सब्सक्राइब करें

Lancet Study: 2050 तक लाखों भारतीय हो सकते हैं गंभीर बीमारियों का शिकार, लैंसेट अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Sun, 22 Mar 2026 07:55 PM IST
सार

शोधकर्ताओं ने चेताया है कि साल 2050 तक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम और बढ़ सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जिस तरह से लगातार तापमान बढ़ता जा रहा है, इसका लोगों की सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है।

विज्ञापन
climate change could lead to more deaths worldwide increasing physically inactive may be the causes
सेहत को लेकर अलर्ट - फोटो : Amarujala.com

दुनियाभर में कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं काफी आम हो गई हैं। कम उम्र के लोग भी इनका शिकार होते जा रहे हैं। जब इसके कारणों की बात होती है तो सबसे पहले खान-पान में गड़बड़ी और शारीरिक निष्क्रियता को प्रमुख माना जाता है। विशेषज्ञों ने एक हालिया रिपोर्ट में चिंता जताई है कि आने वाले वर्षों में क्रॉनिक बीमारियों का खतरा और भी बढ़ सकता है। 



'द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ' जर्नल में प्रकाशित एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने चेताया है कि साल 2050 तक लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम और बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर जिस तरह से लगातार तापमान बढ़ता जा रहा है, इसका लोगों की सेहत पर कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है।

बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन की वजह से लोगों में गंभीर रोगों के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। आइए जान लेते हैं कि अध्ययन में क्या बातें सामने आई हैं?

Trending Videos
climate change could lead to more deaths worldwide increasing physically inactive may be the causes
क्रॉनिक बीमारियों का बढ़ता जोखिम - फोटो : Adobe Stock

2050 तक करोड़ों लोगों में बढ़ सकती हैं क्रॉनिक बीमारियां

द लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार तापमान बढ़ने के कारण साल 2050 तक करोड़ों लोगों में शारीरिक निष्क्रियता का खतरा बढ़ सकता है।  ये स्थिति भारत जैसे गर्म देशों के लिए और भी खतरनाक साबित हो सकती है। यहां गर्मी का असर ग्लोबल एवरेज से कहीं अधिक होने का अनुमान है।
 

  • लोग गर्मी के डर से बाहर निकलना, टहलना या एक्सरसाइज करना कम कर देते हैं, जिससे उनकी शारीरिक निष्क्रियता बढ़ती जाती है। 
  • ये सीधे तौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है।
  • जैसे-जैसे लोगों की शारीरिक गतिविधियों में कमी आती जाएगी, क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ता जाएगा।
  • साल 2050 तक ये समस्या और भी बढ़ने का खतरा जताया गया है जिसको लेकर लोगों को सावधान किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
climate change could lead to more deaths worldwide increasing physically inactive may be the causes
सेडेंटरी लाइफस्टाइल और बीमारियों का जोखिम - फोटो : Adobe Stock

शारीरिक गतिविधियों में कमी और बीमारियों का खतरा

शारीरिक निष्क्रियता पहले से ही एक बड़ी वैश्विक स्वास्थ्य समस्या है। लगभग हर तीन में से एक वयस्क, हर हफ्ते व्यायाम करने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों का पालन नहीं कर पाता है। शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर के साथ मानसिक स्वास्थ्य विकारों का खतरा भी बढ़ जाता है। ये सभी बीमारियां जीवन प्रत्याशा को कम करती हैं।
 

  • बढ़ता तापमान लोगों को शारीरिक निष्क्रिय बनाकर बीमारियों का शिकार तो बना ही रहा है, इसका आर्थिक रूप से भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है।
  • इससे लाखों लोगों की समय से पहले मौतें होंगी और उत्पादकता में अरबों डॉलर का नुकसान होने की भी आशंका जताई गई है।



(ये भी पढ़िए- विज्ञान का चमत्कार: वैज्ञानिकों ने लैब में बनाई कृत्रिम ग्रासनली, जन्मजात रोग वाले बच्चों के लिए जगी उम्मीद)

climate change could lead to more deaths worldwide increasing physically inactive may be the causes
बढ़ते तापमान का सेहत पर असर - फोटो : Adobe Stock

अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने साल 2000 से 2022 के बीच 156 देशों के डेटा का विश्लेषण किया। इसमें समझने की कोशिश की गई कि बढ़ते तापमान का 2050 तक वैश्विक स्तर पर शारीरिक गतिविधि पर क्या असर पड़ सकता है?
 

  • इसमें पाया गया कि 2050 तक हर वह महीना जिसका औसत तापमान 27.8 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होगा, दुनिया भर में शारीरिक निष्क्रियता को 1.5 प्रतिशत तक बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • 2050 तक, इस बढ़ोतरी का मतलब करीब 7 लाख अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं।
  • बढ़ते तापमान से शारीरिक निष्क्रियता के बढ़ने का अनुमान है, जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता में भी नुकसान बड़े पैमाने पर देखा जाएगा।
विज्ञापन
climate change could lead to more deaths worldwide increasing physically inactive may be the causes
शारीरिक गतिविधि बढ़ाना जरूरी - फोटो : adobe stock images

बीमारियों से बचे रहने के लिए हो जाएं अलर्ट

भारत में 2050 तक शारीरिक निष्क्रियता के कारण मृत्यु दर 1,00,000 की आबादी पर 10.62 मौतों तक पहुंचने की आशंका है।
 

  • 2050 तक भारत में फिजिकल एनेक्टिविटी में करीब 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है।
  • लोग गर्मी के डर से बाहर निकलना, टहलना या एक्सरसाइज करना कम कर देंगे जो सीधे तौर पर लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियों का जोखिम बढ़ाने वाला हो सकता है।


विशेषज्ञों ने कहा, हमें बीमारियों से बचे रहने के लिए शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने पर ध्यान देना होगा। गर्मी के दिनों में सुबह-शाम व्यायाम के लिए समय निकालें, रनिंग-वॉकिग जैसी गतिविधियों को दिनचर्या में शामिल करें ताकि क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।


--------------
 स्रोत:
Effects of climate change on physical inactivity: a panel data study across 156 countries from 2000 to 2022


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed