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Parenting Tips: पिता की ये 8 आदतें बच्चे के भविष्य पर डाल सकती हैं बुरा असर, समय रहते बदलें

Fri, 10 Jul 2026 10:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 10 Jul 2026 10:00 PM IST
सार

Fathers Habits Affect Child Future पिता की कौन-सी आदतें बच्चे के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं?
उत्तर: बार-बार डांटना, बच्चे की तुलना दूसरों से करना, उसकी बात न सुनना, हर समय गुस्सा करना, वादे पूरे न करना, परिवार को समय न देना, गलत व्यवहार का उदाहरण बनना और बच्चे की भावनाओं को नजरअंदाज करना जैसी आदतें उसके आत्मविश्वास, सीखने की क्षमता और रिश्तों पर असर डाल सकती हैं। सकारात्मक संवाद, सम्मानजनक व्यवहार और समय देना बच्चे के स्वस्थ विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Parenting Tips For Fathers Habits Affect Child Future in hindi
पिता की आदतों से बच्चे का भविष्य खराब हो सकता है - फोटो : Ai

Parenting Advice: बच्चे के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और सोच के विकास में माता-पिता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जहां मां का स्नेह और देखभाल बच्चे की भावनात्मक नींव को मजबूत करते हैं, वहीं पिता का व्यवहार, अनुशासन, संवाद और जीवन जीने का तरीका भी बच्चे पर गहरा प्रभाव डाल सकता है। बच्चे केवल सीखने की बातें नहीं सुनते, बल्कि अपने आसपास के व्यवहार को देखकर भी बहुत कुछ अपनाते हैं। इसलिए पिता की रोजमर्रा की आदतें उनके बच्चों के भविष्य को सकारात्मक या नकारात्मक, दोनों तरह से प्रभावित कर सकती हैं।

हर पिता अपने बच्चे के लिए बेहतर भविष्य चाहता है, लेकिन कभी-कभी अनजाने में की गई कुछ आदतें, जैसे हमेशा गुस्से में रहना, बच्चे की बात पूरी तरह न सुनना या लगातार तुलना करना—बच्चे के आत्मविश्वास और भावनात्मक विकास पर असर डाल सकती हैं। इसका मतलब यह नहीं कि हर गलती से स्थायी नुकसान होता है, बल्कि यह कि समय रहते सकारात्मक बदलाव करना लाभदायक हो सकता है।

अध्ययनों से यह संकेत मिलता है कि जब पिता सक्रिय रूप से बच्चे के जीवन में शामिल होते हैं, तो कई बच्चों में आत्मविश्वास, सामाजिक कौशल और समस्या-समाधान जैसी क्षमताओं के विकास में सकारात्मक प्रभाव देखा जा सकता है। हालांकि हर परिवार की परिस्थितियां अलग होती हैं और बच्चे का विकास कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है।

इस लेख में हम उन आदतों के बारे में जानेंगे जिन्हें सुधारकर पिता अपने बच्चे के साथ बेहतर संबंध बना सकते हैं और उसके स्वस्थ मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास में सहयोग कर सकते हैं।


1. हर छोटी बात पर डांटना या गुस्सा करना

लगातार डांटने या ऊंची आवाज में बात करने से बच्चा अपनी बात कहने से हिचक सकता है।

क्या करें?

  • पहले पूरी बात सुनें।

  • गलती समझाते समय शांत रहें।

  • व्यवहार पर बात करें, बच्चे के व्यक्तित्व पर नहीं।


2. बच्चे की दूसरों से तुलना करना

"देखो, तुम्हारा दोस्त तुमसे बेहतर है" जैसी बातें बच्चे के आत्मसम्मान को प्रभावित कर सकती हैं।

बेहतर तरीका

  • बच्चे की अपनी प्रगति पर ध्यान दें।

  • छोटे-छोटे प्रयासों की भी सराहना करें।

  • तुलना के बजाय प्रेरणा दें।


3. परिवार और बच्चों के लिए समय न निकालना

व्यस्त दिनचर्या के कारण कई बार बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय कम हो जाता है।

क्या करें?

  • रोज कुछ समय बिना मोबाइल के बच्चे के साथ बिताएं।

  • साथ में खेलें, पढ़ें या बातचीत करें।

  • बच्चे की रुचियों में भाग लें।


4. अपनी बात से बार-बार मुकर जाना

यदि पिता बार-बार किए गए वादे पूरे नहीं करते, तो बच्चे का भरोसा कमजोर हो सकता है।

सुधार कैसे करें?

  • वही वादा करें जिसे निभा सकें।

  • यदि योजना बदल जाए तो कारण समझाएं।

  • ईमानदारी और भरोसे का उदाहरण बनें।


5. बच्चे की भावनाओं को नजरअंदाज करना

"इसमें रोने की क्या बात है?" जैसे वाक्य बच्चे को यह महसूस करा सकते हैं कि उसकी भावनाएं महत्वपूर्ण नहीं हैं।

क्या करें?

  • उसकी भावनाओं को स्वीकार करें।

  • धैर्य से सुनें।

  • समस्या का समाधान साथ मिलकर खोजें।

 
6. गलत व्यवहार का उदाहरण बनना

बच्चे अक्सर वही सीखते हैं जो वे घर में देखते हैं।

किन बातों का ध्यान रखें?

  • सम्मानजनक भाषा का प्रयोग करें।

  • ट्रैफिक नियमों और सामाजिक नियमों का पालन करें।

  • मतभेद होने पर भी शांतिपूर्ण संवाद रखें।


7. हर निर्णय खुद लेना

यदि बच्चे को कभी भी अपनी राय रखने का अवसर नहीं मिलता, तो उसका आत्मविश्वास विकसित होने में बाधा आ सकती है।

बेहतर तरीका

  • उम्र के अनुसार छोटे फैसलों में बच्चे की राय पूछें।

  • विकल्प चुनने का अवसर दें।

  • सही निर्णय लेने की प्रक्रिया सिखाएं।


8. केवल पढ़ाई पर जोर देना

अच्छे अंक महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन बच्चे का संपूर्ण विकास भी उतना ही जरूरी है।

संतुलन कैसे बनाएं?

  • खेल, कला और रचनात्मक गतिविधियों को महत्व दें।

  • प्रयास की प्रशंसा करें, केवल परिणाम की नहीं।

  • सीखने की खुशी को बढ़ावा दें।

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