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CPR Tips: सीपीआर देने से पहले जरूर चेक कर लें ABC, डॉक्टर ने दिया बड़ा सुझाव

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिखर बरनवाल Updated Fri, 20 Feb 2026 02:15 PM IST
सार

CPR Tips For Beginners: कार्डियक अरेस्ट के तुरंत बाद सीपीआर देना जीवन रक्षक साबित हो सकता है। मगर सीपीआर देने से पहले मरीज में कुछ चीजों का जांच करना बहुत जरूरी होता है, जिससे ये कंफर्म किया जा सके कि मरीज को सीपीआर की जरूरत है भी या नहीं। आइए इस लेख में डॉक्टर से इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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CPR Tips: Dr. Surbhi Chhabra explains the ABC Rule (Airway, Breathing, Circulation) Before Giving CPR
सीपीआर देने से पहले जरूर चेक करें ये तीन चीजें - फोटो : Amar Ujala

ABC Rule in CPR First Aid: सीपीआर एक जीवनरक्षक आपातकालीन प्रक्रिया है जो हृदय गति रुकने पर शरीर में ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखने में मदद कर सकती है। सही समय पर दी गई सीपीआर अस्पताल पहुंचने से पहले मरीज के जीवित बचने की संभावना को कई गुना बढ़ा सकती है।



नोएडा के अमर उजाला कार्यालय में आयोजित एक विशेष हेल्थ कैंप के दौरान हृदय स्वास्थ्य और आपातकालीन चिकित्सा पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। इस कार्यक्रम में नोएडा के एक निजी अस्पताल की वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सुरभि छाबड़ा ने जीवन रक्षक तकनीक 'सीपीआर' (CPR) के बारे में एक बड़ा और जरूरी सुझाव दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सीपीआर देने से पहले यह सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है कि मरीज को वास्तव में इसकी आवश्यकता है भी या नहीं। 

अक्सर घबराहट में लोग बेहोश पड़े हर व्यक्ति को सीपीआर देना शुरू कर देते हैं, जो कि डॉ. सुरभि के अनुसार मरीज के लिए नुकसानदायक भी साबित हो सकता है। डॉ. छाबड़ा ने बताया कि किसी भी व्यक्ति को सीपीआर देने से पहले 'एबीसी' (ABC) फॉर्मूले की जांच करना जरूरी है। यह तीन चरणों वाली प्रक्रिया बताने में मदद करती है कि क्या व्यक्ति का दिल या सांस वास्तव में रुक गई है। सही पहचान के बिना दी गई चेस्ट कंप्रेशन (छाती दबाना) मरीज की पसलियों या आंतरिक अंगों को चोट पहुंचा सकती है।

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सीपीआर देने से पहले जरूर चेक करें ये तीन चीजें - फोटो : Adobe Stock

एयरवे (Airway)
डॉ. सुरभि के अनुसार, एबीसी फॉर्मूले में सबसे पहला चरण 'ए' यानी एयरवे (Airway) की जांच करना है। जब कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए या बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले यह देखें कि उसका वायु मार्ग खुला है या नहीं। कई बार गले में कुछ फंसने या जीब के पीछे की ओर गिरने के कारण सांस का रास्ता रुक जाता है।

ऐसी स्थिति में मरीज का सिर थोड़ा पीछे झुकाएं और उसकी ठुड्डी को ऊपर उठाएं। यह क्रिया सांस की नली को सीधा करने और हवा के प्रवाह के लिए रास्ता साफ करने में मदद करती है। अगर वायु मार्ग अवरुद्ध है, तो सीपीआर देने का कोई लाभ नहीं होगा क्योंकि ऑक्सीजन फेफड़ों तक पहुंच ही नहीं पाएगी।


ये भी पढ़ें- CPR: कब पड़ती है सीपीआर की जरूरत, क्या है इसे देने का सही तरीका? डॉक्टर ने दी सारी जानकारी
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सीपीआर देने से पहले जरूर चेक करें ये तीन चीजें - फोटो : Adobe Stock

ब्रिदिंग (Breathing)
एबीसी प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण चरण 'बी' यानी ब्रिदिंग है। डॉ. छाबड़ा ने सुझाव दिया कि मरीज के पास अपना कान ले जाएं और उसकी सांसों की आवाज सुनने की कोशिश करें। साथ ही अपनी नजरें मरीज की छाती पर रखें और देखें कि क्या वह ऊपर-नीचे हो रही है।

अगर व्यक्ति सामान्य रूप से सांस ले रहा है, तो उसे सीपीआर की आवश्यकता नहीं होती है। अक्सर लोग सामान्य बेहोशी या 'मिर्गी' के दौरे में भी सीपीआर देने लगते हैं, जो गलत है। केवल तभी सीपीआर दें जब व्यक्ति की सांसें पूरी तरह रुक चुकी हों।

CPR Tips: Dr. Surbhi Chhabra explains the ABC Rule (Airway, Breathing, Circulation) Before Giving CPR
सीपीआर देने से पहले जरूर चेक करें ये तीन चीजें - फोटो : Adobe Stock

सर्कुलेशन (Circulation)
एबीसी फॉर्मूले का अंतिम स्टेज है 'सी' यानी सर्कुलेशन चेक करना है। इसका मतलब है कि मरीज के शरीर में खून का प्रवाह हो रहा है या नहीं, इसे जांचना। इसके लिए गर्दन के पास स्थित 'कैरोटिड पल्स' को 5 से 10 सेकंड तक महसूस करें।

आप कलाई की नब्ज को भी चेक कर सकते हैं लेकिन अगर कलाई पर नब्ज न मिले तो गर्दन के पास ही चेक करें। डॉ. सुरभि के मुताबिक, अगर पल्स महसूस नहीं हो रही है और मरीज की सांसें भी बंद हैं, तो यह 'कार्डियक अरेस्ट' का स्पष्ट संकेत है। ऐसी स्थिति में बिना देरी किए तुरंत सीपीआर शुरू कर देना चाहिए।

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CPR Tips: Dr. Surbhi Chhabra explains the ABC Rule (Airway, Breathing, Circulation) Before Giving CPR
सीपीआर देने से पहले जरूर चेक करें ये तीन चीजें - फोटो : Adobe Stock
गलत सीपीआर से होने वाले जोखिम
डॉ. सुरभि छाबड़ा ने अंत में यह स्पष्ट किया कि सीपीआर एक बेहद शक्तिशाली जीवन रक्षक तकनीक है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता सही समय और सही मरीज के चुनाव पर निर्भर करती है। अगर किसी ऐसे व्यक्ति की छाती जोर से दबाई जाए जिसका दिल धड़क रहा है, तो इससे हार्ट रिदम बिगड़ सकता है और पसलियां टूट सकती हैं।

एबीसी फॉर्मूले का पालन करने से आप न सिर्फ मरीज की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे, बल्कि आपातकालीन चिकित्सा सहायता (एम्बुलेंस) आने तक उसे एक नया जीवन देने की संभावना भी बढ़ा सकेंगे।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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