लिवर में संक्रमण और इसके कारण होने वाली दिक्कतों से हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। हेपेटाइटिस को इसका सबसे बड़ा कारण माना जाता है। भारत में भी हेपेटाइटिस का लगातार खतरा देखा जा रहा है, जिससे बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते रहे हैं।
Hepatitis Day: 2030 तक कम हो जाएगा लिवर डैमेज करने वाले इंफेक्शन का खतरा? यहां जानिए चुनौतियां
भारत हेपेटाइटिस से निपटने के लिए अपने प्रयासों को व्यवस्थित रूप से मजबूत कर रहा है। 'नेशनल वायरल हेपेटाइटिस कंट्रोल प्रोग्राम' का लक्ष्य 2030 तक इस बीमारी को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा न रहने देना है।
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हेपेटाइटिस रोग और इसके गंभीर प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। इस दिन को नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक डॉ. बारूक ब्लमबर्ग के जन्मदिन की याद में भी मनाया जाता है, जिन्होंने हेपेटाइटिस बी वायरस की खोज की थी।
हेपेटाइटिस और इसके जोखिम
भारत हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारी को खत्म करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है। सरकार का राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस के मामलों को कंट्रोल करके उन बीमारियों की श्रेणी से बाहर करना चाहता है, जो पूरे देश के लिए बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनी हुई है।
इसके लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ इस कार्यक्रम को कई राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं से जोड़ा गया है, ताकि संक्रमण को रोका जा सके और मरीजों को मुफ्त जांच व इलाज मिल सके।
लिवर की लिए दिक्कतें बढ़ा सकती है ये बीमारी
हेपेटाइटिस लिवर में सूजन का कारण बनता है। हालांकि लिवर में सूजन कई कारणों से हो सकती है। वैसे तो सबसे आम कारण हेपेटाइटिस वायरस होते हैं। कुछ अन्य संक्रमण, अधिक शराब पीना, दवाओं का दुष्प्रभाव और ऑटोइम्यून बीमारियां भी इसका कारण बन सकती हैं।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि हेपेटाइटिस पांच प्रकार के होते हैं। इनमें हेपेटाइटिस बी और सी को सबसे ज्यादा गंभीर माना जाता हैं। ये लंबे समय तक शरीर में बने रह सकते हैं और क्रॉनिक लिवर डिजीज का कारण बनते हैं। आगे चलकर इससे सिरोसिस (लिवर का धीरे-धीरे खराब होकर कठोर हो जाना) और लिवर कैंसर जैसी जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।
2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के खतरे के रूप में खत्म करने के लक्ष्य
भारत सरकार ने साल 2018 में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम शुरू किया। इसका उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप देशभर में हेपेटाइटिस की जांच, इलाज और रोकथाम की सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
- इसने पूरे देश में हेपेटाइटिस बी और सी की मुफ्त जांच और इलाज की सुविधा दी है।
- स्थानीय फंडिंग, सस्ती जेनेरिक दवाओं और मौजूदा स्वास्थ्य कार्यक्रमों के स्मार्ट इस्तेमाल से इस देखभाल का दायरा बढ़ाने में मदद मिली है।
- अब ये सेवाएं जिला अस्पतालों से स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच रही हैं, जिससे जांच और इलाज हर किसी के लिए आसान हो गया है।
- यह कदम इस बात को दिखाता है कि सरकार हर नागरिक तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने और वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य के बड़े खतरे के रूप में खत्म करने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रही है।
हेपेटाइटिस रोकथाम और उन्मूलन में क्या चुनौतियां आ रही हैं?
भारत ने राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के माध्यम से जांच, इलाज और जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन वर्ष 2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के लक्ष्य के सामने कई बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।
- सबसे बड़ी चुनौती अब भी निदान में देरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में हेपेटाइटिस बी और सी से संक्रमित बड़ी संख्या में लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे संक्रमित हैं। भारत में भी कई मरीजों का पता तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
- दूसरी बड़ी समस्या जागरूकता की कमी है। कई लोगों को हेपेटाइटिस के संक्रमण के तरीके, शुरुआती लक्षण और समय पर जांच कराने की आवश्यकता के बारे में जानकारी नहीं होती। चूंकि शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए लोग जांच कराने से बचते हैं और संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है।
- हेपेटाइटिस बी का वायरस गर्भावस्था या जन्म के समय बच्चे तक पहुंच सकता है। इसे रोकने के लिए जन्म के 24 घंटे के भीतर हेपेटाइटिस-बी का टीका लगाना जरूरी माना जाता है। हालांकि देश में टीकाकरण का दायरा बढ़ा है, लेकिन हर नवजात तक समय पर यह सुविधा पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है।
- सरकार जिला अस्पतालों से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाओं का विस्तार कर रही है, फिर भी कई इलाकों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों, जांच सुविधाओं और नियमित दवा उपलब्धता को मजबूत करने की जरूरत बनी हुई है।
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स्रोत:
India steps up efforts to eliminate hepatitis as a public health threat by 2030
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