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New Year 2026: केवल शादी-पार्टी में ही करते हैं ड्रिंक तो भी हो जाइए सावधान, कैंसर कर रहा है आपका इंतजार
- अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कभी-कभी एक-दो पैग शराब पी लेना नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन वैज्ञानिक शोध इस धारणा को गलत साबित करते हैं। सच्चाई यह है कि इनका सीमित या कभी-कभार सेवन भी शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है।
- टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन में इसके गंभीर जोखिमों को लेकर सावधान किया गया है।
थोड़ी सी भी शराब बन सकती है बड़ी मुसीबत
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर लोग यह मान लेते हैं कि कभी-कभी एक-दो पैग शराब पी लेना नुकसानदायक नहीं होता, लेकिन वैज्ञानिक शोध इस धारणा को गलत साबित करते हैं। सच्चाई यह है कि इनका सीमित या कभी-कभार सेवन भी शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है।
बीएमजे ग्लोबल हेल्थ ओपन एक्सेस जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शराब पीने की कोई भी सेफ लिमिट नहीं है। अल्कोहल को कई तरह के कैंसर का कारण माना जाता है। इससे लिवर के साथ मुंह के कैंसर का जोखिम भी बढ़ सकता है।
मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर द्वारा किए गए हालिया अध्ययन में पाया गया है कि दिन में अगर आप एक ड्रिंक भी लेते हैं तो इससे भी मुंह के कैंसर का खतरा 50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
मुंह के कैंसर के बढ़ते मामलों ने डराया
भारत में मुंह का कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसके हर साल अनुमानित डेढ़ लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 80 हजार लोगों की मौत हो जाती है। इस बीमारी की दर लगातार बढ़ रही है। हर एक लाख भारतीय पुरुषों में लगभग 15 लोगों में यह बीमारी देखी जा रही है। कैंसर के शिकार लोगों में से आधे से भी कम (43 प्रतिशत) पांच या उससे ज्यादा साल तक जीवित रह पाते हैं।
शोधकर्ताओं ने कहा, अल्कोहल किसी भी तरह का हो, चाहे वह बीयर-व्हिस्की, वाइन हो या गांवों में मिलने वाला महुआ, ताड़ी, देसी शराब ये सभी मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। गांवों और लोकल बाजार में बिकने वाली शराब को और भी खतरनाक पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि अगर आपको तंबाकू और शराब दोनों की लत है तो इससे मुंह के कैंसर का खतरा चार गुना तक बढ़ जाता है।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन की मुख्य लेखक और साइंटिफिक ऑफिसर डॉ. शरयू म्हात्रे ने कहती हैं, मुंह के कैंसर के खतरे के लिए शराब पीने की कोई सुरक्षित सीमा नहीं है।
इस अध्ययन में साल 2010 से लेकर 2021 के बीच मुंह के कैंसर के शिकार 1,803 लोगों और बीमारी से मुक्त हो चुके 1,903 रैंडमली चुने गए लोगों की तुलना की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन्होंने कोई शराब नहीं पी थी उनकी तुलना में शराब पीने वालों में इस कैंसर का खतरा 68 प्रतिशत ज्यादा पाया गया।
टाटा मेमोरियल सेंटर के डायरेक्टर डॉ. सुदीप गुप्ता कहते हैं, यह रिपोर्ट पहली बार शराब और तंबाकू चबाने के मिले-जुले असर को दिखाती है। अब समय आ गया है कि शराब कंट्रोल पॉलिसी को मजबूत किया जाए वरना गंभीर खतरा हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
सेंटर फॉर कैंसर एपिडेमियोलॉजी के निदेशक डॉ. राजेश दीक्षित कहते है, अध्ययन के अनुसार, भारत में मुंह के कैंसर के 10 में से 1 से ज्यादा मामले (लगभग 11.5%) शराब की वजह से होते हैं। अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, तेलंगाना और मध्य प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में ये बीमारी ज्यादा फैली हुई है, यहां पर शराब से होने वाले मुंह के कैंसर का दर 15 प्रतिशत से अधिक है।
गुजरात जैसे राज्यों में, जहां शराब की बिक्री पर बैन है, शराब से होने वाले मुंह के कैंसर का खतरा भी बहुत कम है।
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स्रोत:
Association of alcohol and different types of alcoholic beverages on the risk of buccal mucosa cancer in Indian men: a multicentre case-control study
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