डॉक्टर से जानें दिल्ली की प्रदूषित हवा किस स्तर तक बन रही है आपके लिए खतरनाक
वाहनों से निकला धुंआ, पराली जलाना और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल इसके मुख्य कारण हैं। सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा नीचे की ओर बहती है, जिससे पार्टीकुलेट मैटर और धूल सांस के साथ हमारे शरीर में जाने लगती है। हमें नीचे गैसें- (CO2, CO, SO2 and NO2) प्रदूषकों के बारे में जागरूक होना चाहिए।
सरकारी एजेन्सियां हवा में पार्टीकुलेट मैटर को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय अपनाती हैं। यह पार्टीकुलेट मैटर रसायनों, ईंधन, खेती के दौरान पराली जलाने, सड़क निर्माण एवं अन्य निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होता है। लम्बी दौड़ में यह सांस और दिल की बीमारियों, आंखों, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, मतली और फेफड़ों एवं दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में हर नौ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण है, इस तरह कुल सात मिलियन समयपूर्व मौतें प्रदूषण के कारण होती हैं। जिनमें 600,000 बच्चे भी शामिल हैं।
2.5 माइक्रोन साइज़ के पार्टीकुलेट मैटर सबसे ज़्यादा खतरनाक हैं, जो सिर्फ इलेक्ट्राॅन माइक्रोस्कोप से ही देखे जा सकते हैं और ये फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। मनुष्य के शरीर का प्राकृतिक फिल्टर इन कणों को शरीर के भीतर जाने से नहीं रोक सकता। वहीं दूसरी ओर बड़े आकार के पार्टीकुलेट मैटर लम्बी अवधि में मनुष्य के लिए घातक साबित होते हैं।