Steel, Peetal Or Mitti Ke Bartan: भारतीय रसोई में बर्तनों का चुनाव केवल सुविधा का मामला नहीं है, बल्कि यह भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और लंबे समय की उपयोगिता से भी जुड़ा होता है। आजकल ज्यादातर घरों में स्टेनलेस स्टील के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि पहले के समय में पीतल, कांसा और मिट्टी के बर्तनों का चलन अधिक था।
Kitchen Tips: स्टील, पीतल या मिट्टी? खाना पकाने के लिए कौन-सा बर्तन है सबसे अच्छा
Best Cooking Utensils: खाना पकाने के लिए स्टील, पीतल और मिट्टी में कौन-सा बर्तन बेहतर है?
स्टेनलेस स्टील रोजमर्रा के उपयोग के लिए सबसे सुविधाजनक और टिकाऊ विकल्प है। पीतल गर्मी अच्छी तरह फैलाता है, लेकिन सही देखभाल और कलई जरूरी हो सकती है। मिट्टी के बर्तन धीमी आंच पर पकने वाले व्यंजनों के लिए लोकप्रिय हैं और भोजन को पारंपरिक स्वाद देने के लिए पसंद किए जाते हैं।
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स्टील के बर्तन
- स्टील के बर्तन रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए सबसे व्यावहारिक होते हैं।
- स्टेनलेस स्टील के बर्तन लगभग हर भारतीय रसोई का हिस्सा हैं।
- ये मजबूत, टिकाऊ और साफ करने में आसान होते हैं।
फायदे
- स्टेनलेस स्टील के बर्तनों के इस्तेमाल का एक फायदा है कि उन्हें जंग नहीं लगती।
- ये मजबूत होते हैं, जिससे लंबे समय तक चलते हैं।
- अधिकतर सभी तरह का खाना आप स्टील के बर्नों में बना सकते हैं।
- इन्हें साफ करना आसान होता है और कम रखरखाव की जरूरत होती है।
- यह खट्टे खाद्य पदार्थों के साथ सामान्यतः सुरक्षित माने जाते हैं।
नुकसान
- गर्मी समान रूप से नहीं फैलती, इसलिए कई बर्तनों में मल्टी-लेयर (ट्राई-प्लाई) बेस का उपयोग किया जाता है।
- स्टील के बर्तनों में भोजन पकाते समय बहुत तेज आंच पर खाना तले में चिपक सकता है।
पीतल के बर्तन
- यह भोजन पकाने का पारंपरिक विकल्प है।
- पीतल के बर्तनों का उपयोग भारतीय रसोई में लंबे समय से होता आया है।
- कई पारंपरिक घरों में आज भी इनका इस्तेमाल किया जाता है।
फायदे
- पीतल के बर्तन गर्मी अच्छी तरह संचालित करते हैं, जिससे खाना अपेक्षाकृत समान रूप से पक सकता है।
- इन्हें पारंपरिक व्यंजनों के लिए लोकप्रिय विकल्प माना जाता है।
- यह मजबूत और लंबे समय तक चलने वाले बर्तन होते हैं।
नुकसान
- अम्लीय यानी खट्टे खाद्य पदार्थ सीधे पीतल में पकाना या रखना उचित नहीं माना जाता।
- कई पीतल के बर्तनों में अंदर टिन (कलई) की परत होती है, जिसकी समय-समय पर दोबारा कलई करवानी पड़ सकती है।
- नियमित सफाई और रखरखाव की जरूरत होती है।
- पुराने दौर में या गांवों में मिट्टी के बर्तनों में ही खाना पकाया जाता था।
- मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने का चलन फिर से बढ़ रहा है।
- इसमें खासकर पारंपरिक और धीमी आंच वाले व्यंजनों को पकाया जाता है।
- धीमी आंच में स्वाद का अलग अनुभव मिलता है।
फायदे
- यह धीमी आंच पर खाना पकाने के लिए उपयुक्त है।
- कई लोगों के अनुसार भोजन का स्वाद और सुगंध बेहतर महसूस होती है।
- यह बर्तन प्राकृतिक सामग्री से बने होते हैं।
- लंबे समय तक गर्माहट बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
नुकसान
- पीतल के बर्तन आसानी से टूट सकते हैं।
- पहली बार इस्तेमाल से पहले सही तरीके से तैयार करना पड़ता है।
- इसे उपयोग करने के लिए अधिक देखभाल और सावधानी की आवश्यकता होती है।
- सभी प्रकार के चूल्हों या इंडक्शन पर उपयुक्त नहीं होते।
- स्टील
- पीतल
- मिट्टी
किसी भी बर्तन का चयन करते समय उसकी गुणवत्ता, निर्माण और निर्माता के निर्देशों का पालन करें।
कौन-सा बर्तन चुनें?
- यदि आपको कम रखरखाव, टिकाऊपन और रोजमर्रा के उपयोग के लिए बर्तन चाहिए, तो स्टेनलेस स्टील सबसे व्यावहारिक विकल्प है।
- यदि आपको पारंपरिक खाना पकाने का अनुभव पसंद है और आप उचित देखभाल कर सकते हैं, तो पीतल और मिट्टी के बर्तन भी अच्छे विकल्प हो सकते हैं।
- सबसे अच्छा चुनाव आपकी जरूरत, पकाने की शैली और रखरखाव की क्षमता पर निर्भर करता है।