हृदय रोगों के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। अब ये सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रही है, कम उम्र के लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। हाल के वर्षों में आपने भी हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट से युवाओं की मौत की कई खबरें देखी-सुनी होगी।
Heart Attack: ज्यादातर हार्ट अटैक के लिए यही पांच कारण होते हैं जिम्मेदार, आपको भी तो नहीं हैं ऐसी दिक्कतें?
- हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ लाइफस्टाइल ने हृदय स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाई है। हार्ट अटैक के ज्यादातर मामलों के लिए छह प्रमुख कारणों को जिम्मेदार माना जाता रहा है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
हृदय रोगों का बढ़ता खतरा
हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ लाइफस्टाइल ने हृदय स्वास्थ्य को सबसे ज्यादा क्षति पहुंचाई है। हार्ट अटैक के ज्यादातर मामलों के लिए पांच प्रमुख कारणों को जिम्मेदार माना जाता रहा है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता होती है।
आमतौर पर ये छिपे हुए जोखिम केवल तब दिखाई देते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है, जिससे किसी के लिए भी इसका पता लगाना और रोकथाम करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
आइए हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार स्थितियों और इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानते हैं।
असंतुलित जीवनशैली और खराब खान-पान
- शोध बताते हैं कि लगातार असंतुलित आहार लेने से खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर बढ़ जाता है, जिससे धमनियों में प्लाक जमने की समस्या होती है। यह स्थिति हार्ट अटैक या स्ट्रोक का खतरा कई गुना बढ़ा देती है। अगर आपका खानपान भी ठीक नहीं है तो सावधान हो जाइए, इससे हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है।
हाई ब्लड प्रेशर की समस्या
- जब धमनियों पर लगातार रक्त का दबाव पड़ता है, तो उनकी दीवारें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे हृदय पर भी दबाव बढ़ता है जिससे हार्ट अटैक होने का खतरा बढ़ जाता है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उन लोगों में हार्ट अटैक होने का खतरा अधिक होता है।
धूम्रपान और शराब
- सिगरेट, शराब और तंबाकू उत्पादों का सेवन हृदय की सेहत के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। धूम्रपान से रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा घटती है और कार्बन मोनोऑक्साइड हृदय की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाती है। वहीं, शराब का अत्यधिक सेवन ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि धूम्रपान करने वालों में हार्ट अटैक का जोखिम 2 से 4 गुना अधिक होता है।
शारीरिक निष्क्रियता और मोटापा
- युवाओं में सेडेंटरी लाइफस्टाइल, व्यायाम की कमी से ब्लड सर्कुलेशन, मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर बुरा असर पड़ता है। इससे मोटापा, हाई बीपी और डायबिटीज जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं, जो हार्ट अटैक के बड़े कारण हैं। जिन लोगों का बीएमआई 30 से अधिक होता है, उनमें हृदय रोग का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 70% ज्यादा होता है।
तनाव और नींद की कमी
- तनाव और नींद की समस्याएं आज के युवाओं में काफी आम हैं। लगातार तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर और हृदय गति पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। वहीं, नींद की कमी से शरीर का ब्लड शुगर और लिपिड प्रोफाइल असंतुलित हो जाता है। जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, जो लोग रोजाना 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें हृदय रोग का खतरा 20-25% अधिक पाया गया।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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