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Facet Joint Syndrome: गर्दन-पीठ के दर्द ने जीना कर दिया है मुश्किल? कहीं ये फेसेट जॉइंट सिंड्रोम तो नहीं

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Fri, 13 Mar 2026 05:45 PM IST
सार

कई लोगों को गर्दन घुमाने या झुकाने में कठिनाई होती है और गर्दन में जकड़न महसूस होती है। अगर यह समस्या कमर के हिस्से में हो तो कमर में भारीपन और चलने-फिरने में दर्द बढ़ सकता है। कहीं आपको फेसेट जॉइंट सिंड्रोम की समस्या तो नहीं है?

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युवाओं में बढ़ती ,फेसेट जॉइंट सिंड्रोम की समस्या - फोटो : Adobe Stock

लाइफस्टाइल की गड़बड़ी मौजूदा समय की आधे से ज्यादा स्वास्थ्य समस्याओं का प्रमुख कारण है। लोगों में जिस तरह से शारीरिक निष्क्रिता बढ़ती जा रही है, इस वजह से कंधे-कमर, पीठ और जोड़ों में दर्द की समस्या भी बढ़ती जा रही है। क्या आप भी लंबे समय से गर्दन या पीठ के दर्द से परेशान हैं? कहीं आपको फेसेट जॉइंट सिंड्रोम की दिक्कत तो नहीं हो गई है।



अध्ययनों से पता चलता है कि कमर या गर्दन में लंबे समय में बने रहने वाले दर्द के करीब 40% मामलों के लिए फेसेट जॉइंट सिंड्रोम की वजह से होते हैं। जोड़ों की कार्टिलेज घिसने और उनमें सूजन पैदा होने की वजह से ये समस्या होती है, जिससे दर्द और जकड़न महसूस होती है। कई बार यह दर्द आसपास की नसों को भी प्रभावित कर सकता है।

अगर आप भी इस तरह की दर्द से परेशान हैं तो फेसेट जॉइंट सिंड्रोम के बारे में जरूर जान लीजिए।

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फेसेट जॉइंट सिंड्रोम के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com

ये समस्या होती क्या है?

फेसेट जॉइंट सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें रीढ़ की हड्डी के फेसेट जॉइंट दर्द का कारण बनते हैं। रीढ़ की हड्डी के पीछे मौजूद छोटे-छोटे जोड़ों को फेसेट जॉइंट कहा जाता है। जब इनमें सूजन, घिसाव होता है तो आपको दर्द की समस्या महसूस होने लगती है। 
 

  • रीढ़ की हड्डी में हर कशेरुका के बीच दो-दो फेसेट जॉइंट होते हैं, जो शरीर को झुकने, मुड़ने और घूमने में मदद करते हैं। 
  • उम्र बढ़ने के कारण, किसी चोट या अधिक दबाव की वजह से जब इन जोड़ों में समस्या आती है तो इसे फेसेट जॉइंट सिंड्रोम कहा जाता है।
  • फेसेट जॉइंट सिंड्रोम के कारण कई बार इतना दर्द हो सकता है कि आपका सामान्य कामकाज तक प्रभावित हो सकता है।
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कंधे का दर्द - फोटो : Adobe Stock

फेसेट जॉइंट सिंड्रोम क्यों होता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि फेसेट जॉइंट सिंड्रोम कई वजहों से हो सकता है। ये दिक्कत सबसे ज्यादा उम्र बढ़ने के साथ होता है। 
 

  • उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों में घिसाव होने लगता है। जोड़ों में मौजूद कार्टिलेज कमजोर होने लगता है, जिससे आपस में रगड़ बढ़ती है दर्द शुरू हो सकता है।
  • गलत पॉश्चर भी इस बढ़ती समस्या का कारण है, जिससे कम उम्र के लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं।
  • लंबे समय तक मोबाइल चलाना या लगातार बैठकर काम करने से स्पाइन पर दबाव बढ़ जाता है। इससे फेसेट जॉइंट में सूजन और दर्द हो सकती है।
  • कुछ मामलों में स्पाइन में चोट लगना, भारी वजन उठाना, मोटापा और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण भी दिक्कत बढ़ सकती है।
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कमर-कंधे में दर्द होने की समस्या - फोटो : Freepik.com

कहीं आप भी तो नहीं हो गए हैं इसका शिकार?

कहीं आपके गर्दन-कमर में होने वाला दर्द भी फेसेट जॉइंट सिंड्रोम तो नहीं है, इसके लक्षणों पर ध्यान देना जरूरी है।
 

  • आमतौर पर गर्दन या कमर में लगातार दर्द होना इसका संकेत है।
  • यह दर्द अक्सर सुबह उठते समय या लंबे समय तक बैठने के बाद ज्यादा महसूस होता है।
  • गर्दन घुमाने या झुकाने में कठिनाई हो सकती है और गर्दन में जकड़न महसूस होती है। 
  • कमर के हिस्से में दिक्कत होने पर चलने-फिरने में भी समस्या हो सकती है।
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मोटापा के शिकार लोगों में दर्द की समस्या - फोटो : Adobe stock photos

इससे बचने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप कुछ जोखिमों को लेकर सावधानी बरतकर फेसेट जॉइंट सिंड्रोम से बचाव कर सकते हैं।
 

  • जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं उनमें  यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
  • लगातार गलत पॉश्चर में बैठने या झुककर काम करने से रीढ़ के जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
  • इसके अलावा भारी वजन उठाने, जिम में गलत तरीके से एक्सरसाइज करने वाले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। 
  • मोटापा भी फेसेट जॉइंट सिंड्रोम को बढ़ाने वाली दिक्कत है। ज्यादा वजन होने से रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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