साल 2003 का क्रिकेट विश्वकप हर क्रिकेट प्रेमी की यादों में आज भी जरूर जिंदा होगा। 23 मार्च को भारत, ऑस्ट्रेलिया से फाइनल जरूर हार गया था लेकिन पूरे टूर्नामेंट में कई खिलाड़ियों ने ऐसा जबरदस्त प्रदर्शन किया था कि वो आज में जहन में ताजा है। चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम के हरफनमौला खिलाड़ी डेमियन मार्टिन भी उनमें से एक हैं। हालांकि स्टार खिलाड़ी को लेकर मिल रही जानकारियां प्रशंसकों को चिंता में डालने वाली हो सकती हैं।
Damien Martyn: मेनिन्जाइटिस रोग के कारण कोमा में है स्टार ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर, जानिए क्या है ये समस्या
- ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज डेमियन मार्टिन इन दिनों जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। उन्हें मेनिन्जाइटिस की समस्या हो गई है जिसके चलते वह कोमा में हैं।
- जानिए आखिर क्या है ये समस्या?
मेनिन्जाइटिस की समस्या के बारे में जानिए
मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक मेनिन्जाइटिस दिमाग और रीढ़ की हड्डी के आसपास के फ्लूइड और झिल्लियों में होने वाला इन्फेक्शन या सूजन है। इन झिल्लियों को मेनिन्जेस कहा जाता है। मेनिन्जाइटिस के कारण हुए सूजन के चलते रोगियों को अक्सर सिरदर्द, बुखार और गर्दन में अकड़न जैसे लक्षण होते हैं। कुछ स्थितियों में ये समस्या बिना इलाज के कुछ हफ्तों में ठीक हो जाती है, हालांकि गंभीर स्थितियों में इसके कारण जानलेवा दिक्कतें भी हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, मेनिन्जाइटिस की समस्या के लिए आमतौर पर वायरल इन्फेक्शन को प्रमुख कारण माना जाता है, हालांकि बैक्टीरिया, पैरासाइट और फंगस संक्रमण से भी ये दिक्कत हो सकती है।
मेनिन्जाइटिस की दिक्कत होती क्यों है?
अध्ययनों में पाया गया है कि एंटरोवायरस नाम के वायरस के कारण ये दिक्कत अधिक होती है। हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस, एचआईवी, मम्प्स वायरस, वेस्ट नाइल वायरस भी वायरल मेनिनजाइटिस का कारण बन सकते हैं। आमतौर पर वायरल मेनिनजाइटिस हल्का होता है और अपने आप ठीक हो जाता है। हालांकि क्रॉनिक मेनिनजाइटिस, जिसके लक्षण तीन-चार हफ्ते तक रहते हैं, ये खतरनाक हो सकता है। इसके कारण ब्रेन फॉग की भी समस्या हो सकती है।
वहीं स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया नामक बैक्टीरिया शिशुओं, छोटे बच्चों और वयस्कों में बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस का सबसे आम कारण है। वैक्सीन इस इन्फेक्शन को रोकने में मदद कर सकती है।
किन्हें होता है मेनिन्जाइटिस संक्रमण का ज्यादा खतरा?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वैसे तो मेनिन्जाइटिस संक्रमण किसी को भी हो सकता है, हालांकि कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।
जिस लोगों को बचपन में सभी जरूरी टीके नहीं लगे हैं, उसमें इसका जोखिम अधिक देखा जाता है। इसके अलावा वायरल मेनिन्जाइटिस अक्सर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में अधिक देखा जाता है। बैक्टीरियल मेनिनजाइटिस 20 साल से कम उम्र के लोगों में आम है।
गर्भावस्था, लिस्टरिया बैक्टीरिया से होने वाले इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा देती है, जिससे भी मेनिन्जाइटिस हो सकता है। यह इन्फेक्शन गर्भपात, मृत शिशु के जन्म और समय से पहले डिलीवरी का खतरा बढ़ाता है। इसके अलावा कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में संक्रमण का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
मेनिन्जाइटिस से होने वाली दिक्कतें और बचाव
मेनिन्जाइटिस की जटिलताएं गंभीर हो सकती हैं। अगर इसका समय पर पहचान और इलाज न हो पाए तो दौरे पड़ने और तंत्रिकाओं को क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है। गंभीर स्थितियों में इसके कारण सुनने और देखने में दिक्कत, याददाश्त की समस्या, किडनी फेलियर, कोमा और मौत तक हो सकती है। इस रोग से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ हाथों की स्वच्छता बनाए रखने, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी वैक्सीन लगाने की सलाह देते हैं, जिससे इस रोग के खतरे को कम किया जा सकता है।
जिन लोगों में ये संक्रामक बीमारी होती है, उनमें संक्रमण के कारणों को समझते हुए उपचार दिया जाता है। बैक्टीरियल संक्रमण की स्थिति में एंटीबायोटिक दवाओं को प्रयोग में लाया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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