Heart Ke liye Yogasan: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधि की कमी का असर सबसे पहले हमारे हृदय पर पड़ता है। कम उम्र में भी उच्च रक्तचाप, मोटापा और हृदय संबंधी समस्याएं पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही हैं। ऐसे में केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और योग जैसी स्वस्थ आदतें अपनाना भी महत्वपूर्ण है। योग केवल शरीर को लचीला बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिक तनाव कम करने, सांस लेने की क्षमता सुधारने और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है।
Heart Health Yoga: दिल को स्वस्थ रखना है? रोज़ करें ये 7 योगासन, हार्ट रहेगा मजबूत और एक्टिव
Best Yoga For Healthy Heart: नियमित योग और प्राणायाम तनाव कम करने, लचीलापन बढ़ाने और समग्र हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। ताड़ासन, वृक्षासन, भुजंगासन, सेतु बंधासन और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास स्वस्थ जीवनशैली के साथ मिलकर दिल की सेहत के लिए लाभदायक माने जाते हैं। यदि आपको हृदय रोग है, तो योग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना उचित है।
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ताड़ासन
ताड़ासन शरीर के संतुलन और सही मुद्रा (पोश्चर) को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह गहरी और नियंत्रित श्वास लेने की आदत विकसित करने में भी सहायक हो सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर में स्थिरता और मानसिक शांति का अनुभव होता है।
कैसे करें
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सीधे खड़े होकर दोनों पैरों को पास रखें।
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हाथों को ऊपर उठाकर पूरे शरीर को हल्का खींचें।
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सामान्य या गहरी सांस लेते हुए 20–30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
वृक्षासन
वृक्षासन संतुलन, एकाग्रता और मानसिक स्थिरता बढ़ाने वाला योगासन है। तनाव कम करने में इसकी भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से हृदय स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हो सकती है।
फायदे
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शरीर का संतुलन बेहतर होता है।
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मन शांत रहता है।
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एकाग्रता बढ़ती है।
भुजंगासन
- भुजंगासन छाती को खोलने और रीढ़ की लचक बढ़ाने में मदद करता है।
- इससे श्वास लेने में सहजता महसूस हो सकती है।
- लंबे समय तक बैठे रहने से होने वाली जकड़न कम हो सकती है।
- ध्यान दें यदि कमर, गर्दन या रीढ़ से जुड़ी समस्या हो तो यह आसन विशेषज्ञ की देखरेख में करें।
सेतु बंधासन
- सेतु बंधासन छाती और कंधों को फैलाने वाला आसन है।
- यह शरीर को आराम देने और तनाव कम करने वाले अभ्यासों में शामिल किया जाता है।
- नियमित अभ्यास से लचीलापन बढ़ सकता है।
- सावधानी: गर्दन या पीठ की गंभीर समस्या होने पर इसे बिना सलाह के न करें।