपाय करना चाहिए। ये सभी स्थितियां डिमेंशिया के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। दिनचर्या में एरोबिक व्यायाम को शामिल करना सबसे अच्छा हो सकता है, जैसे रनिंग, वॉकिंग, साइकिलिंग या तैराकी आदि।  कोई भी चीज जो आपकी हृदय गति को बढ़ाती है और पसीना लाती है, वह आपके लिए लाभकारी है।

और अंत में, अपने आहार में सुधार करना भी सबसे जरूरी है। हरी सब्जियां और फल जरूर खाएं। तले हुए और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों से दूरी बनाकर भी आप हृदय की बीमारियों और डिमेंशिया दोनों से बचे रह सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Lifetime risk and projected burden of dementia


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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