देश में कोरोना संक्रमण के मामले अब काफी हद तक कम हो गए हैं। बुधवार को भी एक लाख से कम संक्रमण के मामले सामने आए थे। इस महामारी के खिलाफ टीकाकरण अभियान वैसे भी तेजी से चल रहा है, लेकिन इसमें और तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार प्रयास कर रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक देश में 24 करोड़ 27 लाख से अधिक टीके लगाए जा चुके हैं। बीते 24 घंटे में 33 लाख 79 हजार से अधिक टीका लगाए गए हैं। इन सबके बीच सबसे जरूरी है मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बनाए रखें, क्योंकि इस कोरोना काल में काफी सारे लोग मानसिक रूप से परेशान हुए हैं, यहां तक कि लोगों को नींद से जुड़ी समस्याएं भी हुई हैं। ऐसे में यह जान लेना आवश्यक है कि लोगों को कितने घंटे सोना जरूरी है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब...
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विशेषज्ञ से जानें: लोगों को कितने घंटे सोना जरूरी है? शाम में बिल्कुल न करें ये काम
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सोनू शर्मा
Updated Thu, 10 Jun 2021 09:55 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय
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लोगों को कितने घंटे सोना जरूरी है?
- दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (आईएचबीएएस) के निदेशक डॉ. निमेश देसाई कहते हैं, 'सामान्य लोगों को 6-8 घंटे तक नींद लेनी चाहिए। अगर किसी को टेंशन या चिंता है तो भी 5-6 घंटे की नींद होनी ही चाहिए। शाम के 5-6 बजे के बाद कोई कैफीन वाली चीजें जैसे- चाय-कॉफी, कोल्ड ड्रिंक आदि न लें। खाने के कम से कम एक घंटे बाद सोने जाएं या उतने देर तक का गैप रखें। सोने से पहले उत्तेजक मैसेज या न्यूज न देखें। ऐसा इसलिए, अगर उसे देखने या पढ़ने के बाद तुरंत सो जाते हैं तो वही सोते वक्त भी दिमाग में रह जाता है। आप न्यूज देखें, लेकिन एक डिसिप्लिन में। अगर किसी को नींद नहीं आती है, तो बिना किसी डॉक्टर की सलाह के खुद से नींद की दवा न लें।'
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जो लोग मानसिक रूप से परेशान हैं, उन्हें क्या सलाह है?
- डॉ. निमेश देसाई कहते हैं, 'मानसिक तनाव या बीमारी को पहचानना जरूरी है, लेकिन इसे एक गंभीर बीमारी न मानें। अगर तनाव लग रहा है या आसपास कोई इस तरह की समस्या से परेशान है, तो डॉक्टर या मानसिक चिकित्सक से संपर्क करें। जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति को दवा ही लेनी पड़े, कई बार काउंसिलिंग से ही समस्या खत्म हो जाती है। सबसे जरूरी बात उम्मीद रखें, सब कुछ ठीक होगा।'
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कोरोना काल में मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बनाए रखें?
- डॉ. निमेश देसाई कहते हैं, 'कोरोना पहली लहर में हमसे काफी दूर था, क्योंकि तब जो लोग बाहर से आने वाले थे, उनमें ही संक्रमण ज्यादा पाया गया। लेकिन दूसरी लहर में कोरोना काफी पास आ गया। देश में ऐसा कोई घर नहीं होगा, जिनके रिश्तेदार या घर में किसी को कोरोना न हुआ हो। इससे जाहिर है कि कई लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ा। लेकिन फिर भी लोगों को समझना होगा कि हम अपने मानसिक स्वास्थ्य से ही कोरोना को हरा सकते हैं। दूसरी लहर खत्म हो रही है, ऐसे में हमें इस तरह का व्यवहार करना है कि आने वाली लहर से बचा जा सके। इसके लिए अपनी जीवनशैली और व्यवहार पर ध्यान देना होगा और खाने-पीने का भी विशेष ध्यान रखें।'
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कई लोगों को मास्क और वैक्सीन लगाने में भी समस्या आ रही है, इसे कैसे देखते हैं?
- डॉ. निमेश देसाई कहते हैं, 'किसी भी समाज में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनकी प्रवृति ही हर चीज का विरोध करने की होती है। वो लोग समय-समय पर किसी न किसी चीज का विरोध करते रहते हैं। दूसरा, कई बार गलत जानकारी दी जाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी से सुन कर लोग भ्रम पाल लेते हैं। जहां तक वैक्सीन की बात है, मानव जाति के लाभ के लिए वैज्ञानिक खोज कर रहे हैं और दवा या वैक्सीन बना रहे हैं। विज्ञान में हर दिन शोध हो रहा है, इसलिए परिवर्तन होता रहेगा और जैसे-जैसे नई जानकारी आएगी, लोगों को उसे बताया जाएगा। लेकिन ये कहना कि कल तो ये बताया था, आज ये। इसे समझें कि 2020 का विज्ञान कुछ और कह रहा था और 2021 का विज्ञान और बेहतर बताएगा।'

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