हम दिनभर अच्छे तरीके से काम कर पाते हैं, सही समय पर सही निर्णय लेते हैं, चीजों का याद रख पाते हैं, ये हमारे हेल्दी ब्रेन की वजह से ही हो पाता है। मस्तिष्क को पूरे शरीर का मास्टरमाइंड माना जाता है। यही बताता है कि हमें कब क्या करना है और क्या नहीं?
Brain Health: ब्रेन को रखना है फिट तो इन चार दुश्मनों से बचिए, ब्रेन फॉग से लेकर डिमेंशिया तक से होगा बचाव
आधुनिक जीवनशैली ने दिमाग पर ऐसा दबाव बढ़ा दिया है कि कम उम्र में भी लोग भूलने की समस्या, ध्यान केंद्रित न कर पाने, ब्रेन फॉग, मानसिक थकान और कॉग्निटिव फंक्शन में कमी जैसी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मस्तिष्क से संबंधित समस्याओं का खतरा
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में अल्जाइमर-डिमेंशिया और कई अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का जोखिम बढ़ गया है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि अच्छी बात यह है कि मस्तिष्क का स्वास्थ्य काफी हद तक हमारी रोजमर्रा की आदतों पर निर्भर करता है। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मानसिक सक्रियता और तनाव प्रबंधन से ब्रेन लंबे समय तक स्वस्थ रह सकता है।
- ब्रेन को स्वस्थ रखने के लिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने, तनाव, फास्ट फूड की आदत कम करने के साथ धूम्रपान-शराब और प्रदूषण से भी बचना जरूरी है। कुछ आदतों को हम बहुत सामान्य मानते हैं पर असल में ये हमारे ब्रेन के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकती हैं।
नींद पूरी न होना
नींद के दौरान मस्तिष्क दिनभर की जानकारियों और यादों को व्यवस्थित करता है। इसके अलावा कोशिकाओं में जमा अपशिष्ट पदार्थों को साफ करने की प्रक्रिया भी इस दौरान होती है।
- हालांकि अगर आपकी रोज रात में नींद पूरी नहीं होती उनमें ब्रेन से संबंधित दिक्कतों का खतरा बढ़ जाता है।
- लगातार कम नींद लेने से ध्यान, एकाग्रता, निर्णय क्षमता और याददाश्त प्रभावित हो सकती है।
- इससे मूड डिसऑर्डर, अवसाद और कुछ न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
अक्सर तनाव में रहना ठीक नहीं
- तनाव शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन के स्तर को बढ़ा देता है। लगातार हाई कोर्टिसोल मस्तिष्क के उन हिस्सों पर असर डाल सकता है जो याददाश्त, सीखने और भावनात्मक नियंत्रण से जुड़े होते हैं। तनाव के कारण नींद खराब हो सकती है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है। इससे दिमाग पर अतिरिक्त असर पड़ता है। लगातार स्ट्रेस लेने वालों में डिप्रेशन होने का खतरा भी अधिक होता है।
शारीरिक मेहनत में कमी से खतरा
- नियमित शारीरिक गतिविधि मस्तिष्क तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति को बेहतर बनाने में मदद करती है। व्यायाम की आदत सीखने और याददाश्त को ठीक रखने में मददगार मानी जाती है। अगर आप लंबे समय तक बैठे रहते हैं और व्यायाम नहीं करते तो इससे मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है। ये सब भी ब्रेन हेल्थ को प्रभावित करते हैं।
खानपान में गड़बड़ी
- ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए खानपान को ठीक रखना बहुत जरूरी है। अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड, ट्रांस फैट, ज्यादा चीनी और नमक वाला भोजन शरीर में सूजन, मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध और हृदय संबंधी जोखिम बढ़ा सकता है।
ये स्थितियां मस्तिष्क तक रक्त प्रवाह पर भी असर डाल सकती हैं। ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए विशेषज्ञ फल-सब्जियां, साबुत अनाज और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर आहार लेने की सलाह देते हैं।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।