शरीर को स्वस्थ और फिट रखने पर ध्यान देना मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत है। आयुर्वेद को इसमें सबसे कारगर माना जाता है। 18-19 मई को लखनऊ में आयोजित अमर उजाला संवाद 2026 के पहले दिन आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष ने बताया कि किस तरह से आयुर्वेद के सिद्धांत हमारा जीवन बदल सकते हैं।
Amar Ujala Samwad 2026: आयुर्वेद के ये दो मंत्र बदल सकते हैं सेहत की कहानी, जानिए आचार्य मनीष के जरूरी सुझाव
Acharya Manish in Amar Ujala Samwad 2026: आयुर्वेद भारत की हजारों साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है, जिसका मुख्य उद्देश्य केवल बीमारी का इलाज करना नहीं बल्कि शरीर को संतुलित और स्वस्थ बनाए रखना है। अमर उजाला संवाद 2026 कार्यक्रम में आयुर्वेदाचार्य आचार्य मनीष ने सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी मंत्र बताए हैं।
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आयुर्वेद से शरीर होता है स्वस्थ
आचार्य मनीष कहते हैं, शरीर के भीतर जमा होने वाले विषैले तत्व यानी टॉक्सिन्स कई बीमारियों की जड़ बनते हैं। उपवास और पंचकर्म जैसी प्रक्रियाएं शरीर को भीतर से साफ करने में मदद करती हैं। वैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि नियंत्रित उपवास के तरीके से मेटाबॉलिज्म सुधारने, इंफ्लेमेशन को कम करने और इंसुलिन सेंसिटिविटी को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
प्राकृतिक चिकित्सा का उद्देश्य शरीर की प्राकृतिक हीलिंग क्षमता को बढ़ाना होता है। इसमें संतुलित आहार, योग, ध्यान और डिटॉक्स तकनीकों का उपयोग किया जाता है। आयुर्वेद मानता है कि जब शरीर, मन और आत्मा संतुलन में रहते हैं तभी व्यक्ति वास्तव में स्वस्थ होता है।
पहला मंत्र- शरीर को बीमारियों से बचाने में मददगार
आयुर्वेद कहता है ''लंघनं परम् औषधं" यानी उपवास ही सर्वोत्तम औषधि है।
आचार्य मनीष कहते हैं, शरीर को रोग मुक्त रखने के लिए हमें पशुओं से सीखना चाहिए। जब वे बीमार होते हैं तो खाना छोड़ देते हैं, वहीं अगर हम बीमार होते हैं तो तमाम चीजें खाने लगते हैं। अगर पूरा भारत सीख जाए कि अगर कोई भी बीमारी आए तो 2-3 दिन कुछ न खाएं, व्रत पर चले जाएं तो बड़ी से बड़ी बीमारी के खतरे को दूर किया जा सकता है। ट्यूमर, हार्ट, रसौली जैसी दिक्कतें आसपास भी नहीं भटकेंगी।
आयुर्वेद में उपवास को शरीर और मन दोनों की शुद्धि का माध्यम माना गया है। उपवास का अर्थ केवल भूखे रहना नहीं बल्कि शरीर को आराम देना और पाचन तंत्र को पुनः सक्रिय होने का समय देना है। उपवास पाचन अग्नि को मजबूत बनाता है।
दूसरा मंत्र- शरीर से दूर करेगा रोगों का खतरा
आयुर्वेद कहता है "सर्वेषां रोगाणां निदानं कुपिता मला:" यानी सभी बीमारियों की जड़ कुपित मल (विषैले तत्व या टॉक्सिन्स) हैं। जब शरीर में वात, पित्त या कफ असंतुलित होकर दूषित हो जाते हैं, तब रोग उत्पन्न होते हैं। इसके लिए पंचक्रम किए जाते हैं।
पंचकर्म आयुर्वेद की एक विशेष डिटॉक्स प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालना और शरीर को संतुलित करना होता है। इसमें वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य और रक्तमोक्षण जैसी प्रक्रियाएं शामिल होती हैं। इनका मुख्य उद्देश्य शरीर में असंतुलित दोषों को दूर करके जमा हुए विषैले पदार्थों को बाहर निकालना और संपूर्ण स्वास्थ्य लाभ पहुंचाना है।
आयुर्वेद सेहत को देता है कई फायदे
आयुर्वेद मानता है कि शरीर में जमा 'आम' यानी विषैले तत्व कई बीमारियों की वजह बनते हैं। पंचकर्म इन तत्वों को बाहर निकालने में सहायक माना जाता है। कई लोग पंचकर्म के बाद बेहतर नींद, हल्कापन और ऊर्जा महसूस करने की बात बताते हैं।
आचार्य मनीष ने सुझाव दिया है कि स्कूली दिनों से ही बच्चों को आयुर्वेद से जोड़ा जाना चाहिए ताकि वे समझ सकें कि सेहत के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा?
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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