हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। हाल के दिनों में आपने भी कई मामलों में ऑफिस का काम करते समय, पढ़ाई करते हुए, स्टेज पर डांस के दौरान हार्ट अटैक और इससे मौत की खबरें सुनी-देखी होंगी। 20 से भी कम उम्र में लोगों की दिल से संबंधित समस्याओं के कारण अचानक मौत हो जा रही है, जो काफी चिंताजनक स्थिति है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को निरंतर हृदय की सेहत का ध्यान देते रहने और आपात स्थिति में जान बचाने वाले तरीकों के बारे में जानने की सलाह देते हैं।
CPR: कब पड़ती है सीपीआर की जरूरत, क्या है इसे देने का सही तरीका? डॉक्टर ने दी सारी जानकारी
सीपीआर, हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी इमरजेंसी वाली स्थितियों में रोगी की जान बचाने का सबसे असरदार तरीका है। पर इसका सीपीआर दिया कैसे जाता है, किसे और कब इसकी जरूरत है, ये बातें जानते हैं आप?
पहले जान लीजिए सीपीआर होता क्या है?
सीपीआर यानी कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन। इसका शाब्दिक अर्थ जानिए
- कार्डियो- दिल या हार्ट।
- पल्मोनरी- फेफड़े या सांस की गति।
- रिससिटेशन- दोबारा से शुरू करना।
सीपीआर एक जीवनरक्षक तकनीक है, जो दिल के काम न करने या पल्स न आने की स्थिति में रक्त और ऑक्सीजन के प्रवाह को सभी अंगों तक बनाए रखने में मदद करती है। सही समय पर दिया गया सीपीआर व्यक्ति की जान बचाने की संभावना को 2-3 गुना तक बढ़ा सकता है। इसलिए हर व्यक्ति को इसके बारे में बुनियादी जानकारी होना बेहद जरूरी है।
किसे सीपीआर की जरूरत है, ये कैसे पहचानें?
अमर उजाला में आयोजित एक हेल्थ कैंप के दौरान नोएडा स्थिति एक निजी अस्पताल में इमरजेंसी सेंटर की डॉक्टर सुरभि छाबड़ा ने सीपीआर और इसके देने के तरीके के बारे में सारी जानकारी दी।
डॉक्टर कहती हैं, हर बार बेहोशी की स्थिति में मरीज को सीपीआर देने की जरूरत नहीं होती है। लो बीपी, लो शुगर, एंग्जाइटी जैसी कई वजहों से लोगों को बेहोशी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सीपीआर की जरूरत नहीं होती है।
- सबसे पहले हमें चेक करना होता है कि मरीज सिर्फ बेहोश है या फिर उसे अरेस्ट हुआ है? इसका पता लगाने के लिए मरीज के कंधों को हिलाकर उससे पूछें कि- आप ठीक हैं या नहीं?
- अगर मरीज का शुगर, बीपी लो है या एंग्जाइटी है तो वो दबी आवाज में कुछ जवाब देगा।
- अगर कुछ रिस्पांड नहीं कर रहा हो तो उसकी पल्स और सांसों की जांच करें।
- अगर मरीज का पल्स और सांसें दोनों नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में सीपीआर दिया जाना चाहिए।
सीपीआर देने का सही तरीका क्या है?
छाती को सही गति से दबाने की प्रक्रिया कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) रक्त के संचार को ठीक रखने में मददगार हो सकती है। इससे दिल को फिर से रक्त का संचार मिलने लगता है और जान बच सकती है।
- इसके लिए सबसे पहले रोगी के कपड़े और बेल्ट ढीला कर दें और सीपीआर देते समय एक मिनट में कम से कम 100-120 बार पंप करें।
- हमेशा सीधे हाथ से सीपीआर दें, कोहनी मुड़नी नहीं चाहिए।
- इसके साथ मरीज की सांस और नाड़ी को चेक करते रहे और बार-बार सीपीआर देते रहें, जब तक कि धड़कन चलने न लगे या उसे तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में न पहुंचा दिया जाए।
इन बातों को भी जान लीजिए
सीपीआर के बारे में कुछ बातें जाननी और भी जरूरी हैं।
- अक्सर लोगों को लगता है दिल तो बाईं तरफ होता है तो सीपीआर भी बाईं तरफ देना है, हालांकि ऐसा नहीं है आपको छाती के बीचों-बीच दबाव डालना है।
- सीपीआर देते समय अपने हाथों को एकदम सीधा रखें जिससे छाती पर दबाव अच्छे से बने।
- सीपीआर सही तरीके से दिया जा रहा है या नहीं इसका पता लगाने की तरीका ये है कि हमेशा दबाव आपको हिप ज्वाइंट्स पर महसूस होना चाहिए न कि कलाई या कोहनी पर।
- सीपीआर देते समय 60 तक गिनें और लगातार सीपीआर की मदद से छाती को दबाते रहें।
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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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