Hands Only CPR Benefits: आज की भागदौड़ जिंदगी में ऑफिस में काम करते हुए, जिम में एक्सरसाइज करते या स्टेज पर डांस करते समय अचानक आने वाले हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी आपातकालीन स्थितियों में 'सीपीआर' सबसे प्रभावी जीवन रक्षक प्रक्रिया साबित हो सकता है, लेकिन विषेशज्ञों के मुताबिक सीपीआर देने से पहले कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है।
CPR Tips: कार्डियक अरेस्ट के दौरान जान बचाने के लिए सीपीआर देने से पहले जरूर बरतें ये सावधानियां
CPR Safety Precautions: हृदय गति रुकने की स्थिति में तुरंत CPR देना मरीज के लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है। मगर CPR देने से पहले कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी होता है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
सुरक्षित स्थान का चुनाव
सीपीआर शुरू करने से पहले खुद को और मरीज को किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। जैसे - अगर कोई बीच सड़क पर बेहोश हुआ है, तो उसे तुरंत किनारे करें ताकि ट्रैफिक से कोई खतरा न हो। मरीज को किसी कठोर और समतल सतह पर लिटाएं। इसके बाद मरीज के कंधे थपथपाकर और जोर से बोलकर उनकी प्रतिक्रिया जांचें। अगर कोई जवाब न मिले, तो बिना समय गंवाए अगली प्रक्रिया शुरू करें।
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मदद मांगे
अकेले सीपीआर देना थका देने वाला काम है, इसलिए तुरंत आसपास के लोगों से मदद मांगें। यहां 'क्लोज लूप कम्युनिकेशन' का उपयोग करें, जिसका अर्थ है किसी एक व्यक्ति को सीधे इंगित करना (जैसे- "नीली शर्ट वाले भाई साहब, आप एम्बुलेंस को फोन करें")। इससे जिम्मेदारी स्पष्ट होती है और भीड़ में भ्रम की स्थिति पैदा नहीं होती। उस व्यक्ति को एम्बुलेंस बुलाने और आपके थकने पर हाथ बटाने के लिए तैयार करें।
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प्रभावी सीपीआर के लिए छाती को एक निश्चित गहराई और गति से दबाना पड़ता है, जिससे बचावकर्ता 2-3 मिनट में थक सकता है। थकान होने पर कंप्रेशन की गुणवत्ता कम हो जाती है, जो मरीज के लिए ठीक नहीं है। जैसे ही आप थकावट महसूस करें, तुरंत दूसरे व्यक्ति को कार्य सौंप दें। निरंतरता बनाए रखने के लिए यह बदलाव बहुत तेजी से (5-10 सेकंड के भीतर) होना चाहिए।
डॉक्टर का विशेष सुझाव
डॉक्टर सुरभि ने बताया कि अगर आप सीपीआर देते समय सीधे सांस देने में असहज हैं (जैसे- मरीज के मुंह पर खून या उल्टी लगी हो ) तो आप मरीज के मुंह पर एक पतला और साफ कपड़ा रखकर सांस दे सकते हैं। अगर कपड़ा भी उपलब्ध न हो, तो केवल 'हैंड्स-ओनली सीपीआर' (सिर्फ छाती दबाना) जारी रखें। यह भी उतना ही प्रभावी है और मरीज के बचने की संभावना को बढ़ा देता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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