शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए हम क्या-क्या नहीं करते? जिम जाने से लेकर डाइटिंग और महंगे सप्लीमेंट्स लेने तक हम सभी कई उपाय करते रहते है। हालांकि हम सभी एक ऐसी चीज को नजरअंदाज कर देते हैं जो जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पल तक बिना रुके हमारा साथ निभाती हैं।
Health Tips: सांसों का खेल समझ गए तो दूर हो सकती है आपकी आधी परेशानी, ब्रेन से लेकर नर्वस सिस्टम तक को लाभ
जब हम अपनी सांसों को धीमा, गहरा और लयबद्ध बनाते हैं, तब शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम अधिक सक्रिय होता है। इसका असर यह होता है कि तनाव कम महसूस होता है, दिल की धड़कन सामान्य रहती है और शरीर रिलैक्स मोड में आने लगता है।
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नियंत्रित और गहरी सांस के फायदे
कई अध्ययनों में पाया गया है कि नियंत्रित और गहरी सांस लेने वाले व्यायाम शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाने, तनाव के स्तर को कम करने, हृदय की कार्यक्षमता सुधारने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मददगार हैं।
यही नहीं, नियमित श्वास अभ्यास से नींद की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, एकाग्रता बढ़ सकती है और शरीर की रिकवरी क्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
- विशेषज्ञ कहते हैं, कभी-कभी मशक्कत वाला कोई काम करते वक्त हम गहरी सांस लेते हैं और फिर नई ऊर्जा से जुट जाते हैं। गहरी सांस लेने और धीरे-धीरे छोड़ने की प्रक्रिया न सिर्फ तनाव घटाती है बल्कि नए जोश से भर देती है।
- इसी को लेकर जर्नल न्यूरॉन में छपी रिसर्च के मुताबिक, अगर सांसों पर नियंत्रण को आदत बना लिया जाए तो जिंदगी में जोखिम भरे फैसले लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं होगी।
पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम होता है एक्टिव
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जब थोड़ी देर सांस रोककर धीरे-धीरे छोड़ते हैं तो पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम यानी शरीर का आराम देने वाला तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो जाता है।
- ब्रेन स्कैन से पता चला कि इस दौरान दिल और फेफड़ों ने दिमाग को शांत करने वाले संकेत पहुंचने लगते हैं।
- वैज्ञानिकों का मानना है कि सांस को साधकर तनाव, चिंता, पैनिक डिसऑर्डर और खान-पान की आदतें सुधारी जा सकती हैं।
शरीर और मन दोनों रहते हैं स्वस्थ
एक अध्ययन में पाया गया कि गहरी सांसें लेना या यूं कहें कि अचानक ठंडी आहें भरने से आपके शरीर में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होती है। उस वक्त आपके शरीर का रीसेट बटन चालू हो जाता है।
किसी शारीरिक गतिविधि या भावनात्मक स्थिति में अचानक बदलाव के अनुकूल शरीर तैयार होने लगता है। अध्ययन में एक टीम को स्क्रीन पर कंट्रास्ट बदलने वाले पैटर्न क्लिक करने का काम देकर उनके ध्यान और सांसों के डाटा को टैक किया गया। जबकि दूसरी टीम ने 21 मिनट तक धुनों के साथ लयबद्ध क्लिक करने का कार्य किया। इस दौरान बदलाव मापा गया।
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स्रोत:
Networks within networks: The neuronal control of breathing
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