मानसून शुरू होते ही संक्रामक बीमारियों का दौर भी शुरू हो गया है। कई स्थानों पर डेंगू-मलेरिया जैसी मच्छर जनित बीमारियों के साथ इन दिनों गुजरात में चांदीपुरा वायरस का खतरा देखा जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिमाग पर सीधा अटैक करने वाले इस संक्रामक रोग से अब तक यहां तीन बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि छह बच्चे संक्रमित पाए गए हैं।
Alert: गुजरात में जानलेवा संक्रमण से तीन बच्चों की मौत, 10 प्वाइंट्स में जानिए चांदीपुरा वायरस के बारे में
चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। संक्रमित व्यक्ति, खासकर बच्चों में, अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी, उल्टी और शरीर में दर्द हो सकता है। गुजरात में बढ़ते संक्रमण के मामले स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ाते जा रहे हैं।
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चांदीपुरा वायरस का खतरा
चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित सैंड फ्लाई (रेत में पनपने वाली बहुत छोटी मक्खी जैसे कीट) के काटने से फैलता है। यह वायरस अक्यूट एन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम का कारण बन सकता है। जिसमें दिमाग में सूजन और गंभीर संक्रमण की समस्या हो सकती है, जो जानलेवा भी हो सकता है। आइए इस रोग के बारे में 10 प्वाइंट्स में समझ लेते हैं।
- चांदीपुरा एक आरएनए वायरस है, जो रैबडोविरिडे फैमिली का सदस्य है। इसकी पहचान पहली बार वर्ष 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में हुई थी, जिसके नाम पर इस वायरस का नाम रखा गया। भारत में इसके मामले समय-समय पर देख जाते रहे हैं, विशेष रूप से मानसून के दौरान सामने आते रहे हैं।
- यह वायरस मुख्य रूप से मस्तिष्क को प्रभावित करने वाली गंभीर बीमारी का कारण बनता है। ये बीमारी सबसे ज्यादा 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में देखी गई है। संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।
- चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से सैंडफ्लाई के काटने फैलता है। मानसून के दिनों में नमी, गंदगी और कीड़ों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों, मिट्टी के घरों और कम स्वच्छता वाले इलाकों में इसका जोखिम अधिक हो सकता है।
- चांदीपुरा वायरस के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। इसके अलावा सिरदर्द-कमजोरी, उल्टी और शरीर में दर्द हो सकता है। कई मामलों में बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है। जिससे दौरे पड़ने, बेहोशी, भ्रम जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं बढ़ जाती हैं।
- चांदीपुरा वायरस का संक्रमण बहुत तेजी से दिमाग को प्रभावित कर सकता है। कई मरीजों में बुखार आने के 24 से 48 घंटे के भीतर दौरे, कोमा और मस्तिष्क संबंधी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। यदि समय पर इलाज न मिले तो मृत्यु का खतरा काफी बढ़ जाता है।
- चांदीपुरा वायरस के लिए कोई विशेष एंटीवायरल दवा या स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। इलाज पूरी तरह मरीज के लक्षणों और स्थिति पर आधारित होता है। डॉक्टर बुखार नियंत्रित करने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने, दौरे रोकने और जरूरत पड़ने पर आईसीयू में इलाज जैसी सहायक चिकित्सा देते हैं।
- डॉक्टर कहते हैं, संक्रमण की स्थिति में जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचता है, उतनी ही बेहतर रिकवरी की संभावना होती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है।
- चूंकि इसका कोई टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे प्रभावी उपाय है। सैंडफ्लाई और अन्य कीटों के काटने से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें, बच्चों को शाम के समय बाहर कम रखें, मच्छरदानी का उपयोग करें और कीट भगाने वाले रिपेलेंट का इस्तेमाल करें।
- कीटों को बढ़ने से रोकने के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें तथा सफाई बनाए रखें। फॉगिंग और कीटनाशक छिड़काव की मदद से कीटों को बढ़ने से रोका जा सकता है। सामुदायिक स्तर पर स्वच्छता बढ़ाने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।
- भारत में चांदीपुरा वायरस के मामले समय-समय पर महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और कुछ अन्य राज्यों में सामने आते रहे हैं। वर्ष 2024 में देश में पिछले दो दशकों का सबसे बड़ा प्रकोप दर्ज किया गया था। फिलहाल गुजरात में इसके मामले बढ़ते हुए देखे जा रहे है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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