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Dementia: 65 की उम्र से पहले भी हो सकता है डिमेंशिया, नौकरी के दौरान ही दिखने लगते हैं लक्षण, कैसे पहचानें?

Sat, 11 Jul 2026 03:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Sat, 11 Jul 2026 03:16 PM IST
सार

शोधकर्ताओं ने बताया है कि अगर आपको काम करने में मुश्किल हो रही है और प्रोडक्टिविटी धीरे-धीरे कम होती जा रही है तो ये अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया' का शुरुआती संकेत हो सकता है। ये भविष्य में इस गंभीर बीमारी होने का संकेत हो सकता है।

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अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI

डिमेंशिया का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। अल्जाइमर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट पर गौर करें तो पता चलता है कि दुनियाभर में 5.5 करोड़ से ज्यादा लोग डिमेंशिया से पीड़ित हैं और हर 3 से 4 सेकंड में इसका एक नया मामला सामने आता है। इनमें से 60% से ज्यादा मामले कम और मध्यम आय वाले देशों में हैं।



डिमेंशिया मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित करने वाली समस्याओं का एक समूह है। इसमें याददाश्त, सोचने की क्षमता और भाषा कौशल में दिक्कत आने लगती है, जिसके कारण रोजाना के कार्यों को करना मुश्किल हो जाता है। आमतौर पर माना जाता है कि ये बीमारी 60-65 की उम्र के बाद होती है लेकिन डेटा बताते हैं कि अब कम उम्र वाले भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। कहीं आपको भी तो इसका खतरा नहीं है?

फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने एक रिपोर्ट में बताया कि अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया (65 साल से पहले होने वाला डिमेंशिया) के लक्षण बीमारी की पुष्टि होने से करीब 10-15 साल पहले ही दिखाने शुरू हो जाते हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसमें सिर्फ आपको याददाश्त कमजोर होने की ही दिक्कत नहीं होती, बल्कि नौकरी पर ही इसका असर दिखने लगता है।

आइए जानते हैं कि आप इसकी पहचान कैसे कर सकते हैं?

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डिमेंशिया के जोखिमों का खतरा - फोटो : Freepik.com

नौकरी में दिखने लगते हैं अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया के लक्षण

डॉक्टर कहते हैं, अगर आप भी ऑफिस में पहले की तरह काम नहीं कर पा रहे हैं, छोटी-छोटी बातें भूलने लगे हैं, मीटिंग का समय याद नहीं रहता, वर्षों से जो काम करते आ रहे वह अब मुश्किल लगने लगा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए, ये डिमेंशिया के खतरे को पहले से अलर्ट करने वाले संकेत हो सकते हैं।
 

  • विशेषज्ञ कहते हैं, अगर ऐसा कभी-कभार हो तो इसकी वजह तनाव, नींद की कमी या काम का दबाव हो सकता है। लेकिन अगर यह समस्या लगातार बढ़ती जाए तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। काम में लगातार गिरता प्रदर्शन सिर्फ करियर की समस्या नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
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कम उम्र में डिमेंशिया का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने करीब 800 मरीजों और 7,000 स्वस्थ लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। नतीजों में सामने आया कि जिन लोगों को बाद में अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया हुआ, उनको कई साल पहले से ही अपने साथियों की तुलना में नौकरी के दौरान दिक्कतें होने लगी थीं। 

विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में डिमेंशिया की पहचान करना आसान नहीं होता, क्योंकि डॉक्टर भी शुरुआती दौर में इस बीमारी की आशंका कम मानते हैं। यही वजह है कि मरीजों को सही निदान मिलने में कई साल लग जाते हैं। इस दौरान बीमारी चुपचाप आगे बढ़ती रहती है और व्यक्ति की नौकरी, आर्थिक स्थिति, परिवार और मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है।


क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शोध का नेतृत्व करने वाले न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ईनो सोल्जे कहते हैं, अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया लोगों को उनकी जिंदगी के सबसे सक्रिय और कमाई वाले दौर में प्रभावित करता है।
 
  • इससे काम करने की क्षमता घटती है, बेरोजगारी बढ़ सकती है और कई लोग तय समय से पहले नौकरी छोड़ने पर मजबूर हो जाते हैं।
  • इसका असर केवल मरीज तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार की आय कम हो सकती है और इसका आर्थिक प्रभाव समाज पर भी पड़ता है।
  • यह अध्ययन बताता है कि अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया का सामाजिक और आर्थिक नुकसान कई साल पहले से शुरू हो जाता है।
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अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया को कैसे पहचानें? - फोटो : Freepik.com

इन संकेतों पर गंभीरता से दें ध्यान

कई मरीज बताते हैं कि इस बीमारी के शुरुआती लक्षण सबसे पहले उन्हें अपने ऑफिस के दौरान महसूस हुए। इसमें उन्हें कई तरह की मुश्किलें होती थीं।
 

  • मीटिंग, अपॉइंटमेंट या जरूरी तारीखें बार-बार भूल जाना।
  • लंबे समय से करते आ रहे आसान कामों को करने में परेशानी होना।
  • ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत आना।
  • बातचीत को ठीक से समझने या उसका क्रम पकड़ने में कठिनाई होना।


बीमारी बढ़ने पर मरीजों में मूड बदलने, भ्रम के साथ परिवार या दोस्तों पर शक करना जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

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कम उम्र में डिमेंशिया का खतरा - फोटो : Freepik.com

आखिर क्यों बढ़ रही है ये दिक्कत?

वैज्ञानिकों के मुताबिक अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया की सही वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। माना जाता है कि लगभग हर 10 में से 1 मरीज में ऐसे जीन होते हैं जो इस बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी रही है, उनमें जोखिम अधिक हो सकता है।

इसके अलावा कम उम्र में स्ट्रोक के कारण हुई ब्रेन इंजरी या लंबे समय तक बहुत अधिक शराब पीना भी इस बीमारी का खतरा बढ़ा सकता है।

डॉक्टर मरीज के लक्षणों, याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और अन्य जांचों के आधार पर इस बीमारी का निदान करते हैं। कुछ मरीज बीमारी की पुष्टि होने के बाद भी कई वर्षों तक काम करते रहते हैं, जबकि कुछ लोगों को नौकरी छोड़नी पड़ जाती है। हालांकि अर्ली-ऑनसेट डिमेंशिया के मरीज निदान के बाद औसतन लगभग 9 साल तक जीवित रहते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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