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Fertility Crisis: 35 की उम्र के बाद प्रेग्नेंसी में आ रही दिक्कतें, चिंता बढ़ा रहे आंकड़े; आखिर क्या है वजह

Sat, 11 Jul 2026 01:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 11 Jul 2026 01:06 PM IST
सार

दुनिया भर में इस समय 35-49 साल की लगभग 5.36 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। इससे वैश्विक स्तर पर बढ़ती बांझपन की समस्या को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है। आखिर इसके पीछे किन कारणों को जिम्मेदार माना जा रहा है? आइए जानते हैं।

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मां बनना होता जा रहा है मुश्किल - फोटो : Amarujala.com/AI

विस्तार

पढ़ाई, करियर या आर्थिक स्थिरता... क्या आप भी किसी न किसी वजह से मां बनने की योजना को टाल रही हैं? विशेषज्ञों ने ऐसी महिलाओं को अलर्ट किया है, कहीं समय रहते मां की न बनना आपके लिए जीवनभर का पछतावा न बन जाए?

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इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन ने चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। शोध के मुताबिक, इस समय दुनियाभर में 35-49 वर्ष की करीब 5.36 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो सामान्य रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगर यही रुझान जारी रहा तो 2036 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 7.96 करोड़ हो सकती है।
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शोधकर्ताओं ने कहा, हमारे शरीर की बायोलॉजी क्लॉक लगातार चलती रहती है, जिसे रोका नहीं जा सकता। इसपर महिलाओं में बढ़ती मोटापे की समस्या, तनाव, खराब जीवनशैली और धूम्रपान-शराब जैसी आदतें गर्भधारण में मुश्किलों को और भी बढ़ाती जा रही हैं। यही वजह है कि दुनियाभर में 35 साल से अधिक उम्र की महिलाओं को मां बनने में अब काफी दिक्कत आ रही है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि अब पहले की तुलना में ज्यादा महिलाएं फर्टिलिटी जांच और आईवीएफ जैसे इलाज लेने की मजबूर हो रही हैं, जिससे ऐसे मामलों की पहचान भी अधिक हो रही है।

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इनफर्टिलिटी की समस्या - फोटो : Freepik.com

यह रिपोर्ट सिर्फ उम्र बढ़ने के कारण होने वाली प्रजनन की दिक्कतों की ही बात नहीं करती है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली के रोल को उजागर कर रही है। 

देर से गर्भधारण की योजना बढ़ा रही दिक्कतें

विशेषज्ञों ने कहा, महिलाएं पहले से ज्यादा पढ़-लिख रही हैं, नौकरी कर रही हैं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं जो अच्छे संकेत हैं लेकिन इन वजहों से वे परिवार बढ़ाने का फैसला पहले की तुलना में काफी देर से ले रही हैं। इस दौरान शरीर में अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता धीरे-धीरे कम होने लगती है। नतीजा यह होता है कि जब परिवार शुरू करने की इच्छा होती है, तब गर्भधारण करना मुश्किल हो जाता है।

चीन की चोंगकिंग मेडिकल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया है कि दुनियाभर में इस समय 35-49 साल की लगभग 5.36 करोड़ महिलाएं ऐसी हैं जो गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं। 
 

  • इसके लिए 1990 से 2023 के बीच 204 देशों के स्वास्थ्य आंकड़ों का विश्लेषण किया। इसमें ये समझने की कोशिश की गई कि महिलाओं में गर्भधारण न कर पाने की समस्या समय के साथ कितनी और किन कारणों से बढ़ रही है?
  • इसमें पाया गया कि 1990 में हर एक लाख महिलाओं में लगभग 6,001 महिलाएं इस समस्या से प्रभावित थीं, जबकि 2023 में यह संख्या बढ़कर 6,907 हो गई।

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आईवीएफ - फोटो : Adobe Stock

अध्ययन में क्या पता चला?

'द लैंसेट ऑब्सटेट्रिक्स, गाइनेकोलॉजी एंड विमेंस हेल्थ' में प्रकाशित आंकड़ों
के आधार पर डॉक्टर बताते हैं कि 35 की उम्र के बाद प्रजनन क्षमता तेजी से कम होने लगती है और 40 तक यह बहुत कम रह जाती है।

जोखिमों के बारे में समझने के लिए शोधकर्ताओं ने महिलाओं को तीन आयु वर्गों 35 से 39 वर्ष, 40 से 44 वर्ष, 45 से 49 वर्ष में बांटा। इसमें पता लगाने की कोशिश की गई कि एक साल तक बिना किसी गर्भनिरोधक के नियमित शारीरिक संबंध बनाने के बावजूद गर्भधारण न हो पाने के क्या आंकड़े हैं?
 

  • शोधकर्ताओं ने मौजूदा आंकड़ों के आधार पर भविष्य में इसके जोखिमों का अनुमान लगाया। उन्होंने पाया कि वैसे तो तीनों आयु वर्गों में प्रजनन समस्या बढ़ेगी, लेकिन सबसे तेज वृद्धि 35 से 39 वर्ष की महिलाओं में होगी।


हालांकि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि 35-39 साल की महिलाएं, 40 साल से अधिक उम्र की महिलाओं की तुलना में बांझपन का शिकार होंगी। इसका मतलब यह है कि उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं के अंडों की संख्या और उनकी गुणवत्ता लगातार कम होती जाती है, इसलिए प्रजनन क्षमता स्वाभाविक रूप से घटती रहती है।

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गर्भधारण में क्यों आ रही हैं दिक्कतें - फोटो : Freepik.com

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

ब्रिटेन की महिलाओं पर किए अध्ययन (ऑफिस फॉर नेशनल स्टैटिस्टिक्स 2021) में पाया गया कि इंग्लैंड और वेल्स में मां बनने वाली महिलाओं की औसत उम्र सिर्फ 30.9 वर्ष थी।

अध्ययन के लेखकों का कहना है कि समय पर गर्भधारण न करने के अलावा मोटापा और लगातार मानसिक तनाव भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। अध्ययन की प्रमुख लेखिका युआनयुआन डू कहती हैं, 1990 के दशक के आखिर से महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में भागीदारी तेजी से बढ़ी। इसके कारण बड़ी संख्या में महिलाओं ने मां बनने का फैसला बाद के वर्षों के लिए टाल दिया और इससे उम्र से जुड़ी प्रजनन समस्याएं बढ़ीं।
 

  • यह समस्या केवल गरीब देशों तक सीमित नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि अब अधिक विकसित और उच्च आय वाले देशों में भी यह बोझ तेजी से बढ़ रहा है।
  • शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अधिक उम्र की महिलाओं में गर्भधारण न कर पाना सिर्फ एक चिकित्सीय समस्या नहीं है। इसका असर मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जीवन और आर्थिक स्थिति पर भी पड़ता है।
  • इससे महिलाओं को मानसिक तनाव, समाज में कलंक, इलाज का आर्थिक बोझ, वैवाहिक रिश्तों में तनाव जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • साथ ही भविष्य में बुजुर्ग आबादी बढ़ने और कामकाजी लोगों की संख्या घटने जैसी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

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गर्भाधान संस्कार की तरफ बढ़ रहा झुकाव - फोटो : Adobe Stock Photo

आयुर्वेद के 'गर्भाधान संस्कार' की तरफ बढ़ रहा है झुकाव

बढ़ती बांझपन की समस्या और गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं के बीच लोगों की रुझान फिर से 'गर्भाधान संस्कार' की तरफ बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि कोई दंपती बच्चा प्लान करने से पहले अपने शरीर और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, तो इससे गर्भधारण, गर्भावस्था और बच्चे के जन्म से जुड़े परिणाम बेहतर हो सकते हैं। आयुर्वेद के जानकारों का कहना है कि आयुर्वेद में यह अवधारणा सदियों पहले से 'गर्भाधान संस्कार' के रूप में मौजूद है। इसमें गर्भधारण से पहले होने वाले माता-पिता को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करने पर ध्यान दिया जाता है।

कर्नाटक के उडुपी स्थित एसडीएम कॉलेज ऑफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल कई वर्षों से अपने आयुर्वेदिक प्री-कंसेप्शन केयर कार्यक्रम के तहत गर्भाधान संस्कार की सुविधा दे रहा है। 

कॉलेज की प्राचार्य और वरिष्ठ प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता के.वी. कहती हैं, इस कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भधारण से पहले होने वाले माता और पिता, दोनों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसके लिए हर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार आयुर्वेदिक उपचार, खानपान में बदलाव, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की सलाह और काउंसलिंग (यानी विशेषज्ञ द्वारा सही मार्गदर्शन और मानसिक सहयोग) दी जाती है।

डॉ. ममता बताती हैं कि गर्भाधान संस्कार का मतलब है "गर्भधारण के लिए सोच-समझकर और पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ना।गर्भधारण केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक पवित्र तैयारी भी है, जिसमें होने वाले माता-पिता अपने शरीर, मन, भावनाओं और जीवनशैली को बेहतर बनाते हैं, ताकि उनके होने वाले बच्चे को जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत मिल सके।

आयुर्वेद में इस अवधारणा का उल्लेख हजारों साल पहले किया गया था, लेकिन आज के समय में इसकी प्रासंगिकता (महत्व) और भी बढ़ गई है। 



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स्रोत: 
Epidemiological trends, disparities, and developmental correlates of infertility in women of advanced maternal age, 1990–2023: a comprehensive analysis within the GBD framework


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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